
77वें गणतंत्र दिवस परेड 2026 को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। इस बार का आयोजन बेहद खास होने जा रहा है। कर्तव्य पथ पर निकलने वाली परेड में भारत की सांस्कृतिक विरासत, सैन्य ताकत और तकनीकी प्रगति का शानदार प्रदर्शन देखने को मिलेगा। इस साल कुल 30 झांकियां (Tableaux) परेड का हिस्सा होंगी जिन्हें दो बड़े थीम, “स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम्” और “समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत” के तहत तैयार किया गया है। हर झांकी देश की आजादी की कहानी, विविध संस्कृति और आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ते कदमों को विज़ुअल अंदाज में पेश करेगी।
इन 30 झांकियों में से 17 झांकियां राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की होंगी। ये झांकियां स्थानीय कला, परंपराओं और आधुनिक विकास की कहानी कहेंगी। असम की झांकी में आशिराकांडी क्राफ्ट विलेज, गुजरात और छत्तीसगढ़ में वंदे मातरम् और स्वतंत्रता आंदोलन, जबकि पंजाब की झांकी में गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहादत दिवस को दिखाया जाएगा।
जम्मू-कश्मीर की झांकी वहां की हस्तशिल्प और लोक नृत्य, वहीं केरल की झांकी वॉटर मेट्रो और 100 पर्सेंट डिजिटल केरल को दर्शाएगी। महाराष्ट्र की झांकी में गणेशोत्सव को आत्मनिर्भरता के प्रतीक के रूप में पेश किया जाएगा।
दूसरी ओर तमिलनाडु की झांकी ईवी मैन्युफैक्चरिंग हब, ओडिशा की झांकी Soil to Silicon, नागालैंड की झांकी हॉर्नबिल फेस्टिवल, पश्चिम बंगाल की झांकी आजादी की लड़ाई में बंगाल की भूमिका और उत्तर प्रदेश की झांकी बुंदेलखंड की संस्कृति को उजागर करेगी। मध्य प्रदेश की झांकी में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर को श्रद्धांजलि दी जाएगी।
बाकी 13 झांकियां केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों की होंगी। इनमें सेना, नौसेना और वायुसेना की संयुक्त ताकत दिखाती Tri-Services झांकी, ऑपरेशन सिंदूर, संस्कृति मंत्रालय की वंदे मातरम्, शिक्षा मंत्रालय की नई शिक्षा नीति 2020, आयुष मंत्रालय की स्वस्थ भारत की झलक, गृह मंत्रालय की भुज भूकंप की 25वीं बरसी, बिजली मंत्रालय की प्रकाश गंगा, और स्किल डेवलपमेंट मंत्रालय की स्किल्स के जरिए आत्मनिर्भर भारत जैसी झांकियां शामिल हैं।
इस बार 26 जनवरी को होने वाले 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर दो बड़े यूरोपीय नेता शामिल होंगे। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सांटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भारत सरकार के आमंत्रण पर गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होंगे। यह पहली बार है जब शीर्ष यूरोपीय संघ (EU) के दो नेता संयुक्त रूप से भारत के गणतंत्र दिवस में मुख्य अतिथि बनेंगे, जिसे भारत और EU के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने का संकेत माना जा रहा है।
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