Ultra-Processed Foods Dangers: दुनिया भर में सेहत को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। इसी बीच, एक नई स्टडी में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। हेल्थ जर्नल 'द लैंसेट' के अनुसार, भारत में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (UPF) की बिक्री सबसे तेज रफ्तार से बढ़ रही है। इसकी वजह से देश में मोटापे और डायबिटीज जैसी बीमारियों के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है, जिससे लोगों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है।
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड ऐसे खाद्य उत्पादों को कहते हैं, जिनमें फैट, शुगर और/या नमक (HFSS) बहुत ज्यादा होते हैं। इनमें स्टेबलाइजर, इमल्सीफायर, कलरेंट और फ्लेवरिंग जैसे कॉस्मेटिक एडिटिव्स भी हानिकारक मात्रा में भरे होते हैं। ये फूड आइटम मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज, दिल की बीमारी, डिप्रेशन और समय से पहले मौत के बढ़े हुए खतरे से सीधे तौर पर जुड़े हैं।
40 गुना बढ़ी बिक्री, 38 अरब डॉलर तक पहुंचा आंकड़ा
दुनिया भर के 43 लेखकों के लिखे पत्रों से पता चला है कि भारत में यूपीएफ की खुदरा बिक्री 2006 में महज़ 0.9 अरब डॉलर थी, जो 2019 में बढ़कर लगभग 38 अरब डॉलर हो गई। यह लगभग चालीस गुना की भारी बढ़ोतरी है। आजकल रिटेल स्टोर्स की शेल्फ पर नमकीन, नूडल्स, बिस्किट, मीठे ड्रिंक्स, चिप्स और ब्रेकफास्ट सीरियल्स जैसे पैक्ड फूड और ड्रिंक प्रोडक्ट्स का दबदबा है। कंपनियां विज्ञापनों के जरिए बच्चों और युवाओं को इन प्रोडक्ट्स को खरीदने के लिए लगातार प्रभावित कर रही हैं।
मोटापा और मधुमेह के मामलों में भारी उछाल
इस स्टडी से पता चला है कि देश में मोटापे के मामलों में दोगुना उछाल आया है। पुरुषों में मोटापा 12% से बढ़कर 23% तक पहुंच गया है, वहीं महिलाओं में यह आंकड़ा 15% से लगभग 24% तक हो गया है। इस श्रृंखला के पत्रों में यूपीएफ कंपनियों के आक्रामक मार्केटिंग और विज्ञापन कैंपेन पर रोशनी डाली गई है, जिनका इस्तेमाल वे खपत बढ़ाने के लिए करते हैं।
सरकार से तुरंत एक्शन लेने की मांग
इस सीरीज के पत्रों के सह-लेखक और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण गुप्ता ने कहा, 'हमारे मौजूदा नियम मार्केटिंग पर रोक लगाने में प्रभावी नहीं हैं। भारत को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए और यूपीएफ की खपत को कम करना चाहिए, ताकि आने वाले सालों में मोटापे और मधुमेह (Obesity and Diabetes) को रोका जा सके।' उन्होंने आगे कहा कि चूंकि भारत यूपीएफ की बिक्री वृद्धि में सबसे तेज है और खराब स्वास्थ्य परिणामों के सबूत भी हैं, इसलिए भारत को यूपीएफ को एक प्राथमिकता वाला स्वास्थ्य मुद्दा मानना चाहिए।
विज्ञापन और सेलिब्रेटी एंडोर्समेंट पर लगे बैन
लेखकों ने यूपीएफ से निपटने और दुनिया भर में डाइट सुधारने के लिए निर्णायक पब्लिक हेल्थ एक्शन की मांग की है। उन्होंने कहा कि कंज्यूमर बिहेवियर बदलने पर निर्भर रहने के बजाय यूपीएफ के उत्पादन, मार्केटिंग और खपत को कम करने के साथ-साथ हेल्दी फूड तक लोगों की पहुंच सुधारने के लिए समन्वित नीतियों की जरूरत है।
PHFI यूनिवर्सिटी ऑफ पब्लिक हेल्थ साइंसेज के चांसलर प्रोफेसर श्रीनाथ रेड्डी ने कहा, 'भारत को उनके प्रॉडक्शन, मार्केटिंग और उनके घटकों के सार्वजनिक खुलासे के लिए कड़े नियामक उपाय अपनाने चाहिए। पैक के सामने वार्निंग लेबल पर उपभोक्ताओं को नमक, चीनी और फैट के हानिकारक स्तरों के बारे में साफ-साफ बताना चाहिए।'
उन्होंने आगे कहा, 'UPF का विज्ञापन एक लत की तरह करने से कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। इनके विज्ञापन और स्पॉन्सरशिप पर बैन लगाने की जरूरत है, खासकर सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट के बढ़ते खतरे के कारण यह बहुत जरूरी हो गया है।'