
ज्यादातर बच्चे 12वीं के नतीजे आने के बाद कॉलेज की तैयारी में जुट जाते हैं। निसर्ग अधिकारी ने इसी दौरान देश के सबसे बड़े शिक्षा बोर्ड CBSE के डिजिटल मूल्यांकन पोर्टल में सेंध की आशंका जताते हुए पूरे देश में बहस छेड़ दी। नतीजा यह हुआ कि IIT कानपुर के निदेशक खुद उनसे मिलने पहुंचे और उन्हें संस्थान के साइबर सुरक्षा हब में नियुक्ति का प्रस्ताव दे दिया। नौकरी मिली, लेकिन 19 साल के इस युवा रिसर्चर को सैलरी से पूरी तसल्ली नहीं, डॉलर में कमाई का आदी यह किशोर अब रुपये की तनख्वाह को 'ठीकठाक, लेकिन उम्मीद से कम' बताता है।
निसर्ग अधिकारी को IIT कानपुर के साइबर सुरक्षा इनोवेशन हब C3iHub में OSINT (Open-Source Intelligence) और थ्रेट इंटेलिजेंस इंजीनियर के पद पर नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति संविदा (contractual) आधार पर है।
IIT कानपुर के निदेशक मनींद्र अग्रवाल ने बताया कि वे निसर्ग के उस ब्लॉग पोस्ट को पढ़कर उनसे मिलने गए जो 22 मई को प्रकाशित हुआ था और जिसने CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) पोर्टल की खामियों को उजागर किया था। दिल्ली में CBSE मुख्यालय में एक बैठक के दौरान दोनों की मुलाकात हुई और इसके दो सप्ताह बाद नियुक्ति हो गई।
निसर्ग इस पद पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्रोतों से सूचनाएं जुटाएंगे और वेबसाइटों एवं ऐप्लिकेशन में कमजोरियां खोजकर संगठनों को उन्हें दूर करने में मदद करेंगे। अग्रवाल के अनुसार, IIT कानपुर पहले भी इस टीम में युवा इंजीनियरों की नियुक्ति कर चुका है, और निसर्ग संस्थान के सबसे कम उम्र के इंजीनियरों में शामिल हैं।
खुद निसर्ग इसे एक नई शुरुआत के रूप में देखते हैं। उन्होंने कहा, 'मैं इस अवसर को लेकर उत्साहित हूं क्योंकि यह पहली बार है जब मैं किसी सुरक्षा-केंद्रित भूमिका में काम करूंगा। इससे पहले के काम में मैं मुख्यतः सॉफ्टवेयर इंजीनियर था और साइबर सिक्यॉरिटी एक शौक था।'
निसर्ग और आईआईटी कानपुर, दोनों ने वेतन की सटीक राशि बताने से इनकार किया है। लेकिन निसर्ग ने संकेत दे दिया कि वे इससे पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'सैलरी ठीक ही है, लेकिन मुझे थोड़ी ज्यादा की उम्मीद थी। मैं अमेरिकी कंपनियों के साथ काम करने का आदी हूं और डॉलर में कमाने का जो फायदा था, वह मुझे यहां नहीं मिल रहा। डॉलर-रुपये का अंतर तो है ही।'
यह टिप्पणी उस बड़े सच की तरफ इशारा करती है जिसे भारत का टेक इकोसिस्टम अक्सर नजरअंदाज़ करता है। एक कुशल फ्रीलांस साइबर रिसर्चर जो डॉलर में काम करता है, उसे घरेलू संस्थाओं की पेशकश अक्सर फीकी लगती है, चाहे वह IIT जैसी प्रतिष्ठित संस्था ही क्यों न हो। हालांकि निसर्ग ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल वे कॉलेज नहीं जाना चाहते और स्टार्टअप एवं प्रोडक्ट बनाने में रुचि है।
