अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद अमेरिका ने सख्त रुख अपनाते हुए सीरिया में इस्लामिक स्टेट के खिलाफ बड़े सैन्य हमले शुरू कर दिए हैं। यह कार्रवाई उस हमले के जवाब में की गई है, जिसमें घात लगाकर किए गए हमले में अमेरिकी सैनिकों की जान गई थी। अमेरिका ने साफ संकेत दिया है कि वह अपने लोगों की सुरक्षा को लेकर कोई नरमी नहीं बरतेगा।
क्या हुआ था एक हफ्ते पहले?
करीब एक सप्ताह पहले घात लगाकर किए गए हमले में दो अमेरिकी सैनिक और एक अमेरिकी दुभाषिया मारे गए थे। अमेरिका ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर ISIS को जिम्मेदार ठहराया। इसके बाद से ही जवाबी कार्रवाई को लेकर संकेत मिलने लगे थे।
ISIS पर बड़ा सैन्य ऑपरेशन: 70 ठिकाने निशाने पर
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह बड़े पैमाने का सैन्य अभियान है। मध्य सीरिया के उन इलाकों में करीब 70 ठिकानों को निशाना बनाया गया, जहां ISIS का ढांचा और हथियार मौजूद थे। अमेरिका के एक अन्य अधिकारी ने अपना नाम गोपनीय रखे जाने की शर्त पर कहा कि और भी हमले किए जा सकते हैं।
कौन-कौन से हथियार और विमान हुए इस्तेमाल
इस ऑपरेशन में अमेरिका ने अपनी ताकत का पूरा इस्तेमाल किया। एफ-15 ईगल और ए-10 थंडरबोल्ट लड़ाकू विमानों के साथ एएच-64 अपाचे हेलीकॉप्टर तैनात किए गए। इसके अलावा जॉर्डन के एफ-16 फाइटर जेट्स और HIMARS रॉकेट सिस्टम का भी सहारा लिया गया।
रक्षा मंत्री का बयान: “यह जंग नहीं, बदले की कार्रवाई”
अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह युद्ध की शुरुआत नहीं है, बल्कि बदले की घोषणा है। उन्होंने दो टूक कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका अपने लोगों की सुरक्षा के लिए कभी पीछे नहीं हटेगा।
आतंकवादियों को ट्रंप की चेतावनी
सीरियाई रेगिस्तान में पिछले सप्ताह हुई गोलीबारी के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी जवाबी कार्रवाई करने का संकल्प लिया था और इन हमलों के लिए उन्होंने आईएस को जिम्मेदार ठहराया था। मारे गए सैनिक उन सैकड़ों अमेरिकी सैनिकों में शामिल थे जो आतंकवादी संगठन के खिलाफ गठबंधन के तहत पूर्वी सीरिया में तैनात हैं।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि ये हमले आईएस के गढ़ों को निशाना बनाकर किए जा रहे हैं। उन्होंने सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के प्रति अपना समर्थन दोहराते हुए कहा कि वह (सीरियाई राष्ट्रपति) इस अभियान का पूरी तरह समर्थन कर रहे हैं।
उन्होंने आतंकवादियों को चेतावनी देते हुए कहा, “जो भी आतंकवादी अमेरिका पर हमला करने या धमकी देने की हिम्मत करेंगे, उन्हें पहले से कहीं ज्यादा कड़ा जवाब मिलेगा।”