UP Electricity Price Hike: उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को एक बार फिर झटका लगने वाला है। मार्च में जहां बिजली उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत मिली थी, वहीं अब अप्रैल आते ही फिर से जेब पर असर पड़ने वाला है। यूपी के लाखों उपभोक्ताओं के लिए यह खबर थोड़ी चिंता बढ़ाने वाली है, क्योंकि बिजली बिल में एक बार फिर बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
उत्तर प्रदेश में अप्रैल महीने से बिजली उपभोक्ताओं को फ्यूल सरचार्ज (ईंधन अधिभार शुल्क) में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ेगा। इस बार इसमें 2.14 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इसका सीधा मतलब यह है कि प्रदेश के करोड़ों उपभोक्ताओं पर करीब 142 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ने वाला है।
पावर कॉरपोरेशन के आदेश के मुताबिक, जनवरी 2026 के फ्यूल सरचार्ज को अब अप्रैल के बिलों में जोड़कर वसूला जाएगा। यानी जो राहत आपको मार्च में मिली थी, वह अब खत्म होने जा रही है।
मार्च की राहत अब बनी आफत
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि मार्च के महीने में फ्यूल सरचार्ज में 2.42 प्रतिशत की कमी की गई थी। उस वक्त जनता को करीब 141 करोड़ रुपये की राहत मिली थी, लेकिन अप्रैल आते-आते यह राहत गायब हो गई है। परिषद का कहना है कि जिस तरह से बार-बार सरचार्ज घटाया और बढ़ाया जा रहा है, उससे आम आदमी का बजट बिगड़ रहा है।
करोड़ों का सरप्लस फिर भी वसूली क्यों?
उपभोक्ता परिषद ने इस वसूली के फॉर्मूले पर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिषद का दावा है कि प्रदेश की बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का पहले से ही 51 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का 'सरप्लस' (अतिरिक्त पैसा) निकल रहा है। अवधेश वर्मा का कहना है कि जब इतना पैसा पहले से ही कंपनियों के पास है, तो हर महीने उपभोक्ताओं से सरचार्ज वसूलना पूरी तरह गलत है।
फॉर्मूले में पारदर्शिता की मांग
परिषद ने विद्युत नियामक आयोग से मांग की है कि इस पूरे फॉर्मूले की जांच की जाए। उनका आरोप है कि पावर कॉरपोरेशन जिस तरीके से बिलिंग और सरचार्ज की गणना कर रहा है, उसमें पारदर्शिता की कमी है और यह उपभोक्ताओं के हक में नहीं है। परिषद का कहना है कि वे इस 'अनावश्यक आर्थिक बोझ' के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
कुल मिलाकर, अप्रैल में बिजली बिल बढ़ना तय माना जा रहा है। अब देखना होगा कि इस पर कोई राहत मिलती है या फिर उपभोक्ताओं को एक बार फिर ज्यादा भुगतान करना पड़ेगा।