उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की समाजवाटी पार्टी (सपा) पूर्व बीडीसी सदस्य जगदेव यादव की हत्या के मामले में आंतरिक गुटबाजी का शिकार हो गई। बहराइच जनपद अंतर्गत पयागपुर थाना क्षेत्र में 12-13 जनवरी की रात पूर्व बीडीसी सदस्य जगदेव यादव की निर्मम हत्या की गई थी। इस मामले पर सियासत गरमाने के साथ ही सपा की आंतरिक कलह भी खुलकर सामने आ गई है।
हत्या का एक मामला और खुल गई सपा की कलई
सपा ने प्रशासन को अल्टीमेटम दिया। इसी के तहत, सपा की गठित 11 सदस्यीय जांच टीम को पीड़ित परिवार से मिलने बुधवार को पहुंचना था, लेकिन मौके पर टीम की एकजुटता नदारद दिखी और जांच दल विवादों में घिर गया। निर्धारित कार्यक्रम के विपरीत 11 सदस्यीय जांच टीम के सदस्य भगत राम मिश्र अकेले ही पीड़ित परिवार के घर पहुंचे। उन्होंने परिजनों से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली और शोक संवेदना व्यक्त की। इस दौरान उन्होंने हत्याकांड को कानून-व्यवस्था की गंभीर विफलता बताते हुए बीजेपी की योगी आदित्यनाथ सरकार पर तीखा हमला बोला।
साफ-साफ दिखी समाजवादी पार्टी में आपसी कलह
मीडिया ने जब भगत राम मिश्र से पूछ डाला कि 11 सदस्यीय टीम को यहां आना था तो आप अकेले क्यों आए? इसपर उन्होंने कहा कि उनके यहां सभी का दावत था और वहीं से सबको दावत खाकर निकलना था, लेकिन उन्होंने मेरा निमंत्रण नहीं लिया। उन्होंने कहा कि चूंकि पार्टी का निर्देश था, इसलिए वह
पीड़ित के घर अकेले आ गए। उन्होंने अपनी समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव का नाम तो नहीं लिया, लेकिन इशारा उन्हीं की तरफ था। मिश्र ने कहा कि उन्होंने पीड़ित परिवार से मामले की जानकारी लेकर शोक संवेदना व्यक्त की है।
सपा ने बनाई टीम, लेकिन अलग-अलग पहुंचे नेता
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सपा की जांच टीम में आपसी गुटबाजी सदस्य अलग-अलग समय पर पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे, जिससे पार्टी की रणनीति और एकता पर सवाल खड़े हो गए। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि एक ओर पार्टी सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर हमलावर है, लेकिन दूसरी ओर उसी की जांच टीम खुद बिखरी दिखाई दे रही है।
बहरहाल, भगत राम मिश्र ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच, शीघ्र गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की। पीड़ित परिजनों ने भी न्याय की गुहार लगाते हुए कहा कि जब तक आरोपियों को सजा नहीं मिलती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।