Unnao Rape Case: उन्नाव रेप केस मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सेंगर की जमानत को हरी झंडी दिखा दी थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। CBI ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला पलट दिया है। कुलदीप सेंगर को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। जमानत के खिलाफ CBI ने सुप्रीम कोर्ट में 3 दिन पहले याचिका लगाई थी।
सोमवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच में सुनवाई हुई। बेंच ने दोनों पक्षों की करीब 40 मिनट तक दलीलें सुनीं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि सेंगर को रिहा न किया जाए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव रेप केस के आरोपी कुलदीप सेंगर को नोटिस जारी किया है।
सेंगर को यह नोटिस सीबीआई की अर्जी पर दिया गया है। सेंगर से चार हफ्ते में जवाब मांगा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें 2017 के उन्नाव रेप केस में एक नाबालिग लड़की के साथ रेप के मामले में बीजेपी से निकाले गए नेता कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सज़ा को सस्पेंड कर दिया गया था।
CBI ने दी दलील
सीबीआई की ओर से एसजी तुषार मेहता ने कहा कि बहुत ही भयानक रेप नाबालिग का हुआ और हाईकोर्ट ने आईपीसी के सेक्शन 376 और पॉक्सो के सेक्शन 5 पर गौर नहीं किया। इस पर जस्टिस जेके महेश्वरी ने बताया कि सेक्शन 376 पर विचार किया जा चुका है। एसजी मेहता ने कहा कि हाईकोर्ट ने कई पहलुओं पर गौर नहीं किया जबकि यह नाबालिग पीड़िता का मामला है।
एसजी तुषार मेहता ने कहा कि सेंगर को दो मामलों में दोषी करार दिया गया है और घटना के वक्त पीड़िता की आयु 16 साल से कम थी, वह 15 साल 10 महीने की थी और इस दोषसिद्धी के विरुद्ध अपील लंबित है। उन्होंने कहा कि दोषी करार देने की वजह स्पष्ट थी और यह रेप एक पब्लिक सर्वेंट ने किया और सीबीआई ने तथ्यों और सबूतों के साथ यह साबित भी किया।