
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्रियों लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के बड़े पुत्र तेज प्रताप यादव ने मकर संक्रांति की पूर्व संध्या पर बिहार की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। एक तरफ उन्होंने उप-मुख्यमंत्री विजय सिन्हा के दही-चूड़ा भोज कार्यक्रम में शामिल होकर अटकलों का बाजार गर्म कर दिया तो दूसरी तरफ वो महीनों बाद माता-पिता और भाई तेजस्वी यादव से मिलकर अपने यहां आयोजित होने वाले भोज में शामिल होने का न्योता भी दे आए। तेजस्वी यादव को बिहार विधानसभा चुनाव से पहले परिवार और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से निष्कासित कर दिया था। लालू प्रसाद यादव आरजेडी के प्रमुख हैं। उन्होंने ही बड़े बेटे को परिवार और पार्टी से बाहर करन के निर्णय लिया था।
बिहार के पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने मंगलवार को पटना में वरिष्ठ भाजपा नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के चूड़ा-दही भोज में हिस्सा लिया। इससे उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गईं। सिन्हा ने मकर संक्रांति के अवसर पर और अशुभ खरमास माह की समाप्ति के उपलक्ष्य में अपने सरकारी आवास पर चूड़ा-दही भोज का आयोजन किया था। इस भोज में बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के कई नेता और तेज प्रताप यादव उपस्थित थे।
दूसरी तरफ, तेज प्रताप ने मंगलवार को ही अपने माता-पिता और भाई से भी मुलाकात कर ली। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए बताया कि उन्होंने अपने-माता पिता और भाई से मिलकर दही-चूड़ा भोज कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता दिया है।
तेज प्रताप यादव पर सबकी निगाहें टिकी थीं, जिन्होंने हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनाव से पहले अपनी पार्टी जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) का गठन किया था। अपनी गर्लफ्रेंड अनुष्का यादव के साथ संबंध और शादी की खबरों को लेकर विवाद के बाद लालू प्रसाद ने पिछले साल उन्हें राजद से निष्कासित कर दिया था और यह भी घोषणा की थी कि उनके परिवार का तेज प्रताप से अब कोई संबंध नहीं है। इसके बाद तेज प्रताप ने पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में राजद के खिलाफ अपनी पार्टी के उम्मीदवार भी उतारे थे।
बिहार चुनाव में तेज प्रताप सहित उनकी पार्टी का कोई भी उम्मीदवार जीत हासिल नहीं कर सका, लेकिन एक दूरगामी राजनीतिक प्रभाव वाले कदम के तहत, विधानसभा चुनाव के बाद तेज प्रताप ने नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली राजग सरकार को नैतिक समर्थन देने की घोषणा की थी। उनके छोटे भाई तेजस्वी प्रसाद यादव के बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष होते हुए भी यह घोषणा कुछ अलग राजनीतिक संकेत दे रही थी। इसके बाद राजग नेताओं के साथ तेज प्रताप की नजदीकियों ने उनके बदले हुए तेवर की तरफ इशारा किया और भाजपा से उनकी नजदीकियों की अटकलें तेज होने लगीं।
बिहार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव और एससी/एसटी कल्याण मंत्री संतोष कुमार सुमन सहित कई राजग नेताओं ने भविष्य में तेज प्रताप के उनके खेमे में शामिल होने की संभावना को हवा दे दी। भाजपा नेता राम कृपाल यादव ने कहा कि यदि तेज प्रताप राजग में शामिल होते हैं तो यह बेहतर होगा। इसी तरह की राय हम (सेक्युलर) नेता और बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने भी व्यक्त की। वहीं, तेज प्रताप यादव ने खुद अटकलों को बनाए रखने की कोशिश करते हुए कहा, 'भविष्य ही बताएगा कि आगे क्या होने वाला है।' मीडिया के बार-बार पूछे जाने पर मुस्कुराते हुए उन्होंने कहा, 'देखते हैं आगे क्या होता है।' बहरहाल, तेज प्रताप यादव ने राजग और विपक्षी महागठबंधन के कई नेताओं से मिलकर उन्हें अपने यहां आयोजित होने वाले दही-चूड़ा भोज कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता दिया
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