पाक समर्थक जमात-ए-इस्लामी से US की नजदीकी, बढ़ सकती है भारत-अमेरिका रिश्तों में खटास

अमेरिका की ओर से पाकिस्तान समर्थक कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी (JeI) से बढ़ता संपर्क भारत-अमेरिका रिश्तों में एक नया तनाव पैदा कर सकता है। यह कदम भारत के लिए असहज करने वाला माना जा रहा है।

Ashutosh Kumar
पब्लिश्ड25 Jan 2026, 10:57 AM IST
जमात-ए-इस्लामी
जमात-ए-इस्लामी

अमेरिका की ओर से पाकिस्तान समर्थक कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी (JeI) से बढ़ता संपर्क भारत-अमेरिका रिश्तों में एक नया तनाव पैदा कर सकता है। बताया जा रहा है कि अमेरिका राजनीतिक उथल-पुथल से गुजर रहे बांग्लादेश में इस पार्टी को चुनावी राजनीति में आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन दे रहा है। ऐसे समय में जब नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर लंबी बातचीत चल रही है, और ट्रंप प्रशासन पाकिस्तान के साथ संपर्क बढ़ा रहा है। यह कदम भारत के लिए असहज करने वाला माना जा रहा है। कूटनीतिक हलकों में इसे भारत-अमेरिका संबंधों के लिए एक संभावित “इरिटेंट” के तौर पर देखा जा रहा है।

जमात-ए-इस्लामी पर लग चुका है प्रतिबंध

डिप्लोमैटिक सूत्रों और बांग्लादेश मामलों के जानकारों का कहना है कि अमेरिका का जमात-ए-इस्लामी को दोबारा मुख्यधारा की राजनीति में लाने की कोशिश कई सवाल खड़े करती है। यह वही पार्टी है, जिस पर पहले बांग्लादेश में प्रतिबंध लगाया जा चुका है और जिसका इतिहास कट्टरपंथी विचारधाराओं से जुड़ा रहा है। अमेरिका की यह कोशिश ऐसे वक्त पर सामने आई है, जब बांग्लादेश में चुनावी माहौल गर्म है। वहां की राजनीति बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि वॉशिंगटन की यह रणनीति न सिर्फ क्षेत्रीय समीकरणों को प्रभावित कर सकती है, बल्कि भारत की सुरक्षा चिंताओं को भी नजरअंदाज करती दिखती है।

उग्रवादी गुटों को बढ़ावा देने का आरोप

इतिहास गवाह है कि जमात-ए-इस्लामी ने कई मौकों पर भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ काम किया है। संगठन पर उत्तर-पूर्व भारत में सक्रिय उग्रवादी और चरमपंथी गुटों को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में अमेरिका का इस पार्टी के साथ नजदीकी बढ़ाना नई दिल्ली के लिए चिंता का विषय बन गया है। जानकारों का कहना है कि अगर वॉशिंगटन इस रास्ते पर आगे बढ़ता है, तो भारत-अमेरिका रिश्तों में पहले से मौजूद व्यापार और रणनीतिक मतभेद और गहरे हो सकते हैं। डिजिटल दौर में यह मुद्दा अब सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं, बल्कि आम लोगों की नजर में भी दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय करने वाला बनता जा रहा है।

ट्रंप की बयानबाजी से पहले भी खटास

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बार-बार की बयानबाजी ने भारत-अमेरिका रिश्तों में पहली बार साफ खटास पैदा की थी। ट्रंप लगातार इस ऑपरेशन का श्रेय लेने की कोशिश करते दिखे और कई मंचों पर यह दावा किया कि भारत ने उनकी मध्यस्थता या दबाव में आकर कदम उठाया। भारत ने इसे सिरे से खारिज किया और साफ किया कि ऑपरेशन सिंदूर पूरी तरह भारत का स्वतंत्र और संप्रभु फैसला था। ट्रंप की “मैंने रुकवाया”, “मेरी वजह से हुआ” जैसी रट ने नई दिल्ली को असहज कर दिया और दोनों देशों के बीच भरोसे पर सवाल खड़े कर दिए।

अब रिश्तों में ज्यादा सतर्क रुख

डिजिटल दौर में यह बयानबाजी तेजी से फैली और भारत में इसे आंतरिक मामलों में दखल के तौर पर देखा गया। कूटनीतिक स्तर पर भले ही रिश्ते संभाले गए हों, लेकिन रणनीतिक साझेदारी की चमक फीकी पड़ती दिखी। विशेषज्ञों का मानना है कि यहीं से भारत ने अमेरिका के साथ रिश्तों में ज्यादा सतर्क रुख अपनाना शुरू किया, ताकि भविष्य में किसी भी ऑपरेशन या सुरक्षा फैसले पर बाहरी दावे न हों।

Get Latest real-time updates

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

बिजनेस न्यूज़न्यूज़पाक समर्थक जमात-ए-इस्लामी से US की नजदीकी, बढ़ सकती है भारत-अमेरिका रिश्तों में खटास
More
बिजनेस न्यूज़न्यूज़पाक समर्थक जमात-ए-इस्लामी से US की नजदीकी, बढ़ सकती है भारत-अमेरिका रिश्तों में खटास