
Al Falah University: दिल्ली के लाल किले के पास हुए विस्फोट के बाद अल-फलाह यूनिवर्सिटी सुर्खियों में है। इस बार वजह है इसकी वेबसाइट पर दिखाया गया गलत मान्यता प्रमाणपत्र। राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) ने इसे गंभीर मामला मानते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह विश्वविद्यालय दिल्ली में लाल किले के नजदीक सोमवार को हुए विस्फोट के मामले में जांच के घेरे में है।
NAAC एक सरकारी संस्था है जो कॉलेजों और यूनिवर्सिटियों की पढ़ाई और गुणवत्ता की जांच करके उन्हें मान्यता देती है। नैक ने कारण बताओ नोटिस में कहा कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी न तो मान्यता प्राप्त है और न ही उसने मान्यता के लिए आवेदन किया है। इसके बावजूद, यूनिवर्सिटी ने अपनी वेबसाइट पर दिखाया कि यह अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट का हिस्सा है और इसके तीन कॉलेजों को नैक से ग्रेड-ए मिला हुआ है।
इनमें अल-फलाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (1997 से नैक द्वारा ग्रेड ए), ब्राउन हिल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (2008 से), अल-फलाह स्कूल ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (2006 से) का नाम शामिल है। नोटिस में कहा गया कि यह दावा पूरी तरह गलत है और इससे जनता, खासकर अभिभावकों और छात्रों को गुमराह किया जा रहा है।
नोटिस में साफ कहा गया कि अल-फलाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी की मान्यता 2018 में और अल-फलाह स्कूल ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग की मान्यता 2016 में ही खत्म हो चुकी थी। दोनों कॉलेजों ने अब तक नई मान्यता प्रक्रिया के लिए आवेदन भी नहीं किया है।
अल फलाह विश्वविद्यालय की वेबसाइट के मुताबिक संस्थान की स्थापना हरियाणा विधानसभा द्वारा हरियाणा निजी विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत की गई थी। संस्थान की शुरुआत 1997 में इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में हुई थी। 2013 में इसे NAAC से ‘ए’ ग्रेड मिला और 2014 में हरियाणा सरकार ने इसे यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया। अल फलाह चिकित्सा महाविद्यालय भी इसी विश्वविद्यालय से संबद्ध है।
कई पर्यवेक्षकों का कहना है कि शुरुआती वर्षों में अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने खुद को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और जामिया मिलिया इस्लामिया विकल्प के रूप में खुद को प्रस्तुत किया था। खासकर उन अल्पसंख्यक छात्रों के लिए जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा चाहते थे।
दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके के बाद अब फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर शिकंजा कस गया है। एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (AIU) ने बुधवार को यूनिवर्सिटी की सदस्यता तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दी है।
AIU ने कहा कि यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि यूनिवर्सिटी अब उनके नियमों के हिसाब से “गुड स्टैंडिंग” में नहीं दिखती। 13 नवंबर 2025 को जारी आधिकारिक चिट्ठी में बताया गया कि मीडिया रिपोर्ट्स में यूनिवर्सिटी का नाम लाल किला आतंकी केस से जुड़ा पाया गया है।
दिल्ली के लाल किले के पास सोमवार को हुए धमाके में 13 लोगों की मौत और कई के घायल होने की खबर ने सबको हिला दिया था। अब जांच में पता चला है कि गिरफ्तार लोगों में अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े तीन डॉक्टर भी शामिल हैं। इसी के बाद यूनिवर्सिटी की गतिविधियों पर सरकार और जांच एजेंसियों की नजरें टेढ़ी हो गईं।
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