Mobile addiction: ऑनलाइन गेमिंग से ‘वर्चुअल ऑटिज्म’ का खतरा, विशेषज्ञ ने दी गंभीर चेतावनी

Mobile addiction: बच्चों में बढ़ती ऑनलाइन गेमिंग और स्क्रीन टाइम की लत अब मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रही है। प्रयागराज के एक मामले ने ‘वर्चुअल ऑटिज्म’ को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञ समय रहते स्क्रीन कंट्रोल और संवाद बढ़ाने की सलाह दे रहे हैं।

Priya Shandilya( विद इनपुट्स फ्रॉम वार्ता)
अपडेटेड7 Feb 2026, 04:03 PM IST
ऑनलाइन गेमिंग की लत से 'वर्चुअल ऑटिज्म' का खतरा (सांकेतिक तस्वीर)
ऑनलाइन गेमिंग की लत से 'वर्चुअल ऑटिज्म' का खतरा (सांकेतिक तस्वीर)(istock)

Mobile addiction: मोबाइल गेमिंग और अत्यधिक स्क्रीन टाइम बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल रहे हैं। हाल ही में नोएडा में तीन सगी बहनों की आत्महत्या की घटना के बाद इस विषय पर चिंता और गहरा गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन गेमिंग की लत बच्चों को अवसाद और आत्मघाती प्रवृत्तियों की ओर भी धकेल सकती है।

छह साल के बच्चे में दिखे ‘वर्चुअल ऑटिज्म’ जैसे लक्षण

इसी क्रम में संगम नगरी प्रयागराज में भी एक मामला सामने आया है। हालांकि यहां बच्चा सुरक्षित है, लेकिन वह ऑनलाइन गेमिंग का आदी हो चुका है। परिजन उसे उपचार के लिए मोतीलाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय (काल्विन) के मनोरोग विभाग लेकर पहुंचे हैं।

कोरियन शब्द बोलने लगा बच्चा

परिजन बताते हैं कि माता-पिता के नौकरीपेशा होने के कारण बच्चा दिनभर दादा-दादी के साथ रहता था। उसे मोबाइल दे दिया जाता था, जिस पर वह ऑनलाइन कोरियन गेम और ड्रामा कार्टून देखता रहता था। धीरे-धीरे हालात ऐसे बने कि बच्चा बातचीत में कोरियन भाषा के शब्द इस्तेमाल करने लगा।

‘वर्चुअल ऑटिज्म’ की आशंका

मोतीलाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय (काल्विन) के मनोरोग विभाग में जांच के दौरान डॉ. राकेश पासवान ने बताया कि जिन शब्दों का बच्चा इस्तेमाल कर रहा था, वे वास्तव में कोरियन भाषा के थे। उनके मुताबिक बच्चे में ‘वर्चुअल ऑटिज्म’ जैसे लक्षण उभर रहे हैं। फिलहाल उसकी काउंसलिंग शुरू कर दी गई है।

दिमाग से लेकर शरीर तक असर

डॉ. पासवान के अनुसार अत्यधिक मोबाइल उपयोग से बच्चों में बोलने में देरी, एकाग्रता में कमी, चिड़चिड़ापन, आक्रामक व्यवहार और एंजाइटी की समस्या देखी जा रही है। स्क्रीन टाइम बढ़ने से आंखों पर दुष्प्रभाव, शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण मोटापा, हृदय संबंधी जोखिम तथा मांसपेशियों की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है। नींद पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ता है और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।

डॉक्टर की सलाह

विशेषज्ञ ने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों का स्क्रीन टाइम सीमित रखें, उनके साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताएं और संवाद बढ़ाएं। साथ ही माता-पिता स्वयं भी बच्चों के सामने मोबाइल का सीमित उपयोग करें। उन्होंने कहा कि 'वर्चुअल ऑटिज्म' जैसी समस्या को स्क्रीन टाइम कम कर तथा सामाजिक सहभागिता बढ़ाकर नियंत्रित किया जा सकता है।

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