Middle East Tension Reduction: मिडिल ईस्ट में मचे घमासान के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से एक ऐसी खबर आई है, जिसने पूरी दुनिया को थोड़ा सुकून दिया है। ट्रंप ने ऐलान किया है कि उन्होंने अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) को निर्देश दिया है कि ईरान के पावर प्लांट्स और ऊर्जा ठिकानों पर होने वाले किसी भी सैन्य हमले को फिलहाल 5 दिनों के लिए टाल दिया जाए।
कैसे बदल गए ट्रंप के सुर?
यह फैसला किसी दबाव में नहीं, बल्कि पिछले 48 घंटों में हुई 'पर्दे के पीछे' की हलचल का नतीजा बताया जा रहा है। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो दिनों में बेहद सकारात्मक और सार्थक बातचीत हुई है। ट्रंप ने दावा किया कि दोनों देश अब मिडिल ईस्ट में जारी दशकों पुराने तनाव को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में गंभीर चर्चा कर रहे हैं।
5 दिन पावर प्लांट पर नहीं होगा कोई हमला
ट्रंप ने ट्रुथ पर लिखा कि ईरान के साथ हुई बातचीत उम्मीद से कहीं ज्यादा बेहतर रही है। हम मिडिल ईस्ट में जारी टकराव का एक स्थायी समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह विस्तृत बातचीत पूरे सप्ताह जारी रहने वाली है। इसी सकारात्मक माहौल को बनाए रखने के लिए उन्होंने पावर प्लांट पर हमलों को रोकने का फैसला किया है, ताकि कूटनीति को एक मौका मिल सके।
ईरान की चेतावनी
इसी बीच ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके तटीय क्षेत्रों या द्वीपों पर हमला किया गया तो वो पूरी फारस की खाड़ी में बारूदी सुरंगें बिछाकर सभी समुद्री मार्गों को बंद कर देगा। समाचार एजेंसी फारस की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की रक्षा परिषद ने कहा कि गैर-युद्धरत देशों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने का एकमात्र तरीका ईरान के साथ समन्वय करना होगा।
परिषद ने कहा कि ईरान के तटों या द्वीपों पर किसी भी शत्रु हमले की स्थिति में फारस की खाड़ी और तटीय क्षेत्रों के सभी मार्गों तथा संचार लाइनों को विभिन्न प्रकार की नौसैनिक बारूदी सुरंगों से भर दिया जाएगा। बयान में कहा गया कि ऐसी स्थिति में पूरी फारस की खाड़ी प्रभावी रूप से बंद हो जाएगी और इसकी जिम्मेदारी उस पक्ष पर होगी जो हमला करेगा। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब ईरान की सेना पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने और क्षेत्रीय ढांचे को निशाना बनाने की बात कह चुकी है, यदि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी उस चेतावनी को अमल में लाते हैं, जिसमें जलडमरूमध्य नहीं खोलने पर ईरान के बिजली संयंत्रों पर हमले की बात कही गयी है।