
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी अनवरुल हक ने अपने विधानसभा संबोधन में एक सनसनीखेज बयान दिया। हक ने दावा किया कि 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले मेट्रो स्टेशन के पास हुआ कार धमाका सीधे पाकिस्तान की ओर से किया गया 'जवाबी वार' था। उनका कहना था, 'अगर आप बलूचिस्तान में खून बहाएंगे तो हम लाल किले से कश्मीर के जंगलों तक आपको जवाब देंगे… और अल्लाह के करम से हमने कर दिया।' इस बयान पर पाकिस्तान सरकार ने आधिकारिक प्रतिक्रिया तो नहीं दी, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के भीतर हलचल तेज है।
इसी बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि भारत के साथ 'ऑल-आउट वॉर' की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि देश 'फुल अलर्ट' पर है और हर मोर्चे से आने वाले खतरे के लिए तैयार रहना होगा। यह चेतावनी भारत के सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी की हालिया टिप्पणी के बाद आई, जिसमें उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को '88 घंटे का ट्रेलर' बताते हुए कहा कि भारत किसी भी उकसावे का उचित उत्तर देने में सक्षम है।
भारतीय जांच एजेंसियों ने लाल किला आतंकी हमले के तार जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े बताए हैं। यह हमला हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की एक गुप्त आतंकी सेल ने अंजाम दिया, जिसका नेतृत्व शोपियां का मौलवी इरफान अहमद कर रहा था। इसी समूह का डॉक्टर उमर मोहम्मद आत्मघाती हमलावर बन गया, जबकि पाकिस्तान में बैठे आतंकी संचालक उमर-बिन-खत्ताब उर्फ हंजुल्लाह से भी संपर्क के सबूत मिले हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में जैश ने SadaPay ऐप जैसे डिजिटल माध्यमों से फिदायीन हमलों के लिए चंदा जुटाया।
खुफिया सूत्रों ने संकेत दिया है कि पाकिस्तानी आतंकी संगटन जैश-ए-मोहम्मद, महिलाओं को शामिल कर नए प्रकार के हमले की योजना बना सकता है। जैश प्रमुख मसूद अजहर की बहन सादिया इस महिला विंग का संचालन करती है। लाल किला केस की एक प्रमुख संदिग्ध डॉ. शाहिना सईद इसी महिला इकाई से जुड़ी बताई जा रही हैं। माना जाता है कि 'मैडम सर्जन' के कोडनैम वाली डॉक्टर शाहिना ने फंडिंग और ऑपरेशन की रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
नवंबर की शुरुआत में भारतीय एजेंसियों को मिले इनपुट्स ने चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा, दोनों जम्मू-कश्मीर में समन्वित सीरियल ब्लास्ट की तैयारी में हैं। दोनों संगठनों को पाकिस्तानी सेना और 'डीप स्टेट' का समर्थन प्राप्त माना जाता है। पिछले छह महीनों में दोनों समूह भारत में घातक हमलों को अंजाम दे चुके हैं।
पाकिस्तान–अफगानिस्तान सीमा पर हाल के महीनों में तनाव लगातार बढ़ा है। अक्टूबर में दोनों देशों की सेनाओं के बीच भीषण झड़पें हुईं, जिसके बाद तुर्किये और कतर की मध्यस्थता से अस्थायी युद्धविराम लागू किया गया। इस संघर्ष के बीच पाकिस्तान ने दावा किया कि भारत, अफगानिस्तान से होने वाले हमलों में भूमिका निभा रहा है। आसिफ ने कहा, 'काबुल, दिल्ली के लिए प्रॉक्सी वॉर लड़ रहा है।' हालांकि तालिबान ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।
लाल किले धमाके के दावों, पाकिस्तान के युद्ध-संदर्भित बयानों, अफगान सीमा की हिंसा और जैश-लश्कर की गतिविधियों से बना मिलाजुला चित्र बेहद भयावह है। दक्षिण एशिया एक बार फिर उस मोड़ पर खड़ा दिखाई देता है जहां छोटे घटनाक्रम भी बड़े भू-राजनीतिक संकट में बदल सकते हैं। भारत और पाकिस्तान दोनों के सख्त स्वर तथा हालिया आतंकी घटनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा को नए खतरे के मुहाने पर पहुंचा दिया है।
Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.