
President Letter to SC: सुप्रीम कोर्ट की तरफ से राष्ट्रपति और राज्यपालों के लिए विधेयकों पर फैसला लेने की समयसीमा तय किए जाने का मुद्दा फिर सुर्खियां बटोर रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट को चिट्ठी लिखकर 14 सवाल पूछे हैं जिस पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अपनी एक एक्स पोस्ट में आरोप लगाया कि यह सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक महत्व का जो मुद्दा सुलझा दिया था, उसे फिर से कटघरे में खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है।
स्टालिन ने कहा कि वो इसकी निंदा करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु की स्टालिन सरकार की याचिका पर ही राष्ट्रपति और राज्यपाल के लिए विधेयकों पर फैसला लेने के लिए तीन महीने की समयसीमा तय की थी। डीएमके सरकार ने राज्यपाल आरएन रवि के पास राज्य विधानसभा से पास 10 विधेयकों पर लंबे समय से फैसला नहीं लिए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
सुप्रीम कोर्ट दो जजों जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की दो सदस्यीय पीठ ने 8 अप्रैल को दिए अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा था कि विधेयक पर फैसला तीन महीने के अंदर नहीं लिया गया तो राष्ट्रपति को इसके पीछे का उचित तर्क बताना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में संविधान के अनुच्छेद 201 का हवाला देकर कहा था कि उसके पास राष्ट्रपति के निर्णय की समीक्षा करने का अधिकार है। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय की कई बार कड़े शब्दों में आलोचना की।
अब सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बदल गए हैं। जस्टिस बीआर गवई ने बुधवार को देश के प्रधान न्यायाधीश (CJI) पद की शपथ ली। तब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट से 14 सवालों के जरिए उसके 8 अप्रैल के फैसले पर स्पष्टीकरण मांगा है। ये सवाल इस प्रकार हैं...
1. जब राज्यपाल के पास कोई विधेयक याता है तो उनके सामने कौन-कौन से संवैधानिक विकल्प होते हैं?
2. क्या राज्यपाल फैसला लेते समय मंत्रिपरिषद की सलाह से बंधे हैं?
3. क्या राज्यपाल के निर्णय को न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है?
4. क्या संविधान का अनुच्छेद 361 राज्यपाल के निर्णयों पर न्यायिक समीक्षा को पूरी तरह रोक सकता है?
5. यदि संविधान में राज्यपाल के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की गई है तो क्या कोर्ट कोई समयसीमा तय कर सकता है?
6. क्या राष्ट्रपति के निर्णय को भी कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है?
7. क्या राष्ट्रपति के फैसलों पर भी कोर्ट समयसीमा तय कर सकता है?
8. क्या राष्ट्रपति के लिए सर्वोच्च न्यायालय से राय लेना अनिवार्य है?
9. क्या राष्ट्रपति और राज्यपाल के फैसलों पर कानून लागू होने से पहले ही कोर्ट सुनवाई कर सकता है?
10. क्या सुप्रीम कोर्ट आर्टिकल 142 का उपयोग करके राष्ट्रपति या राज्यपाल के निर्णयों को बदल सकता है?
11. क्या राज्य विधानसभा से पारित कानून राज्यपाल की स्वीकृति के बिना लागू होता है?
12. क्या संविधान की व्याख्या से जुड़े मामलों को सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ को भेजना अनिवार्य है?
13. क्या सुप्रीम कोर्ट ऐसे निर्देश या आदेश दे सकता है जो संविधान या मौजूदा कानूनों से मेल न खाता हो?
14. क्या केंद्र और राज्य सरकार के बीच विवाद केवल सुप्रीम कोर्ट ही सुलझा सकता है?
इस पर तमिलनाडु के सीएम ने तीन सवाल कर दिए। उन्होंने अपनी एक्स पोस्ट में पूछा कि राज्यपालों के लिए फैसला लेने की समयसीमा तय किए जाने पर आपत्ति क्यों होनी चाहिए? क्या बीजेपी विधेयक पर सहमति देने में बेमियादी विलंब की अनुमति देकर राज्यपाल की तरफ से टालमटोल को वैधानिक स्वरूप देना चाहती है? क्या केंद्र सरकार गैर-भाजपा शासित विधानसभाओं को शक्तिहीन करना चाहती है?
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