भारत के नए श्रम कानून के तहत कर्मचारी के इस्तीफा देने के दो दिन के भीतर कंपनी को उसका फुल एंड फाइनल भुगतान करना होगा। विशेषज्ञ बताते हैं कि किस तरह मजदूरी पर नई श्रम संहिता लंबे समय से चली आ रही प्रथाओं को बदल रही है और इसकी वजह से कंपनियों को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। नए कानून का पलन करने के लिए कंपनी के एचआर डिपार्टमेंट को भी कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
क्या है नया नियम?
दशकों से कर्मचारी वेतन बकाया छुट्टी के एवज में मिलने वाला पैसा और अन्य भुगतानों के लिए 45 से 60 दिनों तक का समय लगता आ रहा है। कई बार कर्मचारियों को इस्तीफा देने के बाद इससे भी ज्यादा लंबे समय तक फाइनल भुगतान के लिए इंतजार करना पड़ता है। मजदूरी संहिता 2019 की धारा 17(2) के तहत लाई गई नई व्यवस्था इस इंतजार को खत्म कर देगी। इसके लिए इस्तीफा, बर्खास्तगी, छंटनी या प्रतिष्ठान के बंद होने के दो वर्किंग-डे के भीतर सभी बकाया राशि का भुगतान करना जरूरी है।
पुराने कानूनों से कितना अलग?
NPV लेबर लॉ सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक पंकज सावला ने फाइनेंशियल एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए बताया कि ये नियम पुराने कानून में भी मौजूद था, लेकिन बहुत सीमित दायरे में प्रभावी था। पुराना कानून Payment of Wages Act 1936 का प्रावधान केवल उन्हीं कर्मचारियों के लिए था जिन्हें कंपनी की तरफ से नौकरी से निकाला जाता था और जिनका वेतन 24,000 रुपये प्रति माह से अधिक नहीं था।
नए कानून की तैयारी और चुनौतियां
नए श्रम कानून के प्रावधानों से सबसे ज्यादा मुश्किल छोटी और मध्यम दर्जे की कंपनियों को होगी, जिसके पास सीमित एचआर स्टाफ है। कैश का फ्लो और प्रशासनिक जटिलताएं इन कंपनियों को परेशान करेंगी। वहीं बड़ी कंपनियों के सामने धन निकासी की औपचारिकता, एचआर, आईटी, फाइनेंस और पेरोल सिस्टम को व्यवस्थित करने में चुनौती का सामना करना पड़ेगा।
तकनीक से खत्म होगी जटिलता
नए श्रम कानून में कर्मचारियों के इस्तीफे के दो दिन के भीतर फुल एंड फाइनल भुगतान को आसान बनाने में तकनीकी मदद करेगी। फाइनेंशियल एक्सप्रेस से बात करते हुए नेक्सडिग्म के निदेशक रामचंद्रन कृष्णमूर्ति ने बताया किया डिजिटली वर्कफ्लो की मदद से इस मुश्किल को आसान बनाया जा सकता है। समय सीमा का पालन करने के लिए HRMS प्लेटफार्मों की आवश्यकता होगी, जो हाजिरी, पेरोल, संपत्ति प्रबंधन और वित्त विभाग को सेंट्रलाइज कर सके। जिससे कर्मचारी के काम के अंतिम दिन ही उनका फुल एंड फाइनल सेटलमेंट किया जा सके।
नियम की अनदेखी पर लगेगा जुर्माना
नए श्रम कानून में कर्मचारी के इस्तीफे, नौकरी से निकाले जाने या कंपनी बंद होने की स्थिति में दो दिन के भीतर फुल एंड फाइनल सेटलमेंट नहीं करने पर सख्त कार्रवाई और भारी-भरकम जुर्माने का प्रावधान है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस को पंकज सालवा ने बताया कि भुगतान में देरी पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं नए श्रम कानून के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन अगर कंपनी करती है तो उसपर 20 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। कंपनी अगर बार-बार नियमों का उल्लंघन करती है तो उस पर कार्रवाई में कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
ये सुधार श्रमिकों के लिए एक बड़ा बदलाव है, जो नौकरी छोड़ते समय वित्तीय अनिश्चितता को कम करने का लक्ष्य रखता है। कंपनियों को अपने सिस्टम को अपग्रेड करने और प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने की जरुरत पड़ेगी। नए कानून के तहत सरकार की कोशिश है कि नौकरी जाने की स्थिति में आर्थिक संकट का सामना करने वाले कर्मचारियों को तत्काल मदद मिल सके।