Ram Mandir Dhwajarohan: अयोध्या में राम मंदिर पर लहराया धर्मध्वज, PM मोदी बोले- सदियों की वेदना आज पा रही विराम

अयोध्या में आज अभिजीत मुहूर्त के दौरान राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज का औपचारिक ध्वजारोहण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आयोजित इस कार्यक्रम ने मंदिर निर्माण प्रक्रिया के पूर्ण होने के संदेश को आधिकारिक रूप से स्थापित किया। 

Rishabh Shukla
पब्लिश्ड25 Nov 2025, 02:45 PM IST
पीएम मोदी ने राम मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण किया
पीएम मोदी ने राम मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण किया(Social Media)

अयोध्या में आज राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजा का ध्वजारोहण औपचारिक रूप से संपन्न हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में अभिजीत मुहूर्त के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। ध्वजारोहण के साथ राम मंदिर निर्माण प्रक्रिया के पूर्ण होने के संदेश को आधिकारिक रूप से दर्शाया गया। धर्म ध्वजा की लंबाई 22 फीट और चौड़ाई 11 फीट है, जबकि ध्वज दंड की ऊंचाई 42 फीट रखी गई है। इसे इलेक्ट्रिक सिस्टम के माध्यम से 161 फीट ऊंचे मंदिर शिखर पर स्थापित किया गया। ध्वज पर सूर्य, "ॐ" और कोविदार वृक्ष के विशेष चिह्न अंकित हैं; जिन्हें राम मंदिर की परंपरा, सूर्यवंश और सनातन प्रतीक के अनुरूप डिजाइन किया गया है। ध्वज का वजन लगभग 2 किलो बताया गया है। धर्म ध्वजा फहराए जाने के साथ मंदिर के शिखर पर यह स्थायी प्रतीक स्थापित कर दिया गया, जो आगे से राम मंदिर परिसर का केंद्रीकृत पहचान चिह्न माना जाएगा।

ये भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज अयोध्या नगरी भारत की सांस्कृतिक चेतना के एक और उत्कर्ष-बिंदु की साक्षी बन रही है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर ध्वजारोहण उत्सव का यह क्षण अद्वितीय और अलौकिक है। ये धर्म ध्वजा केवल एक ध्वज नहीं, ये भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज है। ये ध्वज संघर्ष से सृजन की गाथा है, सदियों से चले आ रहे स्वप्नों का साकार स्वरूप है, संतों की साधना और समाज की सहभागिता की सार्थक परिणीति है।

सदियों की वेदना आज पा रही है विराम

पीएम मोदी ने आगे कहा, "सदियों की वेदना आज विराम पा रही है। सदियों का संकल्प आज सिद्धि को प्राप्त हो रहा है। आज उस यज्ञ की पूर्णाहूति है, जिसकी अग्नि 500 वर्ष तक प्रज्ज्वलित रही। जो यज्ञ एक पल भी आस्था से डिगा नहीं, एक पल भी विश्वास से टूटा नहीं। ये धर्म ध्वजा केवल एक ध्वजा नहीं, ये भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज है। इसका भगवा रंग, इस पर रची सूर्यवंश की ख्याति वर्णित ओम शब्द और वृक्ष राम राज्य की कीर्ति को प्रतिरूपित करता है। ये ध्वज संकल्प है, ये धवज सफलता है। ये ध्वज संघर्ष से सृजन की गाथा है। ये ध्वज संतों की साधना और समाज की सहभागिता की सार्थक परिणिति है।

पीएम मोदी ने सभी का आभार जताया

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने आगे कहा कि हर उस दानवीर का भी आभार जिसने राम मंदिर निर्माण के लिए अपना सहयोग दिया। हर श्रमवीर, योजनाकार, वास्तुकार का अभिनंदन। जब श्रीराम अयोध्या से वनवास को गए तो वे युवराज राम थे, जब लौटे तो मर्यादा पुरुषोत्तम बनकर लौटे। विकसित भारत बनाने के लिए भी समाज की इसी सामूहिक शक्ति की आवश्यकता है। राम मंदिर का दिव्य प्रांगण भारत के सामूहिक सामर्थ्य की चेतना स्थली बन रहा है। यहां सप्तस्थली बने हैं; निषाद राज, मां सबरी का मंदिर है। यहां एक ही स्थान पर महर्षि वशिष्ठ, माता अहल्या, महर्षि अगस्त्य, संत तुलसीदास, महर्षि विश्वामित्र हैं। यहां जटायू जी और गिलहरी की मूर्तियां भी हैं। जो बड़े संकल्पों के लिए छोटे से छोटे प्रयास के महत्व को दिखाती हैं।

