यूपी में सीएम योगी आदित्यनाथ ने राज्य को अवैध घुसपैठियों के जाल से मुक्त करने के लिए अब तक का सबसे व्यापक और हाईटेक अभियान शुरू कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, SIR (Special Intensive Revision) सर्वे के जरिए न केवल घुसपैठियों की पहचान होगी बल्कि पहली बार एक ऐसा मजबूत डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है जिसे देश की सभी सुरक्षा एजेंसियों से साझा किया जाएगा। इस डेटाबेस में हर संदिग्ध व्यक्ति का बायोमेट्रिक डेटा, फेशियल रिकॉग्निशन, आईरिस स्कैन, पारिवारिक रिकॉर्ड और उनकी पूरी मूवमेंट हिस्ट्री दर्ज की जाएगी। सरकार का दावा है कि एक बार नाम नेगेटिव लिस्ट में आ गया तो वह व्यक्ति आधार, पैन, सिम, बैंक अकाउंट या किसी भी पहचान पत्र के लिए हमेशा के लिए अयोग्य हो जाएगा।
दो दशक पुराने नेटवर्क की टूटेगी कमर
सूत्र बताते हैं कि पिछले 20 वर्षों में अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों ने फर्जी पहचान पत्रों के सहारे शहर-दर-शहर अपनी पहचान बदलकर नेटवर्क खड़ा किया। पकड़े जाने पर वे तुरंत दूसरी जगह नई पहचान बनाकर बस जाते थे। यह पूरी श्रृंखला फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोहों की मदद से चलती थी। योगी सरकार का नया मास्टर प्लान इसी नेटवर्क को जड़ से तोड़ने पर केंद्रित है। जांच टीमों को पकड़े गए संदिग्धों से यह जानकारी जुटाने का निर्देश दिया गया है कि किसने फर्जी आईडी बनाई, कौन पूरा नेटवर्क संचालित करता है, किस क्षेत्र में छिपना आसान था और कौन से लोग इस अवैध धंधे में शामिल हैं।
17 नगर निगमों में बनेंगे अस्थायी डिटेंशन सेंटर
यूपी सरकार ने सभी 17 नगर निगमों को निर्देश दिए हैं कि एक-एक रैन बसेरे को अस्थायी डिटेंशन सेंटर में बदला जाए। पकड़े गए अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को संबंधित मंडल के डिटेंशन सेंटर में रखा जाएगा। इससे मॉनिटरिंग आसान होगी और फरारी की किसी भी संभावना पर रोक लगेगी। गोरखपुर में तीन मंजिला डिटेंशन सेंटर तैयार हो चुका है जिसमें 50 बेड और 16 कमरे बनाए गए हैं। एक केयरटेकर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यहां सुरक्षा इतनी कड़ी है कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता।
जिलों की रिपोर्ट रोज पहुंचेगी लखनऊ
मुख्यमंत्री कार्यालय राज्य के 75 जिलों में चल रहे SIR सर्वे की प्रगति सीधे मॉनिटर कर रहा है। लखनऊ में विशेष कंट्रोल-रूम बनाया गया है जहां हर जिले से आने वाली रिपोर्टों का विश्लेषण हो रहा है। किस जिले में कितने संदिग्ध मिले, कितनों की बायोमेट्रिक प्रोफाइल बनी, किस इलाके में फर्जी आईडी का नेटवर्क सक्रिय है, सभी डेटा प्रतिदिन अफसरों को भेजा जा रहा है। सरकार का दावा है कि यह अभियान पूरा होने के बाद यूपी में अवैध घुसपैठ लगभग असंभव हो जाएगी।