
Strait of Hormuz : दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद अमेरिकी नौसेना ने ईरान के सभी पोर्ट्स की घेराबंदी शुरू कर दी है। यह कदम तब उठाया गया जब पाकिस्तान के इस्लामाबाद में चल रही शांति वार्ता बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई।
अमेरिका के ताजा कदम से पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह ठप हो सकती है। इस रिपोर्ट में हम खाड़ी क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के आधिकारिक बयानों और ईरान के सैन्य नेतृत्व की जवाबी चेतावनियों के जरिए ग्राउंड जीरो की स्थिति पेश करेंगे। होर्मुज जलडमरूमध्य एक बेहद महत्वपूर्ण और संकरा समुद्री मार्ग है, जिसके जरिए दुनिया की कुल तेल आपूर्ति के लगभग पांचवें हिस्से का परिवहन होता है।
यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ऐलान किया है कि अमेरिकी सेना सोमवार सुबह 10 बजे (न्यूयार्क समय) से ईरान के पोर्ट्स पर आने-जाने वाले सभी समुद्री जहाजों को रोकना शुरू कर देगी। यह पाबंदी निष्पक्ष रूप से सभी देशों के जहाजों पर लागू होगी जो ईरान के बंदरगाहों या तटीय इलाकों की ओर जा रहे हैं। हालांकि, CENTCOM ने स्पष्ट किया है कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य से गैर-ईरानी पोर्ट्स की ओर जाने वाले जहाजों का रास्ता नहीं रोकेंगे।
अमेरिका के इस कदम पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि किसी भी गलत कदम का नतीजा दुश्मन के लिए 'होर्मुज के घातक भंवर' जैसा होगा। ईरान का दावा है कि इस पूरे समुद्री रास्ते पर उसकी सुरक्षा बलों का पूरा कंट्रोल है। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के मुताबिक, किसी भी सैन्य जहाज का इस क्षेत्र में आना सीजफायर का उल्लंघन माना जाएगा और उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा।
अमेरिका के इस फैसले का असर तुरंत ग्लोबल मार्केट पर दिखा है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 7% से ज्यादा बढ़कर 101.91 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) भी लगभग 8% की तेजी के साथ 104.16 डॉलर पर ट्रेड कर रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस घेराबंदी से ईरान का रोजाना 20 लाख बैरल तेल का निर्यात रुक सकता है।
ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस घेराबंदी का सबसे ज्यादा असर चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देशों पर पड़ेगा। ये देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का 80% हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से मंगाते हैं। अगर तनाव और बढ़ा और होर्मुज का रास्ता पूरी तरह बंद हुआ, तो कच्चे तेल की कीमतें 170 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं, जिससे ग्लोबल जीडीपी ग्रोथ गिरकर 2.2% रह जाएगी।
| परिदृश्य (Scenario) | तेल की कीमत (प्रति बैरल) | वैश्विक GDP ग्रोथ |
|---|---|---|
| सामान्य स्थिति (Base Case) | $85 - $105 | 2.90% |
| बढ़ा हुआ तनाव (High Intensity) | $170 | 2.20% |
| शांति बहाली (Ceasefire) | युद्ध-पूर्व स्तर | 3.10% |
इस्लामाबाद में हुई बातचीत के नाकाम होने के पीछे दोनों पक्षों के अपने तर्क हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि ईरान ने होर्मुज का रास्ता खोलने का वादा तोड़कर दुनिया को संकट में डाला है। दूसरी तरफ, ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने भारत में कहा कि बातचीत अमेरिका की 'असीमित मांगों' की वजह से विफल हुई। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी गरिमा और अधिकारों से समझौता नहीं करेगा।
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