हमारे राम भाव से जुड़ते हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब भी राम मंदिर आएं सप्त मंदिर के दर्शन भी अवश्य करें। मित्रता, कर्तव्य, सामाजिक सद्भाव के मूल्यों को शक्ति देती है। हमारे राम भाव से जुड़ते हैं। उनके लिए व्यक्ति का कुल नहीं, उसकी भक्ति महत्वपूर्ण है। उन्हें वंश नहीं, मूल्य प्रिय हैं। उन्हें शक्ति नहीं, सहयोग महान लगता है। हम भी उसी भावना से आगे बढ़ रहे हैं- महिला, दलित, युवा, वंचित। हर वर्ग को विकास के केंद्र में रखा गया है। जब देश का हर व्यक्ति, हर वर्ग, हर क्षेत्र सशक्त होगा तब संकल्प की सिद्धि में सबका प्रयास लगेगा।

सबके प्रयास से बनेगा विकसित भारत

पीएम मोदी ने कहा कि हम सबके प्रयास से ही 2047, जब देश आजादी के 100 वर्ष मनाएगा, तब तक विकसित भारत का निर्माण करना है। राम से राष्ट्र के संकल्प की चर्चा की थी। हमें 1,000 वर्षों के लिए भारत की नींव मजबूत करनी है, जो सिर्फ वर्तमान की सोचते हैं वे आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय करते हैं। जब हम नहीं थे, तब भी ये देश था, जब हम नहीं रहेंगे, तब भी ये देश रहेगा। इसके लिए भी हमें राम से सीखना होगा। उनके व्यवहार को आत्मसात करना होगा। अगर समाज को सामर्थ्यवान बनाना है तो हमें अपने भीतर के राम की प्राण प्रतिष्ठा करनी होगी। 25 नवंबर का यह ऐतिहासिक दिन; अपनी विरासत पर गर्व का अद्भुत क्षण लेकर आया है। इसकी वजह है धर्म ध्वजा पर अंकित कोविदार वृक्ष।

भारत को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करना है

पीएम मोदी ने कहा कि आज जब राम मंदिर के प्रांगण में कोविदार फिर से प्रतिष्ठित हो रहा है। यह केवल एक वृक्ष की वापसी नहीं है। हमारी अस्मिता का पुनर्जागरण है। देश को आगे बढ़ना है तो अपनी विरासत पर गर्व करना होगा। अपनी विरासत पर गर्व के साथ साथ गुलामी की मानसिता से मुक्ति भी जरूरी है। आज से 190 साल पहले 1835 में मैकाले नाम के एक अंग्रेज ने भारत को अपनी जड़ों से उखाड़ने के बीज बोए थे। मैकाले ने भारत में मानसिक गुलामी की नींव रखी थी। 2035 में इस घटना को 200 साल पूरे होंगे। हमें आने वाले दस सालों तक भारत को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करना है।

ध्वजारोहण एक नए युग का शुभारंभ- सीएम योगी

इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्री अयोध्या धाम में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के भव्य मंदिर पर ध्वजारोहण एक यज्ञ की पूर्णाहुति नहीं, बल्कि एक नए युग का शुभारंभ है। आज का दिन उन संतों, योद्धाओं, श्री राम भक्तों की अखंड साधना, संघर्ष को समर्पित है, जिन्होंने इस पूरे आंदोलन और संघर्ष के लिए अपना जीवन समर्पित किया। श्रीराम मंदिर पर फहराता यह केसरिया ध्वज धर्म का प्रतीक है, मर्यादा का प्रतीक है, सत्य, न्याय और राष्ट्र धर्म का भी प्रतीक है। यह विकसित भारत की संकल्पना का प्रतीक भी है, क्योंकि संकल्प का कोई विकल्प नहीं।

संघ प्रमुख मोहन भागवत भी रहे उपस्थित

ध्वजारोहण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मंदिर ट्रस्ट के सदस्य, संत समाज और देश-विदेश से आए अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम से पहले प्रधानमंत्री मोदी का अयोध्या में रोड शो आयोजित किया गया और इसके बाद उन्होंने मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की। ध्वजारोहण के लिए अयोध्या में बड़े पैमाने पर तैयारियां की गई थीं। पूरे शहर को फूलों से सजाया गया। सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद और शहर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष यातायात और सुविधाओं की व्यवस्था की गई। मंदिर की परिधि और आयोजन परिसर में आने वाले अतिथियों के लिए अलग-अलग मार्ग निर्धारित किए गए।

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