लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकता है विपक्ष, जानिए क्या है प्रक्रिया

Lok Sabha Speaker: संसद के बजट सत्र में लगातार हंगामा जारी है। सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ता ही जा रहा है। इसबीच कहा जा रहा है कि विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए एक प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहा है।

Jitendra Singh
अपडेटेड9 Feb 2026, 03:43 PM IST
Lok Sabha Speaker: संविधान का अनुच्छेद 94 लोकसभा स्पीकर को हटाने की व्यवस्था देता है।
Lok Sabha Speaker: संविधान का अनुच्छेद 94 लोकसभा स्पीकर को हटाने की व्यवस्था देता है।

Lok Sabha Speaker: कांग्रेस की अगुवाई में विपक्ष लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि लोकसभा स्पीकर विपक्ष के नेता को बोलने का मौका नहीं देते हैं। दूसरे जिस तरह उन्होंने कथित तौर पर प्रधानमंत्री पर संसद में विपक्षी सदस्यों द्वारा हमले की आशंका जाहिर की, उससे भी विपक्ष नाराज है। ऐसे में सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए एक प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहा है।

सूत्रों ने बताया कि सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने की इजाजत नहीं देने के लिए संविधान के अनुच्छेद 94-सी के तहत यह प्रस्ताव लाया जा सकता है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे की सदन में की गई टिप्पणियों के खिलाफ उन पर कार्रवाई शुरू नहीं करने और कांग्रेस की महिला सांसदों पर बिना साक्ष्यों के आरोप लगाने के मामले में भी अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव के लिए नोटिस देने पर विचार किया जा रहा है। सूत्रों ने कहा कि इस संबंध में जल्द ही लोकसभा में एक वैधानिक प्रस्ताव लाया जा सकता है।

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जानिए स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया

लोकसभा स्पीकर यानी अध्यक्ष को उनके पद से हटाने की प्रक्रिया भारतीय संविधान में स्पष्ट रूप से तय की गई है। संविधान के अनुच्छेद 94 के अनुसार, लोकसभा स्पीकर को केवल लोकसभा में पारित एक विशेष प्रस्ताव के माध्यम से ही हटाया जा सकता है। यह प्रक्रिया सामान्य नहीं होती और इसके लिए निश्चित शर्तों और समय-सीमा का पालन करना जरूरी होता है।

स्पीकर को हटाने के लिए सबसे पहले लोकसभा में एक प्रस्ताव लाया जाता है, जिसकी लिखित सूचना कम से कम 14 दिन पहले देनी होती है। इस प्रस्ताव पर विचार तभी किया जा सकता है, जब लोकसभा के कम से कम 50 सदस्य उसका समर्थन करें। बिना इस न्यूनतम समर्थन के प्रस्ताव को सदन में स्वीकार नहीं किया जाता है।

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जब यह प्रस्ताव लोकसभा में पेश किया जाता है तो उसे पारित करने के लिए साधारण बहुमत पर्याप्त नहीं होता। इसे लोकसभा के सभी सदस्यों के प्रभावी बहुमत से पारित करना जरूरी होता है। प्रभावी बहुमत का अर्थ है. रिक्त सीटों को छोड़कर सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत। यानी प्रस्ताव तभी पास होगा जब आधे से अधिक वर्तमान सदस्य इसके पक्ष में मतदान करें।

जिस समय स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव सदन में विचाराधीन होता है, उस दौरान वे लोकसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर सकते। हालांकि, वे सदन की कार्यवाही में भाग ले सकते हैं, अपनी बात रख सकते हैं और यदि मतदान में बराबरी की स्थिति बनती है तो निर्णायक मत भी दे सकते हैं।

अनुच्छेद 94C लाने की तैयारी में विपक्ष

विपक्ष अनुच्छेद 94(c) के तहत प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। यह पूरी तरह एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जो सिर्फ लोकसभा स्पीकर को उनके पद से हटाने से जुड़ी होती है। संविधान के अनुच्छेद 94(c) में साफ लिखा है कि लोकसभा स्पीकर को उनके पद से हटाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए कुछ जरूरी नियमों का पालन करना होता है। सबसे पहले, स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव लाने से कम से कम 14 दिन पहले नोटिस देना जरूरी होता है। यह नोटिस लोकसभा के सभी सदस्यों को दिया जाता है, ताकि सभी को प्रस्ताव की जानकारी हो।

(न्यूज एजेंसी भाषा के साथ)

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