
वीर बाल दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह के साहिबजादे भारत के अदम्य साहस, वीरता और शौर्य के सर्वोच्च प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि साहिबजादों का सर्वोच्च बलिदान क्रूर मुगल शासन और मजहबी कट्टरता के खिलाफ भारत की आत्मा की आवाज था। पीएम मोदी ने कहा कि देश उन वीर सपूतों को याद कर रहा है, जिन्होंने अपनी अल्पायु में भी ऐसे आदर्श स्थापित किए, जो सदियों तक राष्ट्र को प्रेरणा देते रहेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की उम्र बहुत कम थी, लेकिन मुगल सम्राट औरंगजेब की क्रूरता के आगे वे चट्टान की तरह खड़े रहे। उन्होंने कहा कि औरंगजेब भारतीयों का मनोबल तोड़कर धर्मांतरण कराना चाहता था, इसलिए उसने गुरु परिवार को निशाना बनाया। लेकिन वह यह भूल गया कि गुरु गोबिंद सिंह और उनके साहिबजादे साधारण नहीं थे, बल्कि त्याग और तपस्या के साक्षात प्रतीक थे।
पीएम मोदी ने कहा कि साहिबजादा अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह को जिस संघर्ष से गुजरना पड़ा, वह सत्ता की लड़ाई नहीं थी, बल्कि भारत के मूल विचारों और मजहबी कट्टरता के बीच टकराव था। यह सत्य और असत्य की लड़ाई थी। उन्होंने कहा कि माता गुजरी जी, गुरु गोबिंद सिंह और चारों साहिबजादों का साहस आज भी हर भारतीय को आत्मबल और नैतिक शक्ति प्रदान करता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने याद दिलाया कि 9 जनवरी 2022 को उन्होंने 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य देश को साहिबजादों के अद्वितीय बलिदान से परिचित कराना और युवा पीढ़ी को उनके शौर्य से प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि देशभर में आयोजित कार्यक्रमों के जरिए भारत के इतिहास के इन युवा नायकों के त्याग और वीरता को सम्मान दिया जा रहा है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी औपनिवेशिक मानसिकता हावी रही, जिसके चलते भारत के नायकों और नायिकाओं को हाशिये पर रखा गया। उन्होंने ब्रिटिश शिक्षा प्रणाली के जनक मैकाले का उल्लेख करते हुए कहा कि 1835 में बोई गई मानसिक गुलामी की जड़ें लंबे समय तक बनी रहीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ने अब संकल्प लिया है कि भारतीय बलिदानों और वीरता की स्मृतियों को दबाया नहीं जाएगा और 2035 तक गुलामी की मानसिकता से पूर्ण मुक्ति हासिल की जाएगी।
प्रधानमंत्री ने ‘जेनरेशन जेड’ और ‘जेनरेशन अल्फा’ की प्रशंसा करते हुए कहा कि यही पीढ़ी विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करेगी। उन्होंने कहा कि हाल के संसद सत्र में भारतीय भाषाओं में दिए गए भाषण गुलामी की मानसिकता से मुक्ति का प्रतीक हैं। साथ ही, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार का जिक्र करते हुए कहा कि देश के प्रतिभाशाली बच्चे राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
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