
Ganga Expressway: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हरदोई के मल्लावां में राज्य की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना, गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कर इसे जनता को समर्पित कर दिया है। यह उत्तर प्रदेश को 'एक्सप्रेसवे प्रदेश' बनाने की दिशा में एक बहुत लंबी छलांग है। मेरठ से प्रयागराज की जो दूरी पहले थका देने वाली होती थी, अब वह कुछ ही घंटों का सफर बनकर रह जाएगी। आइए, विस्तार से समझते हैं कि यह 594 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे कैसे यूपी की तस्वीर बदलने जा रहा है।
गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने का सबसे बड़ा फायदा समय की बचत है। आधिकारिक बयान के मुताबिक, मेरठ और प्रयागराज के बीच यात्रा करने में पहले जहां 10 से 12 घंटे का समय लगता था, अब वही सफर लगभग छह घंटे में पूरा हो जाएगा। करीब 36,230 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सीधे पूर्वी यूपी से जोड़ता है। यह मेरठ के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज के जुडापुर दांदू गांव के पास खत्म होता है।
यह एक्सप्रेसवे यूपी के 12 प्रमुख जिलों- मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज से होकर गुजरता है। इन जिलों के 519 गांव सीधे तौर पर इस परियोजना से जुड़े हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे गांवों, किसानों और युवाओं के लिए 'जीवन रेखा' बताया है। आने वाले समय में इसे हरिद्वार और जेवर एयरपोर्ट से भी जोड़ने की योजना है, जिससे यह पूरा इलाका व्यापारिक गतिविधियों का केंद्र बन जाएगा।
इस एक्सप्रेसवे पर 29 अप्रैल 2026 की रात 12 बजे से टोल टैक्स की वसूली शुरू हो रही है। यहां की सबसे खास बात यह है कि आपको एंट्री पॉइंट पर टोल देने के लिए रुकना नहीं पड़ेगा। यूपीडा के इंजीनियरों के अनुसार, जैसे ही आप मेरठ या किसी भी एंट्री पॉइंट से एक्सप्रेसवे पर चढ़ेंगे, अत्याधुनिक सेंसर आपकी गाड़ी की डिटेल्स ऑनलाइन रिकॉर्ड कर लेंगे। एक्सप्रेसवे पर 12 जिलों में कुल 19 एंट्री और एग्जिट पॉइंट बनाए गए हैं, जिससे अलग-अलग शहरों के लिए कनेक्टिविटी आसान होगी।
इस एक्सप्रेसवे की शुरुआत से पहले ही सरकार ने टोल दरें जारी कर दी हैं। खास बात यह है कि यहां दोपहिया और ट्रैक्टर को भी टोल देना होगा।
एक्सप्रेसवे पर अधिकतम स्पीड 120 किमी/घंटा रखी गई है।
गंगा एक्सप्रेसवे को सिर्फ परिवहन के लिए ही नहीं, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी अहम बनाया गया है। हरदोई के पास 3.5 किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी तैयार की गई है, जिस पर भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमान आपातकालीन लैंडिंग कर सकेंगे। सुरक्षा के लिए एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) लागू किया गया है। इसमें हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे, इमरजेंसी कॉल बॉक्स, वेरिएबल मैसेज साइन (VMS), केंद्रीकृत ट्रैफिक कंट्रोल और स्पीड मॉनिटरिंग सिस्टम शामिल हैं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना पर तुरंत काबू पाया जा सके।
हापुड़ के ब्रजघाट में गंगा पर एक किलोमीटर और इससे आगे रामगंगा पर 720 मीटर लंबे पुलों से यह एक्सप्रेसवे गुजरता है। इसमें 381 अंडरपास, 14 मुख्य पुल, 126 छोटे पुल और 929 पुलिया शामिल हैं।
अभी प्रदेश में यमुना एक्सप्रेसवे (लंबाई लगभग 165 किलोमीटर), आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे (लंबाई लगभग 302 किलोमीटर), पूर्वांचल एक्सप्रेसवे (लंबाई लगभग 341 किलोमीटर), बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे (लंबाई लगभग 296 किलोमीटर), दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (लंबाई लगभग 96 किलोमीटर) और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे (लंबाई लगभग 91 किलोमीटर) संचालित हैं। साथ ही लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन भी जल्द प्रस्तावित है।
देश के इस सबसे लंबे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को बनाने में अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की बड़ी भूमिका रही है। 594 किलोमीटर के कुल हिस्से में से 464 किलोमीटर (लगभग 80%) का निर्माण अडानी समूह ने किया है। इसमें बदायूं से प्रयागराज तक के तीन खंड शामिल हैं। डिजाइन, निर्माण और संचालन (DBFOT) मॉडल पर आधारित यह प्रोजेक्ट आने वाले समय में आठ लेन तक बढ़ाया जा सकता है।
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