Palani Land Deal: तमिलनाडु में पलानी लैंड डील विवाद ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। मामला पलानी के मशहूर अरुलमिगु दंडायुधपाणि स्वामी मंदिर (Arulmigu Dhandayudapani Swamy Temple) की लगभग 1.4 एकड़ जमीन से जुड़ा है। इस जमीन की अनुमानित कीमत करीब ₹100 करोड़ बताई जा रही है। आरोप है कि यह जमीन कथित रूप से दो निजी व्यक्तियों के नाम पर रजिस्ट्री कर दी गई, जबकि जमीन मठ की संपत्ति थी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, मठ की इस बहुमूल्य जमीन की रजिस्ट्री को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए। आरोप है कि जमीन के मालिकाना हक और दस्तावेजों से जुड़े नियमों का पालन किए बिना रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी कर दी गई। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
अधिकारियों पर गिरी गाज
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के रजिस्ट्री विभाग ने संबंधित सब-रजिस्ट्रार को निलंबित कर दिया। बाद में जिला रजिस्ट्रार के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। तमिलनाडु सरकार ने विभागीय जांच के आदेश दिए और पूरे मामले की जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू की।
CB-CID को सौंपी गई जांच
विवाद बढ़ने के बाद तमिलनाडु पुलिस ने मामले की जांच CB-CID को सौंप दी। राज्य सरकार का कहना है कि जमीन की रजिस्ट्री में किसी भी तरह की गड़बड़ी या फर्जीवाड़े की पूरी जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
मद्रास हाईकोर्ट ने क्या कहा?
मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने इस जमीन की रजिस्ट्री को शून्य (Null and Void) घोषित कर दिया। अदालत ने माना कि विवादित रजिस्ट्रेशन को वैध नहीं माना जा सकता। इस फैसले के बाद जमीन का नियंत्रण फिर से मठ के पास रहने का रास्ता साफ हो गया।
सरकार ने बनाई जांच समिति
तमिलनाडु सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति भी गठित की है। समिति यह पता लगाएगी कि इतनी बड़ी संपत्ति की रजिस्ट्री किन परिस्थितियों में हुई और क्या सरकारी प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया गया था।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
यह विवाद सिर्फ एक जमीन के स्वामित्व का मामला नहीं है। लोगों का मानना है कि यह मामला मंदिरों और धार्मिक संस्थाओं की संपत्तियों की सुरक्षा, भूमि पंजीकरण प्रणाली की पारदर्शिता और सरकारी निगरानी व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े करता है।