
Social Media Ban: आजकल के डिजिटल दौर में मोबाइल और सोशल मीडिया जैसे हमारी सांसों का हिस्सा बन गए हैं। छोटे-छोटे बच्चे यूट्यूब और इंस्टाग्राम के रील्स पर उंगलियां चलाना जानते हैं। लेकिन क्या यह बढ़ती स्क्रीन-टाइम और वर्चुअल दुनिया हमारे बच्चों के बचपन को निगल रही है? इसी चिंता को देखते हुए कर्नाटक सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार, 6 मार्च 2026 को राज्य का बजट पेश करते हुए यह ऐलान किया। उन्होंने साफ कहा कि बच्चों पर मोबाइल और सोशल मीडिया के जो बुरे असर पड़ रहे हैं, उन्हें रोकने के लिए अब राज्य में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पूरी तरह बैन होगा। कर्नाटक ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री का मानना है कि बच्चों की मानसिक सेहत और उनके विकास के लिए यह कड़ा फैसला लेना जरूरी था।
सोशल मीडिया को लेकर बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा अब वैश्विक बहस बन चुका है। 2025 में ऑस्ट्रेलिया ऐसा कानून लाने वाला दुनिया का पहला देश बना, जिसमें 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया गया।
इसके बाद यूरोप और एशिया के कई देश भी इसी तरह के नियमों पर विचार कर रहे हैं। इनमें फ्रांस, जर्मनी, डेनमार्क, स्पेन, नॉर्वे और ब्रिटेन जैसे देश शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया के एल्गोरिदम, हिंसक कंटेंट और लगातार बढ़ता स्क्रीन टाइम बच्चों की मानसिक सेहत को प्रभावित कर सकता है।
कर्नाटक का यह कदम भारत में डिजिटल सुरक्षा को लेकर एक नई बहस शुरू कर सकता है। आने वाले समय में अन्य राज्य भी इस तरह के नियमों पर विचार कर सकते हैं।
कर्नाटक सरकार ने इस बार का बजट लगभग ₹4,48,004 करोड़ का पेश किया है। बजट में खास तौर पर टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि बेंगलुरु और पूरे कर्नाटक को टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में और मजबूत बनाया जाए।
सरकार ने यह भी घोषणा की कि रोहित वेमुला अधिनियम को राज्य के सभी सरकारी, निजी और डीम्ड विश्वविद्यालयों में लागू किया जाएगा।
इसका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव और उत्पीड़न को रोकना है, ताकि छात्रों को सुरक्षित और समान वातावरण मिल सके।
बजट में टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए भी बड़ा ऐलान किया गया। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) के तहत एक नया AI और टेक्नोलॉजी पार्क बनाया जाएगा। इसके अंतर्गत “बेंगलुरु रोबोटिक्स एंड AI इनोवेशन जोन” स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना में ISRO और कर्नाटक स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन भी सहयोग करेंगे।
बेंगलुरु में ट्रैफिक समस्या को कम करने के लिए सरकार ने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का ऐलान किया है। हेब्बल जंक्शन से HSR लेआउट–सिल्क बोर्ड जंक्शन तक नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर
इन दोनों प्रोजेक्ट्स की कुल लंबाई करीब 40 किलोमीटर होगी और इन पर लगभग ₹40,000 करोड़ खर्च किए जाएंगे। पहले चरण में 17 किलोमीटर के नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर के लिए ₹17,780 करोड़ के टेंडर जारी किए गए हैं।
बेंगलुरु डेवलपमेंट अथॉरिटी ने शहर में एक टनल रोड और एलिवेटेड रोड बनाने की योजना भी पेश की है। यह सड़क हेब्बल जंक्शन से मेखरी सर्कल तक बनेगी और इसकी अनुमानित लागत लगभग ₹2,250 करोड़ बताई गई है।
राज्य में टेक्नोलॉजी रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए सरकार एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी स्थापित करेगी। यह दो सेंटर इंस्टिट्यूट ऑफ बायोइन्फॉर्मेटिक्स एंड एप्लाइड बायोटेक्नोलॉजी, सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलिक्यूलर प्लेटफॉर्म्स और NASSCOM के सहयोग से बनाए जाएंगे। इन पर कुल लगभग ₹16 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
सरकार ने वन्यजीव संरक्षण के लिए भी एक अहम कदम उठाया है। बैनरघट्टा बायोलॉजिकल पार्क में तेंदुओं के लिए एक पुनर्वास केंद्र बनाया जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग ₹5 करोड़ बताई गई है। इसका उद्देश्य शहर के आसपास पकड़े गए तेंदुओं को सुरक्षित स्थान पर रखना है।
कर्नाटक सरकार ने कर्नाटक वाटर सिक्योरिटी एंड रेजिलिएंस प्रोग्राम (KWSRP) के तहत बेंगलुरु में बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए नई परियोजनाएं शुरू करने का फैसला किया है। विश्व बैंक के सहयोग से अगले पांच वर्षों में लगभग ₹5,000 करोड़ के प्रोजेक्ट चलाए जाएंगे।
सरकार ने बताया कि आबकारी विभाग में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ट्रांसफर प्रक्रिया को डिजिटल काउंसलिंग के जरिए किया जा रहा है। फिलहाल ग्रुप-C अधिकारियों जैसे एक्साइज इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर और कॉन्स्टेबल के ट्रांसफर इस सिस्टम से हो रहे हैं। आगे इसे डिप्टी सुपरिंटेंडेंट और सुपरिंटेंडेंट स्तर तक भी बढ़ाया जाएगा।
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि हज यात्रियों की सुविधा के लिए हुबली और कलबुर्गी में नए हज भवन बनाए जाएंगे, ताकि यात्रा से जुड़ी तैयारियां और व्यवस्थाएं बेहतर हो सकें। प्रमुख व्यावसायिक इलाकों में मौजूद वक्फ संपत्तियों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। राज्य की सभी ग्राम पंचायतों का नाम बदलकर अब “महात्मा गांधी ग्राम पंचायत” रखा जाएगा।
Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.