जब तक किसी को फांसी न दी जा रही हो, तब तक केस तुरंत लिस्ट नहीं होगा: जस्टिस सूर्यकांत

आपको पता भी है कि हम कितने घंटे काम करते हैं और कितने घंटे आराम? वकील ने एक मामले पर तुरंत सुनवाई करने की जिद्द की तो सुप्रीम कोर्ट के जज ने यह पूछ डाला।

एडिटेड बाय Naveen Kumar Pandey( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
पब्लिश्ड25 Sep 2025, 06:44 AM IST
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस सूर्यकांत।
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस सूर्यकांत।(HT)

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि वह उस समय तक किसी मामले को उसी दिन तत्काल सूचीबद्ध करने का आदेश नहीं देंगे, जब तक कि किसी को फांसी न दी जा रही हो। इसके साथ ही उन्होंने पूछा कि क्या कोई जजों के हालात समझता है और यह जानता है कि वे कितने घंटे काम करते हैं और कितने घंटे सो पाते हैं?

वकील ने की तुरंत सुनवाई की अपील

जस्टिस सूर्यकांत उस पीठ का नेतृत्व कर रहे थे, जो तत्काल सुनवाई के लिए मामलों को लिस्ट करने पर विचार कर रही थी। पीठ में न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह भी शामिल थे। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने यह टिप्पणी उस समय की, जब अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने उल्लेख किया कि राजस्थान में एक आवासीय मकान की आज नीलामी होगी और इसलिए मामले को आज ही सूचीबद्ध किया जाएगा।

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जब तक फांसी न हो... जस्टिस सूर्यकांत का क्लियर कट मेसेज

इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, 'जब तक किसी को फांसी नहीं होने वाली हो, मैं किसी भी मामले को उसी दिन सूचीबद्ध नहीं करूंगा। आप लोग न्यायाधीशों की स्थिति नहीं समझते, क्या आपको पता भी है कि वे कितने घंटे काम करते हैं और कितने घंटे सोते हैं? जब तक किसी की स्वतंत्रता दांव पर न लगी हो, हम उसे उसी दिन लिस्ट नहीं करेंगे।'

पहले तो नकारा, फिर दिखाया नरम दिल

गुप्ता के लगातार आग्रह करने पर जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा कि नीलामी नोटिस कब जारी किया गया था। उन्होंने जवाब दिया कि नीलामी नोटिस पिछले सप्ताह जारी किया गया था और बकाया राशि के रूप में एक निश्चित राशि का भुगतान पहले ही किया जा चुका है। न्यायमूर्ति कांत ने गुप्ता से कहा कि अगले कुछ महीनों तक मामले की सुनवाई की उम्मीद न करें। हालांकि, बाद में उन्होंने कोर्ट मास्टर से मामले को शुक्रवार को लिस्ट करने को कह दिया।

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तुरंत लिस्टिंग के मामलों की सीजेआई करते हैं सुनवाई

भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई आमतौर पर ऐसे मामलों की सुनवाई करते हैं। वह पांच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ में बैठते हैं। प्रक्रिया के अनुसार यदि प्रधान न्यायाधीश किसी संवैधानिक पीठ के मामले में व्यस्त हों या अस्वस्थ हों तो दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश मामलों को सूचीबद्ध करने पर सुनवाई करते हैं।

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