
Tamil Nadu SIR: इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया (Election Commission of India - ECI) ने सोमवार को तमिलनाडु के लिए फाइनल स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (Special Intensive Revision - SIR) जारी कर दी है। इस लिस्ट के मुताबिक, 74 लाख से ज़्यादा वोटर्स के नाम काट दिए गए हैं। शुरुआती दौर में यहां वोटर लिस्ट में 6,41,14,587 वोटर रजिस्टर थे। लेकिन SIR के बाद, कुल वोटरों की संख्या घटकर 5,67,07,380 हो गई। इस तरह से कुल 74 लाख मतदाताओं के नाम आखिरी मतदाता सूची से बाहर कर दिए गए हैं।
वोटर लिस्ट में राज्य के वोटरों की डेमोग्राफिक प्रोफ़ाइल के बारे में भी जानकारी दी गई है। लगभग 12.51 लाख वोटर 18-19 साल के हैं। पहली बार वोट देने वाले युवाओं की एक बड़ी संख्या है। इसके अलावा, 4.63 लाख वोटर दिव्यांग लोगों के तौर पर रजिस्टर्ड हैं, जबकि लगभग 3.99 लाख वोटर 85 साल से ज़्यादा उम्र के सीनियर सिटिज़न्स हैं।
चुनाव अधिकारियों के अनुसार हटाए गए नामों में बड़ी संख्या उन मतदाताओं की है जिनका निधन हो चुका है। इसके अलावा स्थान परिवर्तन, दोहरी प्रविष्टि, अधूरी जानकारी या दस्तावेजों की कमी जैसे कारण भी सामने आए हैं। कुल मिलाकर 74 लाख नाम कई प्रशासनिक कारणों से सूची से हटाए गए हैं।
रिवीजन से पहले, 6.41 करोड़ से ज़्यादा वोटर एनरोल थे। घर-घर जाकर वेरिफिकेशन और स्क्रूटनी के बाद 27.53 लाख नए एलिजिबल वोटर जोड़े गए। 4.23 लाख इनएलिजिबल नाम हटाए गए। 19 दिसंबर, 2025 और 30 जनवरी, 2026 के बीच मिले क्लेम और ऑब्जेक्शन को देखने के बाद फाइनल रोल तैयार किया गया है।
सबसे ज्यादा वोटर्स वाला चुनाव क्षेत्र शोलिंगनल्लूर (चेंगलपट्टू ज़िला) है, जहाँ 5.36 लाख से ज़्यादा वोटर्स हैं।
सबसे कम वोटर्स हार्बर चुनाव क्षेत्र (चेन्नई ज़ला) में हैं, जहाँ लगभग 1.16 लाख वोटर्स हैं। दूसरा सबसे कम एगमोर (चेन्नई) है, जहाँ लगभग 1.34 लाख वोटर्स हैं।
जिलों के हिसाब से अगर नजर दौड़ाएं तो चेन्नई, कोयंबटूर, सलेम, तिरुवल्लूर और चेंगलपट्टू में वोटर्स की आबादी सबसे ज्यादा है।
चुनाव आयोग ने पुनर्विचार प्रक्रिया में 30 जनवरी के निर्देश का भी पालन किया गया, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार जारी किया गया था। इसमें यह अनिवार्य किया गया था कि कॉन्ट्रोवर्सी या असंगत जानकारी के कारण नामों को हटाने के कारणों के साथ सार्वजनिक रूप से जारी किए जाएंगे। ये लिस्ट ग्राम पंचायत कार्यालयों, सार्वजनिक स्थानों, ब्लॉक और सब डिवीजन कार्यालयों और शहरी क्षेत्रों में वार्ड कार्यालयों में जारी की गई।
SIR प्रक्रिया के तहत प्रभावित व्यक्तियों को आपत्तियां दर्ज करने या स्पष्टीकरण के लिए 10 दिन का समय दिया गया है। एसआईआर से पहले राज्य में मतदाताओं की संख्या 6.41 करोड़ थी। इस बीच, एसआईआर के दूसरे चरण के दौरान 9 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 8 फीसदी मतदाताओं को मतदाता सूची से हटा दिया गया। 14 फरवरी को प्रकाशित पुडुचेरी की अंतिम मतदाता सूची में कुल 9,44,211 मतदाता दर्ज किए गए।
वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन कहा जाता है। यह काम चुनाव आयोग की ओर से किया जाता है। इसे कभी छोटे तो कभी बड़े लेवल पर किया जाता रहा है। इस प्रोसेस में 18 साल से ज्यादा के नए वोटर्स को जोड़ा जाता है। चुनाव आयोग ने 1951 से लेकर 2004 तक करीब 8 बार SIR करा चुका है। आखिरी बार SIR 21 साल पहले 2002 से लेकर 2004 में पूरा किया गया था।
SIR का पहला मकसद विदेशी अवैध प्रवासियों के जन्म स्थान की जांच करके उन्हें बाहर निकालना है। यह कदम बांग्लादेश और म्यांमार समेत कई राज्यों में अवैध प्रवासियों पर कार्रवाई के मद्देनजर महत्वपूर्ण है। बिहार के बाद बाकी राज्यों SIR कराने से फेक वोटर्स और फर्जीवाड़े के मामले सामने आएंगे। इससे सिस्टम में ट्रांसपिरेंसी आएगी। फाइनल SIR कट-ऑफ डेट के रूप में काम करेगी, ठीक उसी तरह जैसे बिहार की 2003 की वोटर लिस्ट का इस्तेमाल चुनाव आयोग ने SIR के लिए किया था। ज्यादातर राज्यों में वोटर लिस्ट का अंतिम बार SIR 2002 और 2004 के बीच हुआ था। दिल्ली में 2008 में और इससे पहले उत्तराखंड में 2006 में SIR हुआ था।
बीएलओ आपके घर आएं तो परिवार के सदस्यों के आधार कार्ड, उम्र सर्टिफिकेट और निवास प्रमाण पत्र होना जरूरी है। इसके अलावा अगर आपके परिवार में किसी सदस्य की उम्र 18 साल हो गई है, तो उसका नाम मतदाता सूची में जोड़ा जा सकता है। अगर परिवार का सदस्य किसी अन्य जगह शिफ्ट हो गया है, तो उसका नाम हटाकर नई जगह जोड़ा जा सकता है। इसके अलावा आपके वोटर आईडी में फोटो पुरानी या धुंधली हो चुकी है, तो उसे साफ फोटो देकर हटवा सकते है।
SIR प्रक्रिया के तहत बूथ लेवल ऑफिसर घर-घर जाकर मतदाता सूची में दर्ज व्यक्ति के बारे में जांच करते हैं। इसके जरिए पता लगाया जाता है कि दर्ज व्यक्ति अभी वहां रहता है या नहीं। वहीं अगर किसी मतदाता की मृत्यु हो जाती है तो उनका नाम हटाया जाता है। इसके अलावा नाम, उम्र, खराब क्वालिटी वाली फोटो और एड्रेस की गड़बड़ी को इस अभियान के साथ ठीक किया जाता है।
SIR के दौरान अपनी आइडेंटिटी और रेजिडेंशियल एड्रेस प्रूफ दिखाना होता है। इसमें आधार कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, राशन कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, बिजली-पानी या गैस का बिल, बैंक पासबुक, मनरेगा जॉब कार्ड और 2002 की वोटर लिस्ट की प्रति को मान्य दस्तावेज माना जाएगा। ये सभी कागजात व्यक्ति की पहचान और स्थायी पते की पुष्टि के लिए जरूरी होंगे।
जिन लोगों का नाम 2002 की लिस्ट में है, उन्हें सिर्फ फॉर्म और उसके साथ 2002 की लिस्ट का प्रिंटआउट जमा करना होगा। इसके सिवाय कोई और डॉक्यूमेंट देने की जरूरत नहीं होगी। अगर किसी वोटर का नाम 2002 की वोटर लिस्ट में नहीं है, लेकिन उसके माता-पिता का नाम इस लिस्ट में है, तो उसे काउंटिंग फॉर्म के साथ आईडी प्रूफ और अपने 2002 की लिस्ट में दर्ज माता-पिता के नाम का सर्टिफिकेट पेश करना होगा।
सिर्फ डॉक्यूमेंट्स नहीं दिखाने पर वोटर लिस्ट से नाम नहीं हटेगा। BLO वोटर से संपर्क करेगा। अगर व्यक्ति की पहचान और स्थायी निवास की पुष्टि नहीं हो पाती है, तभी नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में चुनाव आयोग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। आयोग का कहना है कि ये पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है और हर वोटर को डॉक्यूमेंट दिखाने का पूरा मौका मिलेगा।
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