Power Demand: भारत में बिजली की खपत तेजी से बढ़ रही है। गर्मी के समय इसकी डिमांड और ज्यादा बढ़ जाती है। इन दिनों कूलर, पंखा, एसी फ्रिज जैसे तमाम बिजली के उपकरण चालू रहते हैं। इधर सरकार भी बिजली की मांग को पूरा करने के लिए अपना मेगा प्लान तैयार कर रही है। बिजली मंत्रालय ने लोकसभा में दिए एक जवाब में बताया कि वित्त वर्ष (FY) 2029-30 में भारत की बिजली की अधिकतम मांग 345 गीगावाट (GW) और FY 2031-32 में 388 GW तक पहुंचने की उम्मीद है।
बिजली मंत्रालय में राज्य मंत्री श्रीपद नाइक ने बिजली की मांग को पूरा करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की भी जानकारी दी, जिसमें "हाल ही के गर्मी के मौसम में दर्ज की गई बिजली की अधिकतम मांग के स्तर" को ध्यान में रखा गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में बिजली की मांग अब तक के अपने सबसे ऊंचे स्तर 250 GW पर पहुंच गई है। सरकार ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया है, जिसके तहत अगले कुछ वर्षों में बिजली उत्पादन और ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा।
बढ़ती बिजली की मांग पर सरकार ने क्या किया
सरकार के बयान में कई ऐसे उपायों का ज़िक्र किया गया है, जो वह भविष्य में बिजली की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कर रही है। सरकार ने कहा कि राष्ट्रीय बिजली योजना (NEP) के अनुसार, 2031-32 तक बिजली उत्पादन की स्थापित क्षमता 874 GW होने की संभावना है।
तापीय ऊर्जा (Thermal) पर बड़ा दांव
बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार ने कोयला और लिग्नाइट आधारित बिजली उत्पादन बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है।
ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार
बिजली उत्पादन के साथ-साथ उसे घर-घर पहुंचाने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। राष्ट्रीय विद्युत योजना के तहत 2022-23 से 2031-32 के बीच लगभग 1,91,474 ckm ट्रांसमिशन लाइनें और 1,274 GVA ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता जोड़ने का लक्ष्य है।
ग्रीन एनर्जी पर बढ़ा सरकार का फोकस
सरकार केवल कोयले पर निर्भर नहीं है, बल्कि सौर, पवन और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी युद्धस्तर पर काम चल रहा है:
नवीकरणीय ऊर्जा (RE)
वर्तमान में 1.54 लाख मेगावाट से अधिक की रिन्यूएबल क्षमता निर्माणाधीन है, जिसमें सोलर, विंड और हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स शामिल हैं।
परमाणु ऊर्जा
6,600 MW क्षमता निर्माणाधीन है और 7,000 MW की अतिरिक्त योजना बनाई जा रही है ।
स्टोरेज सिस्टम
ग्रिड को स्थिरता देने के लिए 13,120 MW के पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट्स (PSP) और करीब 10,658 MW के बैटरी स्टोरेज सिस्टम (BESS) पर काम चल रहा है ।