Moon Formation: कैसे बना चंद्रमा? वैज्ञानिकों ने नए रिसर्च में बताई नई बात, आपको भी जाननी चाहिए

Earth Moon Mystery: वैज्ञानिकों ने चंद्रमा के निर्माण के लंबे समय से चले आ रहे रहस्य को सुलझाने के लिए एक नया सिद्धांत पेश किया है। इस मॉडल के अनुसार, पृथ्वी पर मंगल ग्रह के आकार के एक ही विशाल टकराव के बजाय लाखों वर्षों में तीन बड़े टकरावों की एक श्रृंखला से चंद्रमा का निर्माण हुआ।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड19 Dec 2025, 12:46 PM IST
चंद्रमा का निर्माण कैसे हुआ? (AI Image)
चंद्रमा का निर्माण कैसे हुआ? (AI Image)(Gemini)

Moon Formation Theory: धरती का सबसे बड़ा और सबसे करीब का साथी हमारा चंद्रमा कैसे बना? यह सवाल खगोल विज्ञान के सबसे बड़े रहस्यों में से एक रहा है। अब वैज्ञानिकों ने चंद्रमा की उत्पत्ति को बेहतर ढंग से समझने के लिए एक नया विचार पेश किया है।

यह सिद्धांत बताता है कि चंद्रमा का निर्माण किसी एक बड़े प्रभाव से नहीं, बल्कि लाखों वर्षों में पृथ्वी पर हुए तीन या उससे अधिक बड़े टकरावों से हुआ होगा। यह मॉडल पृथ्वी और चंद्रमा की संरचना में आश्चर्यजनक रूप से मौजूद समानता को समझाने में मदद कर सकता है।

चंद्रमा की उत्पत्ति का 'एक-टकराव' सिद्धांत

चंद्रमा की उत्पत्ति को लेकर जो सिद्धांत सबसे ज्यादा प्रचलित है, उसके मुताबिक सौर मंडल के शुरुआती दौर में पृथ्वी और ‘थिया’ (Theia) नामक मंगल ग्रह के आकार की एक विशाल वस्तु के बीच एक जोरदार टक्कर हुई थी।

इस टकराव से जो मलबा अंतरिक्ष में फैला, वही धीरे-धीरे जमा होकर हमारे मौजूदा बड़े प्राकृतिक उपग्रह, चंद्रमा में बदल गया। हालांकि, इस मॉडल के साथ एक बड़ी समस्या है: पृथ्वी और चंद्रमा की संरचना में गजब की समानता है। इस सिद्धांत के हिसाब से चंद्रमा में पृथ्वी की तुलना में 'थिया' की अधिक सामग्री होनी चाहिए थी, जो इसकी समानता को मुश्किल बना देती है।

यह भी पढ़ें | कुत्ता पालने पर आपके व्यवहार पर कैसा असर होता है? रिसर्च में बड़ा खुलासा

तीन टकरावों की श्रृंखला ने बनाया 'मूनलेट' और फिर चंद्रमा

फिलिप कार्टर और उनके सहयोगियों ने एक नया दृष्टिकोण प्रस्तावित किया है। उनका मानना है कि शुरुआती सौर मंडल में लाखों वर्षों के दौरान पृथ्वी पर तीन या अधिक बड़े टकराव हुए, जिससे आज के चंद्रमा की उत्पत्ति हुई। इन टकरावों में शामिल वस्तुएं चंद्रमा के वर्तमान आकार से लेकर लगभग मंगल ग्रह के आकार तक की थीं।

इस नए परिदृश्य के अनुसार, हर एक प्रभाव ने पृथ्वी की कक्षा में एक छोटा चंद्रमा उत्पन्न किया होगा जिसे मूनलेट कहा जाता है। इसके बाद, हजारों वर्षों की अवधि में ये मूनलेट अपने गुरुत्वाकर्षण के कारण धीरे-धीरे एक साथ मिलकर एक बड़ा चंद्रमा बन गए।

यह भी पढ़ें | हेयरफॉल को रोकने का डॉक्टर ने बताया रामबाण इलाज, शैम्पू में मिलाकर लगाएं ये चीज

कम टकराव, बेहतर स्पष्टीकरण

पिछले मॉडलों में भी चंद्रमा की मल्टी-इम्पैक्ट उत्पत्ति की बात की गई थी, लेकिन उनमें कहीं अधिक संख्या में टकरावों की जरूरत बताई गई थी- कुछ मॉडल तो 20 तक टकरावों की बात करते थे। कार्टर ने स्पष्ट किया है कि तीन टकरावों के बाद हमने एक पूर्ण चंद्रमा बनाने के लिए पर्याप्त द्रव्यमान कक्षा में डाल दिया था।

रॉबर्ट सिट्रॉन का कहना है कि कम टकरावों का होना बेहतर हो सकता है। इसका कारण यह है कि किसी मॉडल में जितने अधिक टकराव होते हैं, मौजूदा मूनलेट के पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकलने की संभावना उतनी ही अधिक होती है, जिससे चंद्रमा का निर्माण बाधित हो सकता है। हालांकि, अधिक टकरावों की बात करने से पृथ्वी और चंद्रमा के बीच संरचनात्मक समानता अधिक होती है, जो कि वास्तविक स्थिति को बेहतर ढंग से समझाती है।

यह भी पढ़ें | एक्सरसाइज से कैंसर का खतरा घटता है? रिसर्च ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया

पृथ्वी-चंद्रमा प्रणाली क्यों है खास

चंद्रमा का निर्माण कैसे हुआ, यह समझना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि पृथ्वी और चंद्रमा की यह प्रणाली सौर मंडल में असामान्य है। सिट्रॉन के अनुसार, 'यह एक अद्वितीय उपग्रह है।' वह आगे कहते हैं, 'यह पृथ्वी के सापेक्ष बहुत बड़ा है, जबकि मंगल के चंद्रमा (फोबोस और डीमोस) मंगल की तुलना में बहुत छोटे हैं, और बृहस्पति और शनि जैसे गैस दिग्गजों के उपग्रह भी उन ग्रहों की तुलना में बहुत छोटे हैं।' यह असाधारण आकार अनुपात ही चंद्रमा की उत्पत्ति को इतना खास और रहस्यमय बना देता है।

Get Latest real-time updates

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

बिजनेस न्यूज़न्यूज़Moon Formation: कैसे बना चंद्रमा? वैज्ञानिकों ने नए रिसर्च में बताई नई बात, आपको भी जाननी चाहिए
More
बिजनेस न्यूज़न्यूज़Moon Formation: कैसे बना चंद्रमा? वैज्ञानिकों ने नए रिसर्च में बताई नई बात, आपको भी जाननी चाहिए