
West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों एक नया घटनाक्रम चर्चा का विषय बना हुआ है। राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा विभिन्न जिलों में आयोजित प्रशासनिक समीक्षा बैठकों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई नेता और जनप्रतिनिधि शामिल होते दिखाई दिए हैं। कल्याणी से लेकर सिलीगुड़ी तक आयोजित इन बैठकों में TMC नेताओं की मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल प्रशासनिक समन्वय तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और विपक्षी दलों के भीतर बढ़ते असंतोष के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
हाल के दिनों में सीएम शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में प्रशासनिक समीक्षा बैठकें आयोजित कीं। इन बैठकों का मकसद विकास कार्यों, सरकारी योजनाओं और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली की समीक्षा करना बताया गया। लेकिन राजनीतिक हलकों में चर्चा तब तेज हो गई जब इन बैठकों में कई TMC विधायक, सांसद और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी नजर आए। विशेष रूप से कल्याणी, बारासात, मालदा, कूचबिहार और सिलीगुड़ी क्षेत्र में हुई बैठकों में विपक्षी नेताओं की उपस्थिति ने राजनीतिक महत्व हासिल कर लिया। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस तरह का दृश्य लंबे समय बाद देखने को मिला है।
सबसे अधिक चर्चा TMC सांसद काकोली घोष दस्तीदार की मौजूदगी को लेकर हुई। बारासात की सांसद काकोली घोष मुख्यमंत्री की एक प्रशासनिक बैठक में शामिल हुईं। इसके अगले ही दिन उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया। हालांकि उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और सांसद पद नहीं छोड़ा, लेकिन उनके इस कदम ने राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए। विपक्षी दलों ने इसे TMC के भीतर बढ़ते असंतोष का संकेत बताया, जबकि तृणमूल नेतृत्व ने इसे व्यक्तिगत निर्णय करार दिया।
भाजपा सरकार का कहना है कि प्रशासनिक बैठकें राजनीतिक नहीं बल्कि विकास और जनहित से जुड़ी होती हैं। राज्य सरकार का दावा है कि जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र के विकास कार्यों और योजनाओं की समीक्षा बैठकों में शामिल होने का अधिकार है, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से संबंधित हों। सरकारी सूत्रों के अनुसार इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई, पेयजल, शहरी विकास और ग्रामीण योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करना है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद TMC लगातार संगठनात्मक पुनर्गठन की प्रक्रिया से गुजर रही है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने हाल के महीनों में नेतृत्व शैली, रणनीति और संगठनात्मक फैसलों को लेकर नाराजगी जाहिर की है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनावी हार के बाद पार्टी के कई नेता अपने राजनीतिक भविष्य और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर चिंतित हैं। ऐसे में प्रशासनिक बैठकों में उनकी मौजूदगी को केवल औपचारिक प्रक्रिया मानना आसान नहीं है। हालांकि पार्टी नेतृत्व सार्वजनिक रूप से किसी बड़े मतभेद से इनकार करता रहा है।
इन घटनाओं के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या कुछ TMC नेता भविष्य में भाजपा का दामन थाम सकते हैं? प्रशासनिक बैठक में शामिल होना सीधे तौर पर दल-बदल का प्रमाण नहीं माना जा सकता। लेकिन पश्चिम बंगाल की राजनीति के इतिहास को देखते हुए ऐसे घटनाक्रमों को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता है। पिछले वर्षों में कई बार देखा गया है कि राजनीतिक नेताओं के दल बदलने से पहले इसी तरह के संकेत सामने आते रहे हैं।
राज्य के सीएम शुभेंदु अधिकारी स्वयं कभी तृणमूल कांग्रेस के बड़े नेताओं में गिने जाते थे। भाजपा में आने के बाद उन्होंने पार्टी संगठन को मजबूत करने और विपक्षी नेताओं के साथ संवाद बनाए रखने की रणनीति अपनाई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रशासनिक बैठकों में विपक्षी नेताओं को आमंत्रित करना एक संदेश भी हो सकता है कि सरकार राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर विकास पर ध्यान देना चाहती है। दूसरी ओर विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव बनाने और विपक्षी खेमे में सेंध लगाने की कोशिश के रूप में भी देख रहा है।
उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी से लेकर दक्षिण बंगाल के कल्याणी तक आयोजित बैठकों में TMC नेताओं की मौजूदगी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य की राजनीति अभी भी संक्रमण के दौर से गुजर रही है। कई राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले महीनों में स्थानीय निकायों और संगठनात्मक ढांचे में बदलाव के साथ राजनीतिक समीकरण और तेजी से बदल सकते हैं।
राजनीतिक दल अभी से अगले लोकसभा चुनाव और स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारी में जुट गए हैं। ऐसे में हर राजनीतिक गतिविधि को चुनावी रणनीति के नजरिए से देखा जा रहा है। भाजपा राज्य में राजनीतिक जमीन तलाश रही है। वहीं TMC अपनी संगठनात्मक ताकत को फिर से खड़ा करने की कोशिश में जुटी हुई है। इसी वजह से विपक्षी नेताओं की प्रशासनिक बैठकों में मौजूदगी को सामान्य घटना नहीं माना जा रहा।
Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.
Oops! Looks like you have exceeded the limit to bookmark the image. Remove some to bookmark this image.