SIR in Gujarat: गुजरात में वोटर लिस्ट की बड़ी सफाई, SIR के बाद 74 लाख नाम हटे, मतदाता घटकर 4.34 करोड़

गुजरात में SIR के बाद ड्राफ्ट मतदाता सूची से करीब 74 लाख नाम हटाए गए हैं, जिससे कुल वोटरों की संख्या 4.34 करोड़ रह गई है। मृत, प्रवासी, अनुपस्थित और डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिनका नाम सूची में नहीं है, वे 18 जनवरी तक दावा-आपत्ति दर्ज कर सकते हैं।

Rishabh Shukla
अपडेटेड19 Dec 2025, 10:33 PM IST
गुजरात में SIR के बाद 74 लाख नाम हटे
गुजरात में SIR के बाद 74 लाख नाम हटे

गुजरात में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) के बाद मतदाता सूची में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। चुनाव आयोग द्वारा जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के अनुसार राज्य से करीब 74 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इस प्रक्रिया के बाद गुजरात में कुल मतदाताओं की संख्या 5.08 करोड़ से घटकर 4.34 करोड़ रह गई है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी हरीत शुक्ला ने बताया कि यह कदम मतदाता सूची को साफ, सटीक और अद्यतन बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

किन कारणों से हटाए गए लाखों नाम

चुनाव आयोग के अनुसार SIR के दौरान विभिन्न श्रेणियों के मतदाताओं के नाम हटाए गए। इनमें 18.07 लाख मृत मतदाता, 9.69 लाख अनुपस्थित मतदाता, 40.25 लाख स्थायी रूप से पलायन कर चुके लोग, 3.81 लाख डुप्लीकेट एंट्री और करीब 1.89 लाख अन्य कारणों से हटाए गए नाम शामिल हैं। यह विशेष अभियान 4 नवंबर से शुरू होकर 14 दिसंबर तक चला, जिसमें घर-घर सत्यापन और रिकॉर्ड मिलान किया गया।

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ड्राफ्ट लिस्ट में नाम न हो तो क्या करें

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं हैं, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसे मतदाता 18 जनवरी तक दावा और आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए फॉर्म-6 के साथ एनेक्सचर-IV भरकर अपने बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को जमा किया जा सकता है। इसके अलावा voters.eci.gov.in पोर्टल या E-NET/ECINET एप के जरिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध है।

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SIR क्या है?

SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा प्रमुख चुनावों से पहले मतदाता सूचियों की शुद्धता और पूर्णता सुनिश्चित करने के लिए किया जाने वाला एक विशेष अभियान है। यह प्रक्रिया जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत संचालित होती है, जिसमें घर-घर जाकर सत्यापन किया जाता है ताकि मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाए जा सकें और नए व पहली बार वोट देने वाले नागरिकों को सूची में जोड़ा जा सके। इस दौरान बूथ लेवल अधिकारी मतदाताओं का विवरण जांचते हैं और दावा-आपत्ति की प्रक्रिया में मदद करते हैं, जिससे वोटर लिस्ट अपडेट और भरोसेमंद बनी रहे।

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