Iran-US Ceasefire talks: दुनिया की नजरें जिस बातचीत पर टिकी थीं, वो आखिरकार बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई। अमेरिका और ईरान के बीच करीब 21 घंटे तक चली अहम बातचीत के बाद भी दोनों देश किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके। इस बातचीत से उम्मीद थी कि युद्ध और तनाव में कुछ कमी आएगी, लेकिन अब हालात और पेचीदा हो गए हैं।
क्यों नहीं बनी बात?
जेडी वेंस ने इस्लामाबाद छोड़ते वक्त साफ शब्दों में कहा, "यह खबर अमेरिका से ज्यादा ईरान के लिए बुरी है।" उनके साथ ट्रंप के खास दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी मौजूद थे। वेंस के मुताबिक, अमेरिका चाहता है कि ईरान साफ तौर पर और लंबे समय के लिए यह वादा करे कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। उन्होंने कहा, “हमने अपनी शर्तें साफ रखीं, लेकिन ईरान ने उन्हें स्वीकार नहीं किया।” दूसरी तरफ ईरान का कहना है कि वह परमाणु बम नहीं बना रहा और अमेरिका की मांगें जरूरत से ज्यादा और अनुचित हैं।
अमेरिका का प्रस्ताव बनाम ईरान की शर्तें
इस बातचीत में अमेरिका ने 15 पॉइंट का प्रस्ताव रखा था। इसमें ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर सख्ती और होर्मुज स्ट्रेट को खोलने जैसी मांगें शामिल थीं। वहीं ईरान ने 10 पॉइंट का काउंटर प्रस्ताव दिया, जिसमें युद्ध खत्म करने की गारंटी, स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण बनाए रखने और लेबनान में इजराइली हमले रोकने जैसी शर्तें थीं। यही मतभेद दोनों देशों के बीच समझौते की सबसे बड़ी बाधा बने।
क्या है अमेरिका का फाइनल ऑफर?
जेडी वेंस ने बातचीत के बाद कहा कि अमेरिका अपनी तरफ से फाइनल और बेस्ट ऑफर टेबल पर छोड़कर आया है। उन्होंने कहा कि अब यह ईरान पर निर्भर है कि वह इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है या नहीं। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि बातचीत में कुछ प्रगति जरूर हुई, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।
होर्मुज स्ट्रेट अब भी बंद
इस पूरी लड़ाई का सबसे बड़ा केंद्र 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' बना हुआ है, जो अब भी बंद है। जहां से दुनिया का 20% तेल गुजरता है, वहां अब सन्नाटा है। सीजफायर के बाद सिर्फ 12 जहाज वहां से निकले हैं, जबकि पहले रोजाना 100 से ज्यादा जहाज गुजरते थे। इसका असर सीधे तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा, "हम जलडमरूमध्य को साफ कर रहे हैं। समझौता हो या न हो, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।" अमेरिकी नौसेना ने वहां नए रास्ते बनाने और माइन हटाने का काम शुरू कर दिया है, जबकि ईरान की मीडिया इन दावों को सिरे से खारिज कर रही है।
क्या फिर शुरू होगी जंग?
युद्ध अब अपने सातवें हफ्ते में है। वहीं इस बातचीत के फेल होने से हाल ही में घोषित दो हफ्ते का सीजफायर भी खतरे में पड़ गया है। अमेरिका ने कहा था कि बातचीत के दौरान वह हमले रोकेगा, लेकिन अब यह साफ नहीं है कि आगे क्या होगा। ईरान ने भी साफ संकेत दिया है कि अगर उस पर फिर हमला हुआ, तो वह जवाबी कार्रवाई करने के लिए तैयार है। यानी आने वाले दिनों में हालात और तनावपूर्ण हो सकते हैं।
हालांकि दोनों देशों के कुछ तकनीकी कर्मचारी अभी भी इस्लामाबाद में मौजूद हैं और बातचीत के छोटे रास्ते खुले हैं, लेकिन फिलहाल माहौल तनावपूर्ण है। दुनिया की नजरें अब वॉशिंगटन पर हैं, जहां मंगलवार को इजरायल और लेबनान के बीच बातचीत होनी है।