प्रयागराज में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक माघ मेले के लिए इस बार एक अनोखी पहल की गई है। मेले के लंबे इतिहास में पहली बार मेला प्राधिकरण ने आधिकारिक लोगो जारी किया है। यह लोगो मेले की आध्यात्मिक महत्ता, संगम की पवित्रता और प्रयागराज की परंपरा को प्रतीकात्मक रूप में दर्शाता है। लोगो में तीर्थराज प्रयाग और माघ मास में होने वाले अनुष्ठानों की विशिष्टता को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है।
लोगो में सूर्य, चंद्रमा और नक्षत्रों का ज्योतिषीय महत्व
इस नए लोगो की थीम भारतीय ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है और पूर्णिमा के दिन चंद्रमा विशेष नक्षत्रों के समीप होता है, तब माघ मास का शुभ काल बनता है। यही आधार माघ मेले के समय निर्धारण का मुख्य तत्व है। लोगो में सूर्य, चंद्रमा की 14 कलाएं और 27 नक्षत्रों की गति को शामिल कर मेला अवधि की खगोलीय महत्ता को सटीक रूप से दर्शाया गया है।
संगम स्नान, आध्यात्मिक ऊर्जा और परंपरा का चित्रण
लोगो में प्रयागराज के संगम क्षेत्र की आध्यात्मिक परंपरा को विशेष स्थान दिया गया है। माघ मास में किए जाने वाले स्नान, दान, तप और कल्पवास को चंद्र ऊर्जा और आध्यात्मिक साधना का सर्वोच्च काल माना जाता है। लोगो में प्रयागराज के अक्षयवट, लेटे हनुमान मंदिर और संगम की पवित्रता से जुड़े प्रतीकों को जोड़कर इस पावन मेले की सनातन परंपरा और आध्यात्मिक विरासत को उकेरा गया है।
डिजाइनरों ने आध्यात्मिकता और प्रकृति को जोड़ा
लोगो के डिजाइन में प्रकृति और आध्यात्मिकता दोनों को संतुलित रूप से शामिल किया गया है। संगम क्षेत्र में हर वर्ष दिखाई देने वाले साइबेरियन पक्षियों की उपस्थिति को भी लोगो में दर्शाया गया है। इसके साथ ही "माघे निमज्जनं यत्र पापं परिहरेत् तत:" श्लोक शामिल कर माघ स्नान की पौराणिक महत्ता को रेखांकित किया गया है। इस लोगो को डिजाइन कंसल्टेंट अजय सक्सेना और प्रागल्भ अजय ने तैयार किया है।