कुंवारा भाई भी अनुकंपा पर नौकरी पाने का हकदार… इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला

Compassionate employment: भाई कुंवारा है तो उसे भी अनुकंपा पर नौकरी मिल सकती है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह आदेश देते हुए सिर्फ इतनी शर्त रखी कि सर्विस के दौरान मृत्यु हो गई और उसकी पत्नी की मौत पहले ही हो चुकी थी तो अविवाहित भाई नौकरी का हकदार होगा। 

Naveen Kumar Pandey( विद इनपुट्स फ्रॉम वार्ता)
अपडेटेड6 Nov 2025, 10:34 PM IST
विधुर की मृत्यु पर कुंवारा भाई अनुकंपा पर नौकरी पाने का हकदार: इलाहाबाद हाई कोर्ट। (सांकेतिक तस्वीर)
विधुर की मृत्यु पर कुंवारा भाई अनुकंपा पर नौकरी पाने का हकदार: इलाहाबाद हाई कोर्ट। (सांकेतिक तस्वीर)(Mint)

Job on compassionate ground: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने सर्विस केस में एक अहम फैसला दिया है। हाई कोर्ट ने कहा कि अगर किसी कर्मचारी की पत्नी का उसके पहले निधन हो गया हो तो कर्मचारी का भाई भी अनुकंपा नियुक्ति पाने का हकदार है। इसमें संबंधित नियम का प्रतिबंध लागू नहीं होगा।

विभाग ने ठुकराई थी अनुकंपा पर नौकरी देने की मांग

न्यायमूर्ति मनीष माथुर की एकल पीठ ने यह फैसला विधिक माप विज्ञान, फैजाबाद रेंज के मृतक कर्मचारी के अविवाहित भाई देवेंद्र प्रताप सिंह की याचिका को मंजूर करके दिया। याची ने 25 मई, 2016 के उस विभागीय आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उसकी अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करने की अर्जी खारिज कर दी गई थी। याची ने मृतक भाई की जगह अनुकंपा नियुक्ति देने की गुजारिश की थी।

यह भी पढ़ें | धर्म-प्रचार की स्वतंत्रता में धर्मांतरण करवाने की आजादी नहीं... SC पहुंचा संगठन

अब हाई कोर्ट के आदेश से मिलेगी नौकरी

फैसले के मुताबिक सरकारी कर्मचारी, याची के बड़े भाई महेंद्र प्रताप सिंह की 9 अक्तूबर, 2015 को सेवाकाल में मृत्यु हो गई थी। उनकी पत्नी की भी उनके पहले 12 फरवरी, 2010 को मृत्यु हो चुकी थी। ऐसे में याची ने खुद को मृताई आश्रित होने का दावा करते हुए एकमात्र रोजी रोटी कमाने वाला कहा है। विभागीय अफसरों ने याची का दावा महज नियमों के तहत इस आधार पर खारिज कर दिया क्योंकि मृतक कर्मचारी विवाहित था। इसलिए याची अनुकंपा नियुक्ति का हकदार नहीं है।

यह भी पढ़ें | गैंगरेप की कथित पीड़िता से मुआवजे की रकम वसूली का आदेश, आरोपी भी हुए बरी

याची की मांग पर फिर से विचार करेगा विभाग

कोर्ट ने कहा कि इस आधार पर याची का दावा खारिज किया जाना ठहराने योग्य नहीं है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने याची का दावा खारिज करने वाले 25 मई, 2016 के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही फैजाबाद रेंज के विधिक माप विज्ञान के सहायक नियंत्रक को निर्देश दिया कि याची की अनुकंपा नियुक्ति की अर्जी पर छह सप्ताह में फिर से विचार कर निर्णय लें, अगर याची अपने भाई का आश्रित होना साबित कर सके।

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

बिजनेस न्यूज़न्यूज़कुंवारा भाई भी अनुकंपा पर नौकरी पाने का हकदार… इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला
More
बिजनेस न्यूज़न्यूज़कुंवारा भाई भी अनुकंपा पर नौकरी पाने का हकदार… इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला