
Nepal Flood India Impact: नेपाल में बाढ़ की तस्वीरें सामने आने के बाद बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में भी चिंता बढ़ गई थी। सवाल यह था कि नेपाल में आई अचानक बाढ़ का असर भारत तक कितनी तेजी से पहुंच सकता है। इसकी वजह दोनों देशों के बीच जुड़ी नदियों का सिस्टम है। नेपाल की भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी जैसी नदियों का पानी आगे भारत में गंडक नदी के जरिए पहुंचता है। यही कारण है कि नेपाल में भारी बारिश या अचानक बाढ़ आने पर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के नदी किनारे वाले इलाकों में निगरानी बढ़ा दी जाती है।
नेपाल और भारत के बीच कई नदियों का जलप्रवाह सीधे जुड़ा हुआ है। नेपाल में ऊपरी इलाकों में तेज बारिश या अचानक बाढ़ आने पर वहां से निकलने वाला अतिरिक्त पानी नीचे की ओर बहता है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों का पानी आगे नारायणी नदी तंत्र में पहुंचता है। यही जलप्रवाह भारत में प्रवेश करने के बाद गंडक नदी के रूप में बिहार और उत्तर प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है। इसलिए नेपाल में नदी का जलस्तर और बहाव बढ़ने पर भारतीय अधिकारियों को पहले से सतर्क रहना पड़ता है।
28 अगस्त की ताजा सरकारी जानकारी के मुताबिक बिहार में बाढ़ का तत्काल खतरा फिलहाल टल गया है। बुधवार रात गंडक नदी के बहाव में बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन गुरुवार से इसमें कमी दर्ज की जा रही है। वाल्मीकिनगर बैराज पर 28 अगस्त सुबह 6 बजे गंडक नदी का बहाव 99,800 क्यूसेक दर्ज किया गया। बिहार के जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी के मुताबिक नदी का प्रवाह फिलहाल सामान्य है।
बिहार सरकार के मुताबिक नेपाल से आने वाला पानी भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी नदियों से होते हुए गंडक तक पहुंचता है। इस पूरे रास्ते में पानी का प्रवाह कमजोर होता जाता है। इसी वजह से नेपाल में जिस स्तर की बाढ़ देखी गई, उसका वैसा ही प्रभाव बिहार में देखने को नहीं मिला। हालांकि नदी के बहाव में अचानक बदलाव की संभावना को देखते हुए प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है।
बाढ़ का तत्काल खतरा कम होने के बावजूद बिहार में गंडक से प्रभावित आठ जिलों को एहतियातन अलर्ट पर रखा गया है। जल संसाधन विभाग की टीमें तटबंधों की चौबीसों घंटे निगरानी और गश्त कर रही हैं। इसका मकसद नदी के जलस्तर या बहाव में दोबारा तेजी आने की स्थिति में तुरंत कार्रवाई करना है।
नेपाल की बाढ़ के बाद उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर जैसे सीमावर्ती जिलों में भी सतर्कता बढ़ाई गई थी। वजह यहां से जुड़ी गंडक और नारायणी नदियां हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने स्थानीय प्रशासन को नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखने और जरूरी तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।
नेपाल की बाढ़ के बीच सिर्फ गंडक ही निगरानी में नहीं है। बिहार की गंगा, कोसी, बागमती, बूढ़ी गंडक और दूसरी प्रमुख नदियों के जलस्तर में भी अलग-अलग जगह बदलाव दर्ज किया गया है। बिहार जल संसाधन विभाग के 27 अगस्त के आंकड़ों में कई स्थानों पर नदियों का जलस्तर घटता हुआ दर्ज हुआ था। उदाहरण के लिए दरभंगा के एकमिघाट में अधवारा नदी का जलस्तर 24 घंटे में 30 सेंटीमीटर घटा था, जबकि मुजफ्फरपुर के बेनीबाद में बागमती का जलस्तर भी घटा था।
नदी के जलस्तर पर सिर्फ नेपाल से आने वाले पानी का असर नहीं होता। स्थानीय बारिश भी स्थिति को बदल सकती है। मौसम विभाग के 28 अगस्त के पूर्वानुमान में बिहार में 28 अगस्त से 1 सितंबर तक कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है। 28 अगस्त को बिहार में गरज-चमक और तेज हवाओं की भी संभावना है। यानी फिलहाल नेपाल से आने वाले पानी का दबाव कम हुआ है, लेकिन बिहार में बारिश की गतिविधि जारी रहने के कारण नदियों के जलस्तर पर नजर रखना जरूरी है।
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