
Women Reservation Bill: गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने राजनीतिक सहयोगी दलों, विपक्षी दलों तथा संसद के माननीय सदस्यों से अपील की है कि वे महिलाओं के विधायी प्रतिनिधित्व को सशक्त बनाने वाले ऐतिहासिक ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एकजुट होकर आगे आएं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक विधायी सुधार नहीं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक संरचना को और अधिक समावेशी, न्यायसंगत और प्रतिनिधिक बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि आगामी 16 अप्रैल से प्रारंभ होने वाले संसद के विशेष सत्र के संदर्भ में मुख्यमंत्री डॉ. सावंत ने इसे भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का एक निर्णायक और ऐतिहासिक क्षण बताया है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और उनके द्वारा प्रस्तुत ‘विकसित भारत’ के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि वर्ष 2023 में पारित इस महत्वपूर्ण कानून को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
डॉ. सावंत ने अपने वक्तव्य में इस बात पर विशेष बल दिया कि किसी भी समाज की प्रगति इस बात से मापी जाती है कि उसमें महिलाओं को नेतृत्व, निर्णय-निर्माण और नीति-निर्धारण में कितनी भागीदारी दी जाती है। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, विज्ञान, प्रशासन, उद्योग, उद्यमिता और अन्य अनेक क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। ऐसे में यह आवश्यक है कि उनकी वही क्षमता और नेतृत्व कौशल देश के विधायी संस्थानों में भी परिलक्षित हो।
उन्होंने आगे कहा कि यह अधिनियम महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करेगा और उन्हें राष्ट्रीय निर्णय प्रक्रिया में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर देगा। इससे न केवल लोकतांत्रिक भागीदारी का दायरा बढ़ेगा, बल्कि शासन व्यवस्था में नई सोच, नवाचार और संवेदनशीलता का भी समावेश होगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इस महत्वपूर्ण पहल को आगे बढ़ाने से पहले संवैधानिक विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और विभिन्न संबंधित पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया गया है। यह कदम लंबे समय से लंबित एक राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने की दिशा में एक ठोस और निर्णायक प्रयास है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इसके माध्यम से देश में सुशासन और अधिक सुदृढ़ होगा तथा सामाजिक संतुलन को भी नई दिशा मिलेगी।
डॉ. सावंत ने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का क्रियान्वयन किसी एक राजनीतिक दल या विचारधारा का विषय नहीं है, बल्कि यह पूरे राष्ट्र की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे अपने मतभेदों से ऊपर उठकर इस ऐतिहासिक पहल का समर्थन करें और देश की महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए एकजुट होकर कार्य करें।
अंत में, मुख्यमंत्री ने सभी हितधारकों, जनप्रतिनिधियों और समाज के विभिन्न वर्गों से अपील की कि वे इस परिवर्तनकारी पहल के पक्ष में सकारात्मक, रचनात्मक और सहयोगात्मक भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम भारत को एक अधिक समावेशी, न्यायपूर्ण और विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा तथा प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण को साकार करने में सहायक होगा।
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