
Mahaparinirvan Diwas: भारत के संविधान निर्माता और सामाजिक न्याय के अग्रदूत डॉ. भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि पर देशभर में श्रद्धांजलि दी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और कई वरिष्ठ मंत्रियों ने आज सुबह संसद परिसर में बाबा साहब की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पोस्ट में लिखा, "महापरिनिर्वाण दिवस पर डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर को याद करते हुए। उनका दूरदर्शी नेतृत्व और न्याय, समानता तथा संविधानवाद के प्रति अटूट समर्पण हमारी राष्ट्रीय यात्रा को दिशा देता रहा है। उन्होंने पीढ़ियों को मानव गरिमा बनाए रखने और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए प्रेरित किया। उनके आदर्श हमें लगातार राह दिखाते रहें, जब हम एक विकसित भारत के निर्माण की ओर बढ़ रहे हैं।"
सीएम योगी ने एक्स पोस्ट में लिखा, "सामाजिक न्याय के अग्रदूत, संविधान निर्माता, 'भारत रत्न' बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी के महापरिनिर्वाण दिवस पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। बाबा साहब के विचार, सिद्धांत और दूरदृष्टि भारतीय लोकतंत्र की नींव हैं। समाज में व्याप्त विषमता, अन्याय और भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष करते हुए समानता, स्वतंत्रता और बंधुता पर आधारित समाज के निर्माण का जो सपना बाबा साहब ने देखा था, वह आज भी हम सभी के लिए पथप्रदर्शक है।"
महापरिनिर्वाण दिवस के मौके पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी अंबेडकर को याद किया, लेकिन साथ में सरकार को घेरने का मौका भी नहीं छोड़ा। राहुल गांधी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि देश का संविधान खतरे में है और इसका बचाव करना हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि अंबेडकर सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि वो आइकन हैं जिन्होंने भारत को आधुनिक लोकतंत्र दिया। राहुल गांधी ने आगे कहा कि आज भी संविधान भारत की असली ताकत है और इसे बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।
महापरिनिर्वाण दिवस बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की याद में मनाया जाता है। वे भारत के संविधान बनाने वाली समिति के प्रमुख थे और आज़ाद भारत के पहले कानून मंत्री भी रहे। बाद में उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाया और दलित बौद्ध आंदोलन को दिशा दी।
14 अप्रैल 1891 को महू (मध्यप्रदेश) में जन्मे अंबेडकर ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई की और डॉक्टरेट हासिल की। अपने करियर में उन्होंने वकील, प्रोफेसर, अर्थशास्त्री और नेता के रूप में काम किया। इसी योगदान को याद करते हुए हर साल 6 दिसंबर को महापरिनिर्वाण दिवस मनाया जाता है।
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