
देश की राजनीति नए-नए रंग देख रही है। पहले प्रधानमंत्री के काफिले को पंजाब सरकार ने रोका था, अब प. बंगाल सरकार पर आरोप है कि उसने राष्ट्रपति का अपमान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। और यह आरोप किसी और ने नहीं, बल्कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगाया है। उन्होंने शनिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बंगाल दौरे में सामने आई घटना को लेकर कहा कि राष्ट्रपति का अपमान हुआ, जिसके लिए टीएमसी सरकार का प्रशासन जिम्मेदार है।
इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्वयं पश्चिम बंगाल की भूमि पर ही ममता बनर्जी सरकार के रवैये पर रोष प्रकट कर चुकी थीं। हालांकि, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने पलटवार में बीजेपी पर राजनीति को गर्त में ले जाने का आरोप मढ़ दिया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी अपनी तुच्छ राजनीति के लिए राष्ट्रपति के उच्च पद को घसीट रही है। इतना ही नहीं, ममता ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू तक को भी हिदायत दे दी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पश्चिम बंगाल के बागडोगरा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संथाल परिषद के नौवें सम्मेलन में हिस्सा लिया। पहले यह सम्मेलन बिधाननगर में आयोजित होना था, लेकिन ऐन वक्त पर जगह बदल दी गई। हालांकि, राष्ट्रपति सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद बिधाननगर भी पहुंची जहां पूर्व में कार्यक्रम तय था। वहां जुटे लोगों के सामने राष्ट्रपति ने इस बात की चिंता जताई कि बेवजह सम्मेलन का स्थल बदल दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी घटनाएं जो लोगों को सम्मेलन में आने से रोकती हैं, किसी अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए उचित नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'ऐसा लगता है कि कुछ लोग नहीं चाहते कि संथाल समुदाय एकजुट हो, आगे बढ़े और मजबूत बने।
राष्ट्रपति के इस संबोधन के वीडियो क्लिप पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कड़ी टिप्पणी करते हुए पश्चिम बंगाल सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई के इस वीडियो पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए लिखा, 'यह शर्मनाक है जो पहले कभी नहीं हुआ। लोकतंत्र और आदिवासी समुदायों के सशक्तीकरण में विश्वास करने वाला हर व्यक्ति आज निराश है। राष्ट्रपति जी, जो खुद एक आदिवासी समुदाय से हैं, ने जो दर्द और पीड़ा जाहिर की है, उससे भारत के लोगों के मन में बहुत दुख है।'
पीएम ने आगे कहा, 'पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार ने सच में सारी हदें पार कर दी हैं। राष्ट्रपति के इस अपमान के लिए उनका प्रशासन जिम्मेदार है। यह भी उतना ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि संथाल संस्कृति जैसे जरूरी विषय पर पश्चिम बंगाल सरकार इतनी लापरवाही से पेश आती है। राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है और इस पद की पवित्रता का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए। उम्मीद है कि पश्चिम बंगाल सरकार और टीएमसी में समझदारी आएगी।'
वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीजेपी पर ओछी राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी साफ-साफ कहा कि अगर राष्ट्रपति चुनावी माहौल में प. बंगाल आती हैं तो उनके लिए संभव नहीं है कि वह राष्ट्रपति की अगवानी कर सकें। एसआईआर के खिलाफ कोलकाता में धरने पर बैठीं ममता बनर्जी ने न केवल बीजेपी पर पलटवार किया, बल्कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पर भी तीर छोड़े। ममता ने राष्ट्रपति से कहा, 'आपको पश्चिम बंगाल के आदिवासियों के लिए किए गए विकास के कामों के बारे में पता नहीं है।'
ममता ने कहा, जब मणिपुर और दूसरे बीजेपी शासित राज्यों में आदिवासियों पर अत्याचार हो रहा था, तब राष्ट्रपति मुर्मू चुप क्यों थीं?' इतना ही नहीं, ममता ने राष्ट्रपति को हिदायत भी दे दी। उन्होंने कहा, 'माननीय राष्ट्रपति जी, हम आपकी इज्जत करते हैं, लेकिन चुनाव के दौरान बीजेपी के कहने पर राजनीति न करें।
' ममता बनर्जी ने बीजेपी पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा, 'बीजेपी इतना नीचे गिर गई है कि वह पश्चिम बंगाल को बदनाम करने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का इस्तेमाल कर रही है।'
इससे पहले, 5 जनवरी, 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बड़ा वाकया पेश आया था। प्रधानमंत्री पंजाब के फिरोजपुर में एक रैली को संबोधित करने और कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करने जा रहे थे। शुरुआत में उन्हें हेलीकॉप्टर से जाना था, लेकिन खराब मौसम और बारिश के कारण सड़क मार्ग से जाने का फैसला किया गया।
जब उनका काफिला बठिंडा से हुसैनीवाला स्थित राष्ट्रीय शहीद स्मारक की ओर बढ़ रहा था, तब फिरोजपुर जिले के प्यारेआना गांव के पास प्रदर्शनकारी किसानों ने सड़क को ब्लॉक कर दिया था। रास्ता बंद होने के कारण प्रधानमंत्री के काफिले को एक फ्लाईओवर पर लगभग 15 से 20 मिनट तक रुकना पड़ा था। इस सुरक्षा खतरे और देरी को देखते हुए, काफिले को वहीं से वापस बठिंडा एयरपोर्ट की ओर मोड़ दिया गया और प्रधानमंत्री बिना रैली को संबोधित किए दिल्ली लौट गए।
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