सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को TDS स जुड़ी एक याचिका को खारिज कर दिया है। इस याचिका में मांग की गई थी कि सरकार को खरीदारों को TDS नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए एक ठोस सिस्टम बनाना चाहिए। इस याचिका में कहा गया था कि 50 लाख रुपये से ज्यादा की प्रॉपर्टी खरीदने पर टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स के नियम की जानकारी देने का कोई सिस्टम नहीं है। इस वजह से आम लोगों को परेशानी होती है। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया।
न्यूज एजेंसी भाषा में छपी खबर के मुताबिक, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने याचिका पर संक्षिप्त आदेश पारित करते हुए कहा कि खारिज की जाती है। बता दें कि जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की।
याचिका में दावा किया गया था कि जानकारी नहीं होने की वजह से कई ईमानदार खरीदार अनजाने में गलती कर बैठते हैं। बाद में उन्हें बिना किसी गलत इरादे के भी जुर्माना और ब्याज देना पड़ता है। बेंच ने याचिका को सुनने से इनकार करते हुए इसे खारिज कर दिया।
याचिका कर्ता ने दी यह दलीलें
याचिकाकर्ता ने कोर्ट में कहा कि यह मामला 50 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति के सौदों में आयकर कानून के एक नियम को लागू करने से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में टीडीएस की पूरी जिम्मेदारी केवल खरीदार पर डाल दी जाती है। 50 लाख रुपये से अधिक मूल्य की अचल संपत्ति की खरीद पर खरीदार को एक प्रतिशत TDS काटकर सरकार के पास जमा करना होता है। लेकिन लोगों को इस बारे में कई जानकारी नहीं होती है। याचिकाकर्ता के अनुसार प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के समय इसकी जांच का कोई सरकारी सिस्टम ही नहीं है।
याचिकाकर्ता ने अपना निजी मामला बताते हुए कहा कि वह पहली बार घर खरीद रहे थे और उन्हें इस नियम की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि इससे यह पता चलता है कि यह एक सिस्टम से जुड़ी समस्या है। कई खरीदार बिना टीडीएस जांच के ही रजिस्ट्रेशन पूरा कर लेते हैं।
लोगों को भरना पडता है जुर्माना
याचिकाकर्ता ने कहा कि जानकारी नहीं होने की वजह से बाद में लोगों को जुर्माना और ब्याज भरना पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह टैक्स देनदारी या आयकर अधिनियम के प्रावधानों की वैधता को चुनौती नहीं दे रहे हैं, बल्कि केवल संस्थागत सुरक्षा उपायों के लिए सीमित निर्देश चाहते हैं। याचिकाकर्ता के मुताबिक, अगर ऐसे उपाय कर दिए जाते हैं तो नागरिकों की सुरक्षा होगी, स्वैच्छिक अनुपालन बढ़ेगा और सरकार के राजस्व में भी इजाफा होगा।