अकेले कैसे रहती हो? साड़ी खींचा, पेट पर हाथ रखा… TCS नासिक की घटना खून खौला देगी

TCS के नासिक ब्रांच में मुस्लिम एंप्लॉयीज कैसे हिंदू महिला कर्मियों का यौन शोषण किया करते थे और कैसे हिंदू धर्म के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां किया करते थे, ये रूह कंपा देने वाली बातें अब सामने आने लगी हैं। आठ मुस्लिम आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद महिला ने अपनी खौफनाक आपबीती बताई है।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड20 Apr 2026, 06:57 PM IST
TCS के मुस्लिम कर्मचारियों की करतूतें खून खौला देंगी।
TCS के मुस्लिम कर्मचारियों की करतूतें खून खौला देंगी।

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की नासिक यूनिट में एक महिला इंजीनियर के साथ जो हुआ, वह किसी भी कामकाजी महिला के लिए डरावना सपना हो सकता है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि ट्रेनिंग से लेकर गुड़ी पाड़वा के त्योहार तक, उसे लगातार मानसिक, शारीरिक और धार्मिक तौर पर प्रताड़ित किया गया।

यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी में 'कार्यस्थल सुरक्षा' और 'धार्मिक स्वतंत्रता' पर गंभीर सवाल उठाता है। इस लेख में पीड़िता के पुलिस बयान और कंपनी के आधिकारिक रुख को शामिल किया गया है, ताकि आप कार्यस्थल पर होने वाले शोषण के जमीनी हकीकत और कानूनी प्रक्रियाओं को समझ सकें।

ट्रेनिंग के दौरान शुरू हुआ शोषण

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसने जून 2025 में नासिक टीसीएस में 'एसोसिएट' के तौर पर काम शुरू किया था। उसकी तीन महीने की ट्रेनिंग के दौरान ही उत्पीड़न शुरू हो गया। टीम लीड रजा मेनन और शाहरुख कुरैशी उस पर निजी सवाल करते थे। पीड़िता के मुताबिक, उसके पति पुणे में रहते हैं, जिसे लेकर आरोपी भद्दे कमेंट करते थे कि 'नवनविवाहित होकर भी अकेले कैसे रहती हो?'

धर्म पर टिप्पणी और 'प्लेयर' निकनेम

आरोप है कि रजा मेनन ने पीड़िता का नाम 'प्लेयर' रख दिया था और वह उसे इसी नाम से बुलाता था। पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा है कि आरोपियों ने हिंदू देवी-देवताओं पर अपमानजनक टिप्पणी की। जब महिलाओं के खिलाफ हिंसा की बात आई, तो आरोपियों ने इसे 'बुर्का न पहनने का परिणाम' बताकर सही ठहराने की कोशिश की।

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गुड़ी पाड़वा पर छेड़छाड़ और शारीरिक उत्पीड़न

पीड़िता ने एक खौफनाक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि मार्च में गुड़ी पाड़वा के दिन वह साड़ी पहनकर ऑफिस आई थी। आरोप है कि रजा ने ऑफिस की पैंट्री के पास उसका पल्लू खींचा और विरोध करने पर भद्दी मुस्कान दी। इसके अलावा, एक अन्य कर्मचारी आसिफ अंसारी पर आरोप है कि वह जानबूझकर पीड़िता के करीब बैठता था और उसे अनुचित तरीके से छूता था। पीड़िता के मुताबिक, आसिफ ने उसकी कमर और पेट को छूते हुए 'जीरो फिगर' जैसे कमेंट किए और एक बार गैलरी में उसे जबरन गले लगाने की कोशिश की।

एक आरोपी ने कहा कि बलात्कार इसलिए होते हैं, क्योंकि महिलाएं बुर्का नहीं पहनतीं। टीम लीडर ने औपचारिक प्रशिक्षण के बहाने मुझे गलत तरीके से छुआ और गुड़ी पाड़वा उत्सव के दौरान कार्यालय की पैंट्री में एक अन्य आरोपी ने मेरे साथ छेड़छाड़ की। आरोपियों ने सोशल मीडिया पर भी मेरा पीछा किया और परेशान किया। सोशल मीडिया प्लैटफॉर्मस पर आरोपियों को ब्लॉक करने के बावजूद मेरा पीछा करना बंद नहीं हुआ, जिसके कारण अंततः मुझे कानूनी मदद लेनी पड़ी।- टीसीएस की पूर्व महिला कर्मचारी

सोशल मीडिया पर पीछा और धमकी

उत्पीड़न केवल ऑफिस तक सीमित नहीं रहा। पीड़िता ने बताया कि आरोपियों ने उसे इंस्टाग्राम और लिंक्डइन पर भी परेशान किया। ब्लॉक करने के बावजूद वे अलग-अलग तरीकों से संपर्क करने की कोशिश करते थे। आसिफ ने कथित तौर पर पीड़िता से कहा कि 'शादीशुदा होने के बावजूद एक और बॉयफ्रेंड रखने में क्या बुराई है?' जब पीड़िता ने विरोध किया, तो उसे करियर में नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई।

समयघटना
जून 2025टीसीएस नासिक में जॉइनिंग और ट्रेनिंग की शुरुआत
जून-सितंबर 2025निजी जीवन पर कमेंट और 'प्लेयर' निकनेम दिया गया
मार्च 2026गुड़ी पाड़वा के दिन साड़ी का पल्लू खींचने की घटना
अप्रैल 2026पुलिस में शिकायत और 8 आरोपियों की गिरफ्तारी
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पुलिस कार्रवाई और कंपनी का पक्ष

नासिक पुलिस की विशेष जांच दल (SIT) ने अब तक एक महिला मैनेजर सहित आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। कुल नौ एफआईआर दर्ज की गई हैं। दूसरी ओर, टीसीएस ने इन आरोपों के बाद शामिल कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है। कंपनी का कहना है कि उन्हें पहले 'पॉश' (POSH) चैनल पर ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली थी, लेकिन अब वे बाहरी एजेंसियों की मदद से इसकी जांच करा रहे हैं। हालांकि, आरोपी रजा मेनन के परिवार ने इन आरोपों को ऑफिस की राजनीति और साजिश करार दिया है।

पॉश एक्ट क्या है?

POSH को औपचारिक रूप से 'कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013' कहा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य कार्यस्थल पर महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करना और यौन उत्पीड़न की शिकायतों के निवारण के लिए एक मजबूत तंत्र बनाना है। जिस भी संस्थान में 10 या उससे ज्यादा कर्मचारी हैं, वहां एक आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का होना अनिवार्य है। इस समिति की अध्यक्ष एक महिला होनी चाहिए।

पीड़ित महिला घटना के 3 महीने के भीतर आईसीसी को लिखित शिकायत दे सकती है। समिति को 90 दिनों के भीतर अपनी जांच पूरी करनी होती है। कंपनी को अपने कर्मचारियों को इस कानून के प्रति जागरूक करना और महिलाओं के लिए एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना अनिवार्य है।

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