ऑपरेशन सिंदूर ने भारत को बनाया एशिया की प्रमुख शक्ति, ऑस्ट्रेलिया की लोवी इंस्टिट्यूट ने बताया दुनिया की तीसरी महाशक्ति

पाकिस्तन के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर ने भारत को सुपर पावर की कतार में खड़ा कर दिया है। ऑस्ट्रेलिया की लोवी इंस्टिट्यूट ने दुनिया की 27 प्रमुख महाशक्तियों में भारत को तीसरा स्थान दिया है। लोवी की एशिया पावर इंडेक्स 2025 में भारत को प्रमुख शक्ति का दर्जा दिया गया है।

Rajkumar Singh
अपडेटेड1 Dec 2025, 05:13 PM IST
भारत एशिया की महाशक्ति
भारत एशिया की महाशक्ति(Social Media )

लोवी इंस्टिट्यूट के एशिया पावर इंडेक्स 2025 के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर और अन्य कारकों ने भारत को एशिया में एक प्रमुख शक्ति का दर्जा दिलाया है। ऑस्ट्रेलियाई संस्थान की तरफ से ये इंडेक्स शुरू किए जाने के बाद पहली बार भारत का व्यापक शक्ति स्कोर 40 अंक की सीमा को पार कर गया है। जिसे लोवी इंस्टिट्यूट प्रमुख शक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए एक बेंचमार्क मानता है। लोवी इंस्टिट्यूट के मुताबिक भारत एशिया की एकमात्र प्रमुख शक्ति है।

इंडेक्स में भारत की स्थिति

लोवी इंस्टिट्यूट ने दुनिया के 27 शक्तिशाली देशों में भारत को तीसरा स्थान दिया है। भारत ने कुल 100 में से 40.0 स्कोर हासिल किया है, साल 2025 में ओवरऑल स्कोर में भारत को 0.9 अंक यानी दो प्रतिशत का फायदा हुआ है। अन्य शक्तियों में अमेरिका 80.5 स्कोर के साथ पहले और चीन 73.7 स्कोर के साथ दूसरे नंबर पर है। इसके अलावा जापान को 38 और रूस को 32.1 अंक मिले हैं। इसके अलावा इस लिस्ट में पाकिस्तान 14.5 अंक के साथ 16वें पायदान पर है।

यह भी पढ़ें | दुनिया में छाई सुस्ती के बीच भारतीय इकोनॉमी की छलांग, अब नजर 5 ट्रिलियन डॉलर पर

महाशक्ति के रूप में भारत का उदय

अमेरिका एशिया में घटते प्रभाव से जूझ रहा है और चीन एक असाधारण प्रतिस्पर्धी के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। ऐसे में दो महाशक्तियों के बीच भारत का एकमात्र प्रमुख शक्ति के रूप में उभरना एशियाई रणनीतिक परिदृश्य में सत्ता परिवर्तन की शुरुआत का संकेत देता है। भारत की 2025 की चढ़ाई राष्ट्रीय शक्ति के कई आयामों में स्थिर सुधार का परिणाम है। 40.0 अंक हासिल करके और 27 देशों में से तीसरे स्थान पर रहकर भारत ने 2024 में जापान पर बनाई बढ़त को और मजबूत किया है।

भारत और चीन के बीच बड़ा अंतर

भारत पूरी दुनिया में आर्थिक से लेकर सामरिक शक्ति के रूप में पूरी दुनिया में तेजी से उभर रहा है। लेकिन प्रमुख प्रतिद्वंद्वी देश चीन और भारत के बीच लोवी इंस्टिट्यूट के स्कोर के लिहाज से काफी अंतर बना हुआ है। इसके बावजूद इस साल के स्कोर बताता हैं कि भारत एशिया में शक्ति संतुलन को प्रभावित करने के लिए आवश्यक आर्थिक और सैन्य क्षमता का लगातार विस्तार कर रहा है।

तेजी से मजबूत हो रहा भारत

लोवी इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट बताता ही है कि भारत की बेहतर स्थिति की वजह उसके मजबूत आर्थिक प्रदर्शन का प्रभाव है। भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत होती जा रही है और इस बढ़ोतरी ने कनेक्टिविटी, तकनीकी योगदान और बाहरी प्रभाव के माध्यम से अधिक भू-राजनीतिक प्रासंगिकता में तब्दील किया है। वैश्विक निवेशकों के लिए भारत का आकर्षण अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर पहुंच गया है। रिपोर्ट बताती है कि पहली बार भारत ने अपने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते निवेश की बदौलत चीन को पछाड़कर दूसरा स्थान हासिल किया है।

