₹30,000 करोड़ के प्रोजेक्ट्स पर PM मोदी सख्त, 'प्रगति' बैठक में देरी और डिजिटल अरेस्ट पर दिए निर्देश

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रगति की 53वीं बैठक में 9 राज्यों की ₹30,000 करोड़ से अधिक की 6 प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने प्रोजेक्ट्स में देरी रोकने, समग्र निगरानी और बेहतर तालमेल पर जोर दिया। 

Shivam Shukla( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
अपडेटेड26 Aug 2026, 07:01 AM IST
 <span class='webrupee'>₹</span>30,000 करोड़ के प्रोजेक्ट्स पर PM मोदी सख्त
₹30,000 करोड़ के प्रोजेक्ट्स पर PM मोदी सख्त

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 9 राज्यों में फैली 30,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली 6 प्रमुख इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की मंगलवार को समीक्षा की। उन्होंने कहा कि ऐसी परियोजनाओं में देरी न केवल लागत बढ़ाती है बल्कि लोगों, उद्योगों और अर्थव्यवस्था को समय पर मिलने वाले लाभों से भी वंचित कर देती है। प्रधानमंत्री ने यहां 'प्रगति' की 53वीं बैठक की अध्यक्षता की। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (IT) आधारित बहु-माध्यम मंच 'प्रगति' को केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों को एकीकृत कर सक्रिय शासन और समयबद्ध क्रियान्वयन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है।

साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट मामलों की भी समीक्षा

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने साइबर धोखाधड़ी और 'डिजिटल अरेस्ट' के मामलों की भी समीक्षा की और कहा कि प्रशिक्षण, जागरूकता और शिक्षा पर लगातार ध्यान देकर ऐसे अपराधों की रोकथाम के प्रयासों को और मजबूत किया जाना चाहिए। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, मोदी ने विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, युवाओं और अन्य संवेदनशील वर्गों को धोखाधड़ी के आम तौर-तरीकों, खतरे के संकेतों और डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल के बारे में जानकारी देने के लिए निरंतर और लक्षित जन-जागरूकता अभियान चलाए जाने पर जोर दिया।उन्होंने संबंधित कर्मियों के नियमित क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर भी बल दिया ताकि साइबर धोखाधड़ी के नए तौर-तरीकों की जल्द पहचान कर समय पर कार्रवाई की जा सके।

सड़क, रेल और बिजली परियोजनाओं की समीक्षा की गई

प्रधानमंत्री ने बाद में सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा, ''नौ राज्यों में रेलवे, सड़क और बिजली क्षेत्रों से जुड़ी 30,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की आज की 'प्रगति' बैठक में समीक्षा की गई। हमारा ध्यान बेहतर संपर्क, तेज विकास, बेहतर सार्वजनिक सेवाओं और कम देरी पर है।'' बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने रेलवे, सड़क और बिजली क्षेत्रों की छह प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं की समीक्षा की, जिनकी कुल लागत 30,000 करोड़ रुपये से अधिक है।

एजेंसियों के बीच तालमेल

क्षेत्रीय संपर्क मजबूत करने, औद्योगिक एवं आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण इन परियोजनाओं की समीक्षा समयसीमा, विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल, लंबित मुद्दों के समाधान और इनके समय पर पूरा होने पर विशेष ध्यान देते हुए की गई।

परियोजनाओं को समग्र रूप में देखने और निगरानी की सलाह

बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री ने कहा कि अवसंरचना परियोजनाओं में देरी न केवल लागत बढ़ाती है, बल्कि इससे नागरिकों, उद्योगों और अर्थव्यवस्था को मिलने वाले लाभों में भी देरी होती है।उन्होंने कहा कि अवसंरचना परियोजनाओं को अलग-अलग खंड, हिस्से या पैकेज के रूप में देखने के बजाय समग्र रूप से देखा जाना चाहिए और इसी तरह उनकी निगरानी की जानी चाहिए। मोदी ने कहा कि अलग-अलग पैकेज में हुई प्रगति का अंतिम परिणाम पूरी परियोजना को समय पर पूरा करने और उसे चालू करने के रूप में सामने आना चाहिए।

साझा गलियारे विकसित करने का सुझाव

इसी के मद्देनजर मंत्रालयों और राज्यों से परियोजनाओं को शुरू से अंत तक समग्र रूप में देखने और ऐसी महत्वपूर्ण कमियों को दूर करने को कहा गया जो पूरी परियोजना को क्रियान्वित करने तथा उसके लाभ लोगों तक पहुंचाने में देरी का कारण बन सकती हैं। प्रधानमंत्री ने मंत्रालयों और राज्य सरकारों में सक्रिय कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन के हर स्तर पर अधिक जिम्मेदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से बड़ी परिवहन और अवसंरचना परियोजनाओं की योजना बनाते समय जहां संभव हो, वहां विभिन्न सेवाओं के लिए साझा गलियारे विकसित करने पर विचार किया जाना चाहिए।

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