लोकसभा में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच अक्सर तीखी बहसें होती हैं। इस बार मामला और गरम हो गया जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नियमों का हवाला देते हुए राहुल गांधी पर परोक्ष पलटवार किया। राहुल ने आरोप लगाया था कि उन्हें जानबूझकर बोलने से रोका जा रहा है।
राहुल गांधी का आरोप
इससे एक दिन पहले मंगलवार को राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि उन्हें सरकार के इशारे पर बोलने से रोका जा रहा है। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर ‘काला धब्बा’ करार दिया था। इस पत्र के बाद से ही सदन के अंदर और बाहर इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई थी।
वाणिज्य मंत्री के बयान के दौरान हंगामा
बुधवार को एक बार के स्थगन के बाद जब लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे शुरू हुई, तो अध्यक्ष ने भारत–अमेरिका व्यापार समझौते पर वक्तव्य के लिए वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को बुलाया। उनके बयान के दौरान विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए आसन के पास पहुंच गए और कुछ सदस्य सत्तापक्ष की अग्रिम पंक्तियों तक भी चले गए।
‘विरोध का तरीका और हो सकता है’
इस पर ओम बिरला ने विपक्ष को कड़ी नसीहत दी। उन्होंने विपक्षी सदस्यों से कहा, ''इस देश में अलग-अलग समय आप सरकार में रहे हैं। मेरा मत है कि इतने लंबे समय तक सरकार में रहने के बावजूद आप सदन की परंपराओं और मर्यादाओं को तोड़ रहे हैं। विरोध का तरीका और हो सकता है। लेकिन आप उस जगह (सत्तापक्ष की सीटों की तरफ) जाकर मर्यादाओं को तोड़ेंगे तो लोकतंत्र के प्रति लोगों को विश्वास कम होगा।''
बिना नाम लिए राहुल पर सवाल
बिरला ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा, ''आप चुने हुए प्रतिनिधि हैं। सदन के अंदर और बाहर विरोध का तरीका होता है। आप इतने वरिष्ठ नेता हैं, आपने लंबे समय तक शासन किया है। बोलने की अनुमति देना या नहीं देना नियम प्रक्रिया से निर्धारित होता है। क्या आप मर्यादा तोड़ेंगे? आपके सदस्य इधर से उधर जाएंगे, क्या यह उचित है?''
नारेबाजी नहीं, तर्क से होता है विरोध
उनका कहना था, ''पहले भी विरोध हुआ है, लेकिन मर्यादा किसी ने नहीं तोड़ी। आप मर्यादाएं तोड़ रहे हैं। यह उचित नहीं है।'' लोकसभा अध्यक्ष ने साफ कहा कि नारेबाजी या बैनर दिखाने से विरोध प्रभावी नहीं होता। असली विरोध तर्क, बहस और सदन के नियमों के भीतर रहकर ही किया जाना चाहिए। यही संसदीय लोकतंत्र की ताकत है।
चीन का मुद्दा और जारी गतिरोध
इस बीच, राहुल गांधी ने सोमवार और मंगलवार को पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण पर आधारित लेख का हवाला देकर चीन से जुड़ा मुद्दा उठाने की कोशिश की थी। हालांकि, आसन से इसकी अनुमति नहीं मिली। बाद में राहुल ने लेख को सत्यापित कर सदन के पटल पर रखा, लेकिन इस और अन्य मुद्दों को लेकर गतिरोध बना हुआ है।