यह भी पढ़ें | नए लेबर कानून में कर्मचारी के इस्तीफे के दो दिन में फुल एंड फाइनल सेटलमेंट जरूरी

ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाई भारत की ताकत

लोवी की रिपोर्ट बताती है कि भारत की सैन्य क्षमता काफी आगे बढ़ी है और मई 2025 में शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर ने इस धारणा के बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रिपोर्ट बताती है कि इस ऑपरेशन में भारत के प्रदर्शन ने विशेषज्ञ मूल्यांकन को प्रभावित किया। इससे देश की रक्षा क्षमता में दमदार हालिया युद्ध अनुभव जुड़ गया। भारत की सैन्य क्षमता में +2.8 अंकों की बढ़ोतरी इसी नए आत्मविश्वास को दर्शाती है।

कुछ मोर्चों पर सुधार की जरूरत

लोवी इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट बताती है कि भारत का उदय कमजोर प्रभाव नेटवर्क की वजह से बाधित हो रहा है। रक्षा नेटवर्क स्कोर में गिरावट आई है और राजनयिक प्रभाव में मामूली सुधार के बावजूद ये देश की बढ़ती संसाधन शक्ति के साथ तालमेल नहीं बिठा पाया है। भारत सांस्कृतिक रूप से, बढ़ते रोड और रेल नेटवर्क की वजह से काफी सुधार कर रहा है। सीधी उड़ान कनेक्टिविटी, पर्यटन और शिक्षा के केंद्र के रूप में बढ़ती अपील के कारण भारत ने +2.8 अंक की बढ़ोतरी दर्ज किया है।

कमजोर मांग के बावजूद चीन मजबूत

लोवी की रिपोर्ट बताती है कि चीन 73.7 के स्कोर के साथ दूसरे स्थान पर है और वो अमेरिका के बाद एशिया की प्रमुख महाशक्ति के रूप में अपनी भूमिका को मजबूत करना जारी रखे हुए है। चीन ने राजनयिक रूप से पूरी दुनिया में अब तक का सबसे अधिक प्रभावशाली स्कोर हासिल किया है। हालांकि इसकी खरीद शक्ति में गिरावट आई है, जिसके आगे भी जारी रहने की संभावना है।

यह भी पढ़ें | नए लेबर कानून में कर्मचारी के इस्तीफे के दो दिन में फुल एंड फाइनल सेटलमेंट जरूरी

प्रभाव घटा फिर भी अमेरिका नंबर-1

ऑस्ट्रेलियाई संस्था लोवी इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2025 की रिपोर्ट में अमेरिका के प्रभाव में अप्रत्याशित रूप से गिरावट देखने को मिली है। रिपोर्ट साफ तौर पर बताती है कि ट्रम्प प्रशासन की नीतियां एशिया में अमेरिकी शक्ति के लिए एक नकारात्मक प्रभाव डाल रही रही हैं। यही वजह है कि दुनिया के किसी भी देश के मुकाबले इस साल अमेरिका के प्रभाव में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है। राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर अमेरिका विदेशी नीति के प्रभाव के पैमाने पर गिरकर 8वें स्थान पर पहुंच गया है। विदेश नीति के मामले में अमेरिका वियतनाम जैसे देशों से भी पिछड़ गया है, इसके बावजूद वो 80.5 अंक के साथ पहले पायदान पर बना हुआ है।

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

बिजनेस न्यूज़न्यूज़ऑपरेशन सिंदूर ने भारत को बनाया एशिया की प्रमुख शक्ति, ऑस्ट्रेलिया की लोवी इंस्टिट्यूट ने बताया दुनिया की तीसरी महाशक्ति
More
बिजनेस न्यूज़न्यूज़ऑपरेशन सिंदूर ने भारत को बनाया एशिया की प्रमुख शक्ति, ऑस्ट्रेलिया की लोवी इंस्टिट्यूट ने बताया दुनिया की तीसरी महाशक्ति