
उत्तर प्रदेश के लखनऊ, गाजियाबाद, बलरामपुर और कानपुर नगर उन जिलों में से हैं, जहां मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाताओं के सबसे ज्यादा फॉर्म जमा नहीं हुए। आधिकारिक आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है। राज्य में बुंदेलखंड क्षेत्र के ललितपुर, हमीरपुर, महोबा, झांसी और चित्रकूट जैसे जिलों में मसौदा सूची से सबसे कम लोगों के नाम हटाए गए। हालांकि मुस्लिम बहुल इलाकों में अपेक्षाकृत कम नाम कटे हैं।
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, रामपुर (18.29 प्रतिशत) और मुरादाबाद (15.76 प्रतिशत) जैसे मुस्लिम बहुल जिलों में नाम हटाने का प्रतिशत अपेक्षाकृत कम था, जबकि सहारनपुर में यह 16.37 फीसदी, मुजफ्फरनगर में 16.29 प्रतिशत, अलीगढ़ में 18.60 फीसदी, आजमगढ़ में 15.25 प्रतिशत, मऊ में 17.52 फीसदी और पीलीभीत में 13.61 प्रतिशत था। ये ऐसे इलाके हैं जहां मुस्लिम आबादी काफी ज्यादा है।
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने कहा कि एसआईआर के बाद मंगलवार को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची से 2.89 करोड़ मतदाताओं को बाहर कर दिया गया है और सूची में 12.55 करोड़ मतदाताओं के नाम हैं। रिणवा ने कहा कि पहले सूचीबद्ध 15.44 करोड़ मतदाताओं में से 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम मृत्यु, स्थायी पलायन या कई पंजीकरण के कारण मसौदा सूची में शामिल नहीं हो सके।
6 जनवरी को प्रकाशित जिलावार मसौदा सूची के आंकड़ों के अनुसार, लखनऊ में लगभग 12 लाख मतदाताओं के फॉर्म जमा नहीं हुए हैं, जो कुल का 30.04 प्रतिशत है। इस तरह लखनऊ इस सूची में सबसे ऊपर रहा। जिले में मतदाताओं की संख्या अक्टूबर 2025 में 39.94 लाख थी, जो संशोधित सूची में घटकर 27.94 लाख रह गई है।
बिना जमा हुए फॉर्म की श्रेणी में 1.28 लाख मृत्यु से जुड़े मामले, 4.28 लाख ऐसे मतदाता शामिल हैं जिन्हें तलाशा नहीं जा सका या जो अनुपस्थित पाए गए, और 5.36 लाख स्थायी स्थानांतरण के मामले हैं। इसके अलावा अन्य श्रेणियां भी शामिल हैं।
आंकड़ों के अनुसार, गाजियाबाद में 28.83 प्रतिशत फॉर्म अब तक जमा नहीं हुए, जो लगभग 5.83 लाख मतदाता होते हैं। जिले के कुल मतदाताओं की संख्या 28.38 लाख से घटकर 20.20 लाख हो गई। आंकड़ों के अनुसार, बिना जमा हुए फॉर्म में से लगभग 64 हजार मौत के मामलों से संबंधित थे, 3.20 लाख मतदाताओं को तलाशा नहीं जा सका या अनुपस्थित थे और 3.60 लाख स्थायी स्थानांतरण से संबंधित थे।
इसके अनुसार, बलरामपुर बिना जमा हुए फॉर्म के मामले में 25.98 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर रहा जो लगभग 4.11 लाख मतदाता होते हैं। जिले में मतदाताओं की संख्या 15.83 लाख से घटकर 11.18 लाख हो गई। लगभग 63,000 मौत से जुड़े मामले, 1.60 लाख लापता या अनुपस्थित मतदाता और 1.33 लाख मामले स्थायी रूप से स्थानांतरण से संबंधित थे।
आंकड़ों के अनुसार कानपुर नगर में 25.50 प्रतिशत फॉर्म जमा नहीं हुए, जो लगभग 9.02 लाख मतदाता होते हैं। यहां मतदाताओं की संख्या 35.38 लाख से घटकर 26.36 लाख हो गई। इन आंकड़ों में लगभग 1.04 लाख मौतें, 3.10 लाख लापता या अनुपस्थित मतदाता और स्थायी रूप से स्थानांतरण के 3.92 लाख मामले शामिल थे।
प्रयागराज में 24.64 प्रतिशत फॉर्म जमा नहीं हुए, जो लगभग 11.56 लाख मतदाताओं के बराबर है। जिले के मतदाताओं की संख्या 46.93 लाख से घटकर 35.37 लाख हो गई। इनमें से लगभग 1.74 लाख मामले मृत्यु, 3.67 लाख लापता या अनुपस्थित मतदाताओं और 4.89 लाख स्थायी रूप से स्थानांतरण से संबंधित थे। गौतमबुद्ध नगर आठ जिलों में सातवें स्थान पर रहा, जहां 23.98 प्रतिशत फॉर्म जमा नहीं हुए, यानी लगभग 4.47 लाख मतदाताओं के फॉर्म जमा नहीं हुए। मसौदे सूची में जिले के कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 18.65 लाख हो गई।
आंकड़ों के अनुसार आगरा जिला आठवें स्थान पर रहा, जहां 23.25 प्रतिशत फॉर्म जमा नहीं हुए, जिनमें लगभग 8.37 लाख मतदाता शामिल थे। जिले के मतदाताओं की संख्या 36.00 लाख से घटकर 27.63 लाख हो गई है। राज्य के दूसरे प्रमुख जिलों में, एसआईआर के दौरान वाराणसी में 18.18 प्रतिशत फॉर्म जमा नहीं हुए, जबकि गोरखपुर में 17.61 प्रतिशत, रायबरेली में 16.35 प्रतिशत, अमेठी में 18.60 प्रतिशत, इटावा में 18.95 प्रतिशत, कन्नौज में 21.57 प्रतिशत और मथुरा में 19.19 प्रतिशत में फॉर्म जमा नहीं हुए।
इस सूची में ललितपुर सबसे नीचे था, जहां 9.95 प्रतिशत फॉर्म जमा नहीं हुए थे, इसके बाद हमीरपुर (0.78 प्रतिशत), महोबा (12.42 प्रतिशत), बांदा (13 प्रतिशत), चित्रकूट (13.67 प्रतिशत) और झांसी (13.92 प्रतिशत) का स्थान था। मुख्य निर्वाचन अधिकारी रिणवा ने बुधवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि ये आंकड़े मतदाता सूची के मसौदे पर आधारित हैं और 6 मार्च को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने से पहले छह फरवरी तक दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इनमें संशोधन किया जा सकता है।
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