PM Modi on Vijay Diwas: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को विजय दिवस पर 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के सैनिकों को श्रद्धांजलि दी और कहा कि उनके साहस और बलिदान ने भारत को एक ऐतिहासिक जीत दिलाई।
पीएम मोदी ने विजय दिवस पर वीर सैनिकों को किया याद
प्रधानमंत्री ने आज एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'विजय दिवस पर हम उन बहादुर सैनिकों को याद करते हैं जिनके साहस और बलिदान ने 1971 में भारत को एक ऐतिहासिक जीत दिलाई। उनके पक्के इरादे और निस्वार्थ सेवा ने हमारे देश की रक्षा की और हमारे इतिहास में गौरव का एक पल दर्ज किया।'
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यह दिन सैनिकों की बहादुरी को सलाम करने और उनकी बेमिसाल भावना की याद दिलाने वाला है, जो भारतीयों की पीढ़ियों को प्रेरित करता है।
रामायण के श्लोक से पाकिस्तान पर तंज?
मोदी ने एक और एक्स पोस्ट में रामायण का एक श्लोक शेयर किया जिसमें वीरता का जिक्र है। यह श्लोक वाल्मीकि रामायण के युद्धकांड का है। महाबलि रावाण के भाई कुंभकर्ण वीरों के बारे में बताते हुए कहता है कि शूरवीरों को अपने ही मुंह से अपनी प्रशंसा करना सहन नहीं होता। वे वाणी के द्वारा प्रदर्शन न करके चुपचाप दुष्कर पराक्रम प्रकट करते हैं।
हालांकि, प्रधानमंत्री ने यह श्लोक 'सुभाषित' के रूप में साझा किया है, लेकिन इसका निहितार्थ भी विजय दिवस से ही जुड़ता दिख रहा है। प्रधानमंत्री संभवतः बड़बोले पाकिस्तान को वीरता के गुण समझा रहे हैं और 1971 में भारत की वीरता के प्रदर्शन का उदाहरण दे रहे हैं।
रक्षा मंत्री बोले- देश गर्व और कृतज्ञता से ओत-प्रोत
बहरहाल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी विजय दिवस पर वीर सैनिकों को याद किया। राजनाथ ने लिखा, ‘विजय दिवस पर, देश 1971 की निर्णायक जीत दिलाने वाली भारतीय सशस्त्र सेनाओं के प्रति गर्व और कृतज्ञता से नतमस्तक है। सेना, नौसेना और वायु सेना ने बेहतरीन तालमेल से काम किया, इतिहास को नया रूप दिया और भारत के रणनीतिक संकल्प को साबित किया। उनकी वीरता, अनुशासन और युद्ध भावना पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी और हमारी राष्ट्रीय इच्छाशक्ति को मजबूत करेगी।’
बांग्लादेश पर आज कट्टरपंथियों का कब्जा
विजय दिवस 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर भारत की जीत की याद में मनाया जाता है। इस जीत के बाद बांग्लादेश आजाद हुआ था। हालांकि, आज का बांग्लादेश, भारत के खिलाफ पाकिस्तान के साथ साठगांठ में जुटा है।
वहां छात्र आंदोलन की आड़ में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से बेदखल कर दिया गया और अब बांग्लादेश पर कट्टरपंथियों का कब्जा है। इन्हीं कट्टरपंथियों ने शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर्रहमान की मूर्तियां तक तोड़ डालीं जिन्होंने 1971 के युद्ध में पाकिस्तान का सामना करके बांग्लादेश की आजादी की नींव रखी थी।