जनरल नरवणे की कौन-सी किताब है जो छपी नहीं, लेकिन राहुल गांधी लोकसभा में उसे कोट करने पर अड़ गए

पूर्व भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की एक किताब अचानक से चर्चा में आ गई है। हालांकि, इसकी वजह इसका प्रकाशित होना नहीं, बल्कि इसका संसद में जिक्र है।

Ashutosh Kumar
पब्लिश्ड2 Feb 2026, 06:08 PM IST
मुकुंद नरवणे की किताब
मुकुंद नरवणे की किताब

पूर्व भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की एक किताब अचानक से चर्चा में आ गई है। हालांकि, इसकी वजह इसका प्रकाशित होना नहीं, बल्कि इसका संसद में जिक्र है। बता दें कि “Four Stars of Destiny” नाम की यह पुस्तक अभी तक छपी नहीं है, फिर भी राहुल गांधी ने लोकसभा में इसके अंशों को कोट करने की कोशिश की। इसी बात पर सदन में सवाल उठ गया कि क्या किसी अप्रकाशित और संवेदनशील सैन्य किताब को संसद के रिकॉर्ड में पढ़ा जा सकता है। मामला इतना बढ़ गया कि चर्चा बहस में बदली और फिर बहस हंगामे तक पहुंच गई, जिससे लोकसभा की कार्यवाही भी प्रभावित हुई।

क्या है पूरा मामला

मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने भाषण देना शुरू किया। इसी दौरान उन्होंने जनरल नरवणे की कथित अप्रकाशित पुस्तक का हवाला देते हुए कुछ पंक्तियां पढ़नी चाहीं। इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तुरंत आपत्ति जताई और कहा कि जो किताब अभी छपी ही नहीं है, उसे संसद में कोट नहीं किया जा सकता। राहुल गांधी इस दलील के बावजूद किताब का जिक्र करने पर अड़े रहे, जिससे सदन में विपक्ष और सरकार के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।

अमित शाह भी बहस में शामिल

हंगामा तब और बढ़ गया जब कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल राहुल गांधी के समर्थन में खड़े हो गए और सत्ता पक्ष की ओर से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी बहस में शामिल हो गए। राहुल गांधी ने सफाई दी कि उनका मकसद किताब को लेकर विवाद खड़ा करना नहीं, बल्कि बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या के बयान का जवाब देना था। तेजस्वी सूर्या ने यूपीए सरकार के दौर पर निशाना साधते हुए कहा था कि 2004 से 2014 के राष्ट्रपति अभिभाषणों में राष्ट्रप्रेम और भारतीय संस्कृति का जिक्र नहीं हुआ। राहुल गांधी इसी बयान के जवाब में भारत-चीन सीमा विवाद और मौजूदा नेतृत्व पर सवाल उठाना चाहते थे।

सदन की कार्यवाही तक स्थगित

हालात बिगड़ते देख लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कई बार राहुल गांधी को नियमों का हवाला देकर रोका। अध्यक्ष ने साफ कहा कि वह किसी को सलाह नहीं देंगे और अगर राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा नहीं करनी है, तो अगले वक्ता को बुलाया जाएगा। राहुल गांधी के लगातार अड़े रहने पर इसे आसन की अवमानना माना गया और अंततः सदन की कार्यवाही तीन बजे तक स्थगित कर दी गई। करीब 50 मिनट चले इस पूरे घटनाक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सदन में मौजूद रहे। यह विवाद दिखाता है कि एक अप्रकाशित किताब का हवाला भी संसद की कार्यवाही को किस हद तक प्रभावित कर सकता है।

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