CBSE ने इस साल पहली बार 12वीं कक्षा की कॉपियों के मूल्यांकन के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम लागू किया। इसी दौरान निसर्ग ने सार्वजनिक रूप से उपलब्ध CBSE सर्कुलर के जरिए पोर्टल तक पहुंच बनाई और ब्राउजर में लोड होने वाला फ्रंटएंड कोड पढ़ना शुरू किया। उन्होंने पांच गंभीर खामियाां उजागर कीं।
इनमें सबसे चिंताजनक थी, एक 'मास्टर पासवर्ड' का प्लेन टेक्स्ट में स्टोर होना, जिससे टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को पूरी तरह बायपास किया जा सकता था। निसर्ग ने 25 फरवरी को भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In को इसकी जानकारी दी, लेकिन उनके अनुसार केवल एक खामी ठीक की गई और बाकी तब तक बनी रहीं जब तक पोर्टल ही बंद नहीं कर दिया गया।
CBSE ने इन आरोपों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया। बोर्ड का कहना है कि खामियां केवल टेस्टिंग साइट तक सीमित थीं जिसमें सैंपल डेटा था, वास्तविक मूल्यांकन प्रणाली प्रभावित नहीं हुई। हमारे सहयोगी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स की पड़ताल में यह भी सामने आया कि OSM के लिए निविदा प्रक्रिया में अनियमितताएं थीं। पहली दो निविदाओं के बाद तकनीकी मानदंड घटाकर तीसरी निविदा जारी की गई जो Coempt Edu Teck ने जीती। इसके अलावा साइबर सुरक्षा प्रमाणपत्रों में भी विसंगतियां पाई गईं।
निसर्ग की कहानी एक ऐसे युवा की है जिसने परंपरागत रास्ते से हटकर खुद को साबित किया। उन्होंने 6-7 साल की उम्र में कोडिंग शुरू की और छठी कक्षा में CTF (Capture the Flag) प्रतियोगिताओं में भाग लेने लगे। CTF एक गेमीफाइड हैकिंग कंपिटिशन होती है जिसमें प्रतिभागी जानबूझकर कमजोर बनाए गए नेटवर्क और प्रोग्राम में 'फ्लैग' खोजते हैं। यह एथिकल हैकिंग की एक प्रमुख ट्रेनिंग विधि मानी जाती है।
उनके परिवार में कोई टेक या साइबर सुरक्षा से नहीं जुड़ा। माता-पिता दोनों फाइनैंस सेक्टर में काम करते हैं। बावजूद इसके, निसर्ग ने VC-funded स्टार्टअप्स में 'फाउंडिंग इंजीनियर' के रूप में काम किया और कई अमेरिकी कंपनियों के साथ प्रोजेक्ट किए। डिग्री को लेकर उनका रुख साफ है, 'इंजीनियर बनने के लिए डिग्री ज़रूरी नहीं।' निसर्ग ने कहा, 'मार्क जकरबर्ग के पास फॉर्मल डिग्री नहीं थी, फिर भी उन्होंने दुनिया का सबसे बड़ा सोशल नेटवर्क बनाया।'
IIT कानपुर के निदेशक अग्रवाल खुद मानते हैं कि निसर्ग में प्रतिभा है, पर अभी सीखने की गुंजाइश भी बहुत है। उन्होंने कहा, 'अधिकारी निस्संदेह बहुत प्रतिभाशाली हैं, लेकिन उन्हें अभी बहुत कुछ सीखना है। आईआईटी कानपुर उन्हें यह अवसर देता है।'
निसर्ग अधिकारी की यह नियुक्ति सिर्फ एक किशोर की उपलब्धि नहीं है, यह एक बड़े सवाल की तरफ ध्यान खींचती है। जब भारत के सर्वश्रेष्ठ तकनीकी संस्थान भी घरेलू प्रतिभाओं को वह मुआवजा नहीं दे पाते जो अमेरिकी बाजार देता है, तो असली प्रतिभा का ठहराव यहां कितना होगा? सीबीएसई की साइबर खामियों का सवाल भले ही बोर्ड की सफाई से बंद हो गया हो, लेकिन निसर्ग का 'सैलरी से असंतोष' भारत के टेक टैलेंट और पे-स्केल की खाई को नए सिरे से रेखांकित करता है।
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