SIR vs SR: हर जगह हो रहा है SIR और असम में SR, जानिए ऐसा क्यों

SIR vs SR: असम अकेला ऐसा राज्य है जिसे स्टैंडअलोन SR के तहत रखा गया है। यह एक ऐसा प्रोसेस है जो NRC से जुड़ी इसकी खास डेमोग्राफिक वेरिफिकेशन हिस्ट्री को ध्यान में रखकर बनाया गया है। असम ने दूसरे राज्यों के उलट, स्पेशल रिवीजन के बाद फाइनल इलेक्टोरल रोल जारी किया है।

Jitendra Singh
अपडेटेड12 Feb 2026, 07:53 AM IST
SIR vs SR: भारत के नागरिकता कानूनों में असम के लिए एक अलग प्रावधान है।
SIR vs SR: भारत के नागरिकता कानूनों में असम के लिए एक अलग प्रावधान है।

SIR vs SR: चुनाव आयोग ने बिहार के बाद देश के 12 राज्यों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR शुरू करने का ऐलान किया था। इन राज्यों में यूपी, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, गुजरात, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य शामिल हैं। लेकिन जब यह सूची सामने आई तो सबसे बड़ा सवाल उठा कि इसमें असम का नाम क्यों नहीं था? अब असम में वोटर लिस्ट भी जारी हो गई है। कई राज्यों में मतदाताओं की संख्या में कटौती हुई, लेकिन असम में मतादाताओं की संख्या में इजाफा हुआ है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब बाकी राज्यों में SIR किया गया तो फिर असम में स्पेशल रिवीजन (SR) क्यों किया गया।

बता दें कि असम में स्पेशल रिवीजन (SR) के बाद फाइनल वोटर लिस्ट मंगलवार को पब्लिश हो गई। हालांकि, यह प्रोसेस 12 दूसरे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किए गए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) एक्सरसाइज से अलग है। असम अकेला ऐसा राज्य है जिसे स्टैंडअलोन SR के तहत रखा गया है। यह एक ऐसा प्रोसेस है, जिसे NRC से जुड़ी इसकी खास डेमोग्राफिक वेरिफिकेशन हिस्ट्री को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

असम को SIR से रखा बाहर

दरअसल, असम वैसे तो एक भारतीय राज्य है, लेकिन कई मामलों में यह देश के बाकी राज्यों से अलग है। यह बॉर्डर स्टेट है और यहां नागरिकता, विदेशियों की पहचान और NRC जैसे मुद्दे कई दशकों से बेहद संवेदनशील रहे हैं। असम में NRC की पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुई। आज भी नागरिकता और विदेशी नागरिकों से जुड़े कई मामले अदालत में चल रहे हैं।

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ऐसे में असम में मतदाता सूची का कोई भी रिवीजन केवल वोटर लिस्ट सुधार भर नहीं माना जाता, बल्कि नागरिकता से जुड़ा मामला भी बन जाता है। लिहाजा SIR जैसा गहन और विस्तृत सत्यापन यहां लागू किया जाता, तो नागरिकता विवाद और कानूनी उलझनें बढ़ सकती थीं। इसी कारण चुनाव आयोग ने असम को बाकी राज्यों जैसा व्यवहार नहीं किया और उसे SIR से बाहर रखा गया। चुनाव आयोग ने कहा था कि भारत के नागरिकता कानूनों में असम के लिए एक अलग प्रावधान है।

जानिए SIR और SR में अंतर

जो मतदाता सूची हर साल अपडेट होती है, उसे समरी रिवीजन कहा जाता है। इसका मतलब यह हुआ कि इसमें गलत नाम हटाए जाते हैं और नए नाम जोड़े जाते हैं। वहीं SIR में नागरिकता सहित हर दस्तावेज की गहन जांच-पड़ताल होती है। लेकिन असम में आयोग ने जो SR लागू किया है। इसके तहत BLO यानी बूथ लेवल ऑफिसर्स घर-घर जाकर सिर्फ उन नामों और जानकारियों को सत्यापित करते हैं।

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इसमें जो नाम पहले से रजिस्टर में दर्ज हैं। उसी में फॉर्म भरवाकर पूरी नई सूची नहीं तैयार की जाती है। इसका सीधा मतलब है कि सूची को सही किया जाएगा, लेकिन SIR जैसी गहन जांच नहीं होगी। इससे विवाद के आसार कम होंगे और प्रशासन भी इसे आसानी से पूरा कर सकता है।

असम में वोटर लिस्ट में बढ़े नाम

असम की स्‍पेशल र‍िवीजन और बाकी राज्यों की SIR प्रक्रिया का अंतर है। कई नामों को अभी तक जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत नहीं हटाया गया है। इन्हें हटाने के लिए औपचारिक आवेदन (फॉर्म 7) मिलने का इंतजार किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि लगभग 10 लाख ऐसे नाम (मृत या शिफ्टेड) अभी भी ड्राफ्ट रोल में मौजूद हो सकते हैं, जब तक कि उनके खिलाफ फॉर्म 7 भरकर प्रक्रिया पूरी नहीं की जाती। यही कारण है कि असम का आंकड़ा बढ़ा हुआ दिख रहा है, जबकि SIR वाले राज्यों में ऐसे नामों को आयोग खुद सख्ती से हटा रहा है।

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