New RTE admission rules in UP: बच्चों की पढ़ाई को लेकर गरीब और वंचित परिवारों को अक्सर सबसे बड़ी दिक्कत एडमिशन की शर्तों में आती है। खासकर आधार कार्ड जैसी औपचारिकताएं कई बार बच्चों के दाखिले में रुकावट बन जाती थीं। अब उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए बच्चों के आधार कार्ड की अनिवार्यता खत्म कर दी है। इससे राइट टू एजुकेशन (RTE) के तहत प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन लेना आसान हो जाएगा।
क्या बदला नियमों में?
पहले ऑनलाइन आवेदन करते समय बच्चे और दोनों अभिभावकों का आधार कार्ड जरूरी होता था। अब नए नियमों के तहत सिर्फ माता-पिता में से किसी एक का आधार कार्ड और आधार-लिंक्ड बैंक अकाउंट देना होगा। बच्चों का आधार कार्ड अब जरूरी नहीं है। सरकार RTE के तहत दी जाने वाली वित्तीय सहायता सीधे माता-पिता के आधार-सीडेड बैंक अकाउंट में भेजेगी।
सरकार का मकसद
बेसिक और सेकेंडरी एजुकेशन के अतिरिक्त मुख्य सचिव पार्थसार्थी सेन शर्मा ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि वंचित परिवारों की परेशानियों को कम किया जाए। यानी एडमिशन की प्रक्रिया को जितना हो सके सरल और पारदर्शी बनाया जाए।
कितनी सीटें मिलेंगी?
RTE एक्ट 2009 के सेक्शन 120(c) के मुताबिक, जिले के सभी प्राइवेट स्कूलों की एंट्री क्लास (नर्सरी या क्लास 1) की कुल सीटों का 25% हिस्सा वंचित बच्चों के लिए आरक्षित रहेगा। हर जिले में वार्षिक लक्ष्य इसी आधार पर तय होगा। सभी जिलाधिकारियों को नए निर्देश भेज दिए गए हैं।
आयु सीमा
- 3 से 4 साल के बच्चे नर्सरी में दाखिले के लिए योग्य होंगे।
- 4 से 5 साल के बच्चे LKG में दाखिले के लिए योग्य होंगे।
- 6 से 7 साल के बच्चे क्लास 1 में दाखिले के लिए योग्य होंगे।
एडमिशन कैसे होगा?
- डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर और बेसिक शिक्षा अधिकारी करेंगे।
- स्कूल अलॉटमेंट के लिए ऑनलाइन लॉटरी सिस्टम होगा।
- दो-स्टेज लॉटरी में पहले एप्लिकेशन को रैंडम शफल किया जाएगा।
- फिर 100-100 के बैच में स्कूल अलॉट होंगे।
- जिलाधिकारी अंतिम लिस्ट को मंजूरी देंगे।
यह बदलाव सिर्फ नियमों में संशोधन नहीं है, बल्कि उन हजारों परिवारों के लिए राहत है जो चाहते थे कि उनके बच्चे भी अच्छे स्कूलों में पढ़ें। कम दस्तावेज, साफ प्रक्रिया और पारदर्शी लॉटरी, ये सब मिलकर RTE को जमीन पर ज्यादा मजबूत बनाते हैं।