
सागिर्दों ने करीब एक वर्ष पहले सुराग दिया था, लेकिन वह शातिर अब जाकर पुलिस के हाथ लगा है। बिहार पुलिस ने जाली नोट के सरगना अबुल इनाम उर्फ लादेन को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल कर ली है। इनाम पाकिस्तान में छपे जाली भारतीय नोट को भारत में ही खपाने वाले गिरोह का सरगना है। बिहार के मधुबनी नगर थाना क्षेत्र के कोतवाली चौक निवासी अबुल इनाम उर्फ लादेन को बासोपट्टी पुलिस ने सोमवार की रात गिरफ्तार किया।
अबुल इनाम पाकिस्तान में छपे जाली नोटों को नेपाल के रास्ते भारत में पहुंचाने और बाजार में खपत करने वाले गिरोह का लीडर था। सूत्रों ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों और वरिष्ठ पुलिस पदाधिकारियों ने सरगना अबुल इनाम से पूछताछ की। पुलिस पाकिस्तानी नागरिक अंसारी उर्फ मुहम्मद मस्तान की तलाश में जुटी है।
पाकिस्तान दुश्मनी साधने के लिए न केवल आतंकवाद और सांप्रदायिकता फैलाने के जरिए सामाजिक विभेद पैदा करने बल्कि नकली मुद्रा के जरिए भारतीय अर्थव्यवस्था को भी चोट पहुंचाने की कोशिशें भी करता रहता है। पाकिस्तान अपने यहां जाली भारतीय नोट छापता है और उसकी खेप दुबई, बैंकॉक, श्रीलंका और नेपाल के रास्तों से भारत भेजने की जुगत में रहता है। हालांकि, 8 अगस्त, 2016 को भारत में हुई नोटबंदी ने पाकिस्तान के जाली नोटों के कारोबार को बड़ा झटका दिया।
उत्तर प्रदेश के रिटायर्ड IPS अधिकारी राजेश पाण्डेय बताते हैं कि कैसे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने अपने एजेंट जावेद केनानी को इंडियन फेक करेंसी छापने और उसे भारत भेजने का ठेका दे रखा था। पाण्डेय कहते हैं कि केनानी को आईएसआई ने सारी सुविधाएं दी थीं। वो बताते हैं कि एनएआई की जांच में पता चला कि क्वेटा में पाकिस्तान सरकार के टकसाल में ही भारत के जाली नोट भी छापे जाते थे।
आजतक रेडियो यूट्यूब चैनल के एक पॉडकास्ट में राजेश पाण्डेय ने भारत के जाली नोटों के पीछे पाकिस्तानी साजिश की पूरी कहानी बयां की है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2009 या 2010 में 1,400 करोड़ रुपये के जाली नोट भारत आए थे। जांच होने लगी तो सूचना मिली कि उत्तर प्रदेश के संतकबीर नगर स्थित भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की शाखा में कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से नेपाल से जाली नोटों को बैंक में जमा की जा रही है। छापेमारी में बैंक से चार-पांच करोड़ रुपये के करीब जाली नोट बरामद हुए।
पूछताछ में पता चला कि जाली नोटों की खेप नेपाल से आ रही है। राजेश पाण्डेय बताते हैं कि नेपाल में यूनुस अंसारी और मियां अंसारी जाली नोटों के कारोबार में ही जेल में गए। यूनुस अंसारी नेपाल की सरकार में मंत्री थे। कई सालों के बाद वो जेल से निकले हैं। उन्होंने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के हाथों में खेलकर सरकारी रुतबे का दुरुपयोग किया। काठमांडू एयरपोर्ट पर डिप्लोमैटिक बैग में कई करोड़ रुपये के जाली नोट पकड़े गए।
जब भारतीय एजेंसियों की नेपाल पर नजर गई तो आईएसआई ने बांग्लादेश का रास्ता अख्तियार कर लिया। पता चला कि बांग्लादेश से मालदा के रास्ते जाली नोट भारत आते हैं और ट्रेन के जरिए देशभर में पहुंचाए जाते हैं। 2010-11 के बाद तय हुआ कि जाली नोटों के पकड़े जाने के मामलों की सीबीआई ही जांच करेगी। सीबीआई को खबर मिली कि पेपर, सिक्यॉरिटी थ्रेड, प्रिंटिंग कलर आदि जिस इंटरनैशनल एजेंसी से हमारे पास आते हैं, वही एजेंसी पाकिस्तान को भी ये सामान भेजती है। ये डीला-रू करके एक ब्रिटिश कंपनी है जिससे भारत ये सामान खरीदता है।
राजेश पाण्डेय कहते हैं, 'वर्ष 2009 से 2013 के बीच 70-80 लाख रुपये मूल्य के जाली नोट हमने पकड़े थे।' फिर एनआईए ने जाली नोटों की जांच का जिम्मा अपने हाथ में ले लिया। वो कहते हैं कि धुरंधर फिल्म में पाकिस्तान में जाली नोटों के बारे में जो बातें कही गई हैं, वो सही हैं। आईएसआई ने नेपाल, बांग्लादेश, थाईलैंड समेत कई अन्य रास्तों से भारत में जाली नोट भिजवाए।
बहरहाल, बिहार में जयनगर जिले के एसपी राघव दयाल ने बताया कि पाकिस्तान में छपी नकली भारतीय करेंसी की बरामदगी मामले में अबुल इनाम की गिरफ्तारी हुई है। पुलिस अधीक्षक योगेन्द्र कुमार ने बताया कि अबुल इनाम की गिरफ्तारी से कई अहम सुराग मिले हैं, जिसपर पुलिस काम कर रही है। पिछले वर्ष 2025 के मार्च महीने में 13,800 रुपए नकली भारतीय करेंसी के साथ गिरफ्तार रशीद जमाल, हाजी मोहम्मद ओवैस एवं ताहिर ने अबुल इनाम का नाम लिया था। जमाल, ओवैस और ताहिर के पास से जाली भारतीय मुद्रा के साथ अन्य संदिग्ध सामान और दस्तावेज मिले थे। सवाल है कि क्या आईएसआई आज भी जाली नोटों के कारोबार में सक्रिय है और उसे इस मकसद में सफलता भी मिल रही है?
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