ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच सोमवार को ईरानियों से अनुरोध किया कि वे 1979 की इस्लामी क्रांति की 47वीं सालगिरह से पहले एकता दिखाएं और 'दुश्मन को मायूस करें।'
इस्लामी क्रांति की सालगिरह पर ईरानियों में जोश भर रहे खामेनेई
खामेनेई ने एक टेलीविजन संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय शक्ति मिसाइलों और विमानों जैसे सैन्य हार्डवेयर के बजाय 'दृढ़ संकल्प और प्रतिरोध' पर ज्यादा निर्भर करती है। उनकी यह टिप्पणी तब आई है जब ईरान क्रांति की जीत का जश्न मनाने के लिए बुधवार को देशव्यापी रैलियों की तैयारी कर रहा है।
जब तक दुश्मन मायूस नहीं होता, एक राष्ट्र उत्पीड़न के संपर्क में रहता है। दुश्मन को मायूस होना ही चाहिए।- अली खामेनेई, ईरान के सुप्रीम लीडर
दुश्मन को मायूस होना ही चाहिए: खामेनेई
खामेनेई ने उम्मीद जताई कि इस बार की सालगिरह 'अन्य राष्ट्रों, सरकारों और शक्तियों को ईरानी लोगों के प्रति विनम्रता और सम्मान दिखाने' के लिए मजबूर करेगी। उन्होंने कहा कि यह वार्षिक मार्च को गरिमा का प्रदर्शन है जो विदेशी शक्तियों को ईरानी मामलों में हस्तक्षेप करने की महत्वाकांक्षाओं से 'पीछे हटने' के लिए मजबूर करता है।
अमेरिका को ईरान की सीधी चुनौती
खामेनेई ईरानियों से दुश्मन देशों को सीधा संदेश देने की अपील की। खामेनेई ने कहा, 'जब तक दुश्मन मायूस नहीं होता, एक राष्ट्र उत्पीड़न के संपर्क में रहता है। दुश्मन को मायूस होना ही चाहिए।' यह भाषण अमेरिका के साथ बढ़े हुए तनाव की अवधि के बाद आया है। अमेरिका ने पश्चिमी एशिया में अपने युद्धपोत तैनात किए हैं, जबकि ईरान ने भी चुनिंदा परीक्षणों से अपनी सैन्य शक्तियों का प्रदर्शन किया है।
यूरेनियम संवर्धन पर ठनी हुई है रार
ओमान के मस्कट में शुक्रवार को ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडलों के बीच अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता के बावजूद दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण अंतर बने हुए हैं, जिससे एक समझौते की संभावना अनिश्चित बनी हुई है।
ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन के अध्यक्ष मोहम्मद इस्लामी ने कहा है कि अगर उसके ऊपर लगाए गए प्रतिबंध हटा लिए जाते हैं तो वह अपने 60 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम को विलय करने पर विचार कर सकता है। यूरेनियम को विलय करने का मतलब है उसे 'ब्लेंड मटेरियल' के साथ मिलाना ताकि उसका संवर्धन स्तर कम हो जाए। इससे यूरेनियम का अंतिम रूप एक तय संवर्धन सीमा से ज्यादा नहीं होता।
1979 की वह इस्लामी क्रांति
सन् 1979 की इस्लामी क्रांति एक महत्वपूर्ण क्षण था जिसने ईरान को पश्चिमी समर्थक राजशाही से एक इस्लामी गणराज्य में बदल दिया। अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के नेतृत्व में मौलवियों, छात्रों और कथित धर्मनिरपेक्ष कार्यकर्ताओं के एक विविध गठबंधन ने शाह मोहम्मद रजा पहलवी के शासन को उखाड़ फेंका था। इस तख्तापलट के दौरान तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर ईरानी लोगों ने कब्जा कर लिया था, जिसके बाद अमेरिका ने ईरान से राजनयिक संबंध तोड़ दिए थे।