
देश के टैक्स सिस्टम में एक अहम बदलाव आया है, जिससे नोएडा अथॉरिटी को इनकम टैक्स से छूट मिल गई है। ये छूट आयकर अधिनियम की धारा 10 (46A) के तहत दी गई है और इसके चलते नॉन-कमर्शियल कामों से होने वाली आमदनी पर अब टैक्स नहीं लगेगा। इससे आम जनता से लेकर कारोबारी तक, सभी को राहत मिल सकती है।
17 जुलाई को केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने एक नोटिफिकेशन जारी किया, जिसमें बताया गया कि नोएडा को धारा 10 (46A) के तहत टैक्स छूट दी जा रही है। ये छूट असेसमेंट ईयर 2024–25 से लागू होगी। इसका मतलब ये कि अब नोएडा अथॉरिटी को कुछ खास इनकम पर टैक्स नहीं देना होगा।
सरकारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, पब्लिक यूटिलिटी सर्विसेज जैसे किराया (rent), फीस (fees), और सरकारी ग्रांट (government grants) जैसी आमदनी पर अब इनकम टैक्स नहीं लगेगा। लेकिन अगर कोई कारोबार से जुड़ी या मुनाफा कमाने वाली गतिविधि हुई, तो उस पर टैक्स देना होगा।
सीबीडीटी यानी केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की ओर से जो अधिसूचना 17 जुलाई को जारी की गई है, उसमें साफ-साफ कहा गया है कि, "आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10 के खंड (46A) के उपखंड (बी) के तहत जो अधिकार केंद्र सरकार को दिए गए हैं, उनका इस्तेमाल करते हुए, सरकार 'न्यू ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण' यानी न्यू ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (NOIDA) को एक 'निर्धारिती' (assesee) के रूप में अधिसूचित कर रही है। ये प्राधिकरण उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम, 1976 के तहत बना है (जो 1976 का यूपी अधिनियम संख्या 6 है)।"
इसका मतलब ये है कि सरकार ने आधिकारिक तौर पर ये मान लिया है कि NOIDA प्राधिकरण को अब धारा 10 (46A) के तहत मिलने वाली टैक्स छूट दी जा सकती है, क्योंकि ये एक सरकारी उपयोग वाली संस्था है, न कि मुनाफा कमाने वाली।
इस छूट का असर सीधे नोएडा के रिहायशी इलाकों में दिख सकता है। अब सड़कें, नालियां, मकान और ट्रांसपोर्ट सिस्टम जैसे ढांचागत कार्यों में तेजी आ सकती है। सबसे अच्छी बात ये है कि इन सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए स्थानीय टैक्स बढ़ाने की जरूरत नहीं होगी।
कारोबारी वर्ग को इस बदलाव से काफी उम्मीदें हैं। टैक्स छूट के चलते अथॉरिटी के पास संसाधन और फोकस अब इंफ्रास्ट्रक्चर और तेज अप्रूवल्स पर होगा। इससे नए प्रोजेक्ट्स की मंजूरी में देरी कम होगी और औद्योगिक विकास की रफ्तार तेज हो सकती है।
CBDT ने ये छूट कुछ शर्तों के साथ दी है। नोएडा अथॉरिटी को अपनी टैक्स-फ्री और टैक्सेबल इनकम का अलग-अलग हिसाब रखना होगा। अगर रिकॉर्डिंग में पारदर्शिता नहीं रही, तो टैक्स छूट रद्द भी हो सकती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ जानकारी देने के लिए है। यह कोई कानूनी, टैक्स या पैसों से जुड़ी सलाह नहीं है। अगर आप टैक्स, विदेश में रहने, या अपने बिजनेस को नए तरीके से शुरू करने का सोच रहे हैं, तो किसी भरोसेमंद टैक्स एक्सपर्ट, वकील या फाइनेंशियल एडवाइजर से पहले सलाह जरूर लें। टैक्स के नियम बदलते रहते हैं और हर किसी की स्थिति अलग होती है।
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