उत्तर प्रदेश में हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल, मुस्लिम दर्जी ने रामलीला के लिए दान की पुश्तैनी जमीन

उत्तर प्रदेश के भदोही स्थित बड़ागांव में दर्जी अब्दुल रहीम सिद्दीकी ने रामलीला के लिए तीन बिस्वा जमीन दान दी। 94 साल से बिना तय जगह पर हो रही रामलीला को अब स्थाई स्थान मिल गया है। हिंदू-मुस्लिम समुदाय ने मिलकर सात लाख रुपये भी जुटाए। यह कदम गांव में भाईचारे की मिसाल बन गया है।

Priya Shandilya( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
अपडेटेड20 Dec 2025, 11:28 AM IST
रामलीला के लिए मुस्लिम शख्स ने दान दी पुश्तैनी जमीन (सांकेतिक तस्वीर)
रामलीला के लिए मुस्लिम शख्स ने दान दी पुश्तैनी जमीन (सांकेतिक तस्वीर)(PTI)

आज जब समाज में छोटी-छोटी बातों पर दूरियां बढ़ती दिखती हैं, ऐसे में उत्तर प्रदेश के भदोही जिले से आई ये खबर दिल छू लेने वाली है। यहां एक साधारण से दर्जी ने ऐसा काम कर दिखाया है, जो बरसों तक याद रखा जाएगा।

मुस्लिम शख्स ने दान दी पुश्तैनी जमीन

भदोही के गोपीगंज इलाके के बड़ागांव में हर साल रामलीला तो होती थी, लेकिन इसके लिए कोई तय जगह नहीं थी। मंचन के वक्त गांव को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इसी परेशानी को देखकर गांव के 65 वर्षीय अब्दुल रहीम सिद्दीकी उर्फ कल्लू ने आगे बढ़कर अपनी पुश्तैनी जमीन रामलीला आयोजन के लिए दान कर दी। अब्दुल रहीम पेशे से दर्जी हैं।

जमीन दान की मिसाल

सिद्दीकी ने करीब तीन बिस्वा जमीन 'आदर्श रामलीला समिति बड़ागांव’ को दे दी। उन्होंने बाकायदा कागजात भी समिति के नाम कर दिए। यह कदम गांव के लिए स्थाई समाधान बन गया है। अब्दुल रहीम सिद्दीकी का कहना है कि उन्होंने अपनी मर्जी से जमीन दान की है और इसके सारे कागजात भी आदर्श रामलीला समिति बड़ागांव के नाम करा दिए गए हैं।

जहां हिंदू-मुस्लिम साथ मनाते हैं त्योहार

करीब छह हजार आबादी वाले इस गांव में हिंदू और मुस्लिम समुदाय हमेशा मिल-जुलकर त्योहार मनाते आए हैं। अब्दुल रहीम खुद भी कई बार रामलीला में अलग-अलग किरदार निभा चुके हैं। बीते कुछ सालों से वह मंचन की देखरेख कर रहे थे, लेकिन इस बार उन्होंने कुछ ऐसा कर दिया जिससे पूरा गांव गर्व महसूस कर रहा है।

94 साल पुरानी रामलीला को मिला स्थायी ठिकाना

गांव के बुजुर्ग और पूर्व प्रधान राधेश्याम मिश्रा ने पीटीआई-भाषा से बातचीत में बताया कि बड़ागांव में करीब 94 साल से रामलीला का मंचन हो रहा है, लेकिन कभी कोई स्थायी स्थल नहीं था। अब्दुल रहीम के इस कदम से गांव की एक बड़ी समस्या हमेशा के लिए खत्म हो गई है।

निर्माण कार्य शुरू, लोगों ने भी खोला दिल

रामलीला समिति के सचिव विनय शुक्ला के मुताबिक, दान की गई जमीन पर मंच और अन्य निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। विधि-विधान से पूजा के बाद नींव खुदाई की गई। खास बात ये रही कि हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मिलकर मौके पर ही करीब सात लाख रुपये इकट्ठा कर निर्माण के लिए दे दिए